आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडू

अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने की दिशा में बड़ा कदम,लोकसभा में पेश होगा संशोधन विधेयक

नई दिल्ली,1 अप्रैल (युआईटीवी)- आंध्र प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है,जहाँ केंद्र सरकार अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी का वैधानिक दर्जा देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इस दिशा में लोकसभा में बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2026 पेश किया जाएगा। इस विधेयक के जरिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में संशोधन प्रस्तावित है, जिससे राजधानी को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को खत्म किया जा सके।

प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम की धारा 5 की उप-धारा (2) में बदलाव किया जाएगा। मौजूदा प्रावधान में ‘और एक नई राजधानी होगी’ शब्दों का उल्लेख है, जिसे बदलकर ‘और अमरावती नई राजधानी होगी’ किया जाएगा। इस बदलाव का सीधा उद्देश्य राज्य की राजधानी के नाम को स्पष्ट रूप से कानून में शामिल करना है,ताकि भविष्य में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे।

इस संशोधन की व्याख्या में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ‘अमरावती’ शब्द के अंतर्गत वे सभी क्षेत्र शामिल होंगे,जिन्हें आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2014 के तहत अधिसूचित किया गया है। इसका मतलब यह है कि राजधानी क्षेत्र का दायरा पहले से निर्धारित प्रशासनिक सीमाओं के अनुसार ही रहेगा,लेकिन उसे अब कानूनी रूप से स्पष्ट पहचान मिल जाएगी।

गौरतलब है कि यह संशोधन 2 जून, 2024 से प्रभावी माना जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस निर्णय को पिछली तारीख से लागू करना चाहती है,ताकि प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में कोई बाधा न आए। यह कदम राज्य के विकास और प्रशासनिक स्थिरता की दिशा में अहम माना जा रहा है।

इस विधेयक के पीछे की पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल,आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 28 मार्च, 2026 को एक प्रस्ताव पारित किया था,जिसमें केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया था कि वह पुनर्गठन अधिनियम की धारा 5 में संशोधन करे। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ‘अमरावती’ को राज्य की नई और एकमात्र राजधानी के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दिलाना था। विधानसभा के इस कदम ने केंद्र सरकार के लिए विधायी प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया।

राज्य में तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लंबे समय से अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने के पक्ष में रही है। इससे पहले राज्य में तीन राजधानी मॉडल को लेकर भी विवाद रहा था,जिसमें विशाखापट्टनम,अमरावती और कुरनूल को अलग-अलग प्रशासनिक भूमिकाएँ देने का प्रस्ताव था। हालाँकि,वर्तमान सरकार ने इस मॉडल को बदलते हुए अमरावती को ही एकमात्र राजधानी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

विशेष सत्र के दौरान पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार से यह भी अनुरोध किया गया था कि वह जल्द-से-जल्द अधिसूचना जारी कर अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी घोषित करे। अब लोकसभा में पेश होने वाला यह संशोधन विधेयक उसी दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक के पारित होने के बाद आंध्र प्रदेश में प्रशासनिक ढाँचे को मजबूती मिलेगी और निवेशकों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा। राजधानी को लेकर स्पष्टता होने से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास,सरकारी कार्यालयों के संचालन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

हालाँकि,इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी जारी है। विपक्षी दलों का मानना है कि राजधानी को लेकर लिए गए फैसलों में व्यापक चर्चा और सहमति की आवश्यकता है,ताकि सभी क्षेत्रों के विकास को संतुलित किया जा सके। वहीं सरकार का कहना है कि एक मजबूत और केंद्रीकृत राजधानी राज्य के समग्र विकास के लिए जरूरी है।

अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने की दिशा में यह विधेयक एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। यदि यह संसद से पारित हो जाता है,तो आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय शुरू होगा। अब सभी की नजरें लोकसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं,जहाँ इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और निर्णय लिया जाएगा।