नई दिल्ली,6 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री अस्थिरता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय से फँसे भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी का सिलसिला जारी है और इसी कड़ी में एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन आशा’ ने इस खतरनाक जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है,जब इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और कई जहाज पहले हमलों और अवरोधों का सामना कर चुके हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। इस दौरान कई तेल और गैस से भरे जहाज इस क्षेत्र में फँस गए थे और कुछ पर हमले भी किए गए थे। इसके चलते इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरना जोखिम भरा हो गया था। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम इस रास्ते के प्रभावित होने से कई देशों की चिंता बढ़ गई थी,जिनमें भारत भी शामिल है।
हालाँकि,हालात को सँभालने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास तेज किए गए,जिसके बाद धीरे-धीरे जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट के अनुसार,3 अप्रैल को एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन सान्वी’ के सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने के बाद रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने भी इस खतरनाक रास्ते को पार कर लिया। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है,क्योंकि इससे ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जगी है।
‘ग्रीन आशा’ के सुरक्षित निकलने के बाद अब इस क्षेत्र में केवल एक भारतीय जहाज ‘जग विक्रम’ ही बचा है,जो अभी भी इस खतरनाक जलमार्ग में फँसा हुआ है। बताया जा रहा है कि यह जहाज भारतीय नौसेना से आगे के निर्देशों का इंतजार कर रहा है,ताकि वह सुरक्षित तरीके से इस क्षेत्र से बाहर निकल सके। भारतीय नौसेना और संबंधित एजेंसियाँ इस जहाज की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और समन्वय में जुटी हुई हैं।
इससे पहले भी दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारत पहुँच चुके हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है। 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर लौट रहा ‘ग्रीन सान्वी’ 7 अप्रैल तक गुजरात के भरूच जिले के दहेज बंदरगाह पहुँचने की उम्मीद है। यह खेप देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।
इसी बीच,एलपीजी कैरियर ‘बीडब्ल्यू टीवाईआर’ फिलहाल मुंबई में मौजूद है और शहर की बाहरी बंदरगाह सीमा पर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर ऑपरेशन के जरिए अपना माल उतार रहा है। वहीं एक अन्य जहाज ‘बीडब्ल्यू ईएलएम’ को 4 अप्रैल को चेन्नई के एन्नोर बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अपने ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों का भी सहारा ले रहा है।
पिछले सप्ताह ‘जग वसंत’ नामक जहाज 47,612 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के कच्छ स्थित कांडला बंदरगाह पहुँचा,जबकि ‘पाइन गैस’ ने न्यू मैंगलोर में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की। इन घटनाओं से यह साफ है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपने समुद्री आपूर्ति तंत्र को सक्रिय बनाए रखा है।
शिपिंग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार,वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय जहाज और नाविक मौजूद हैं। लगभग 16 भारतीय जहाज फ़ारसी खाड़ी में हैं,जो होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में स्थित है। इसके अलावा चार जहाज ओमान की खाड़ी में,एक अदन की खाड़ी में और दो लाल सागर में मौजूद हैं। इन जहाजों में से पाँच ‘शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ के हैं, जो देश की प्रमुख शिपिंग कंपनी है।
इसके अलावा,भारत के बड़े बंदरगाहों पर भी पश्चिम एशिया जाने वाले चार जहाज खड़े हैं, जो स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे क्षेत्र में लगभग 20,000 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं,जो इस संकट के बीच एक बड़ी चिंता का विषय भी बने हुए हैं। इनमें से 528 नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों पर सवार हैं,जबकि 433 नाविक फ़ारसी खाड़ी में और 95 ओमान की खाड़ी में मौजूद हैं।
सरकार और शिपिंग कंपनियों ने मिलकर अब तक 1,479 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है,जो एक बड़ी राहत की बात है। हालाँकि,अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय नाविक इस क्षेत्र में कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार के लिए प्राथमिकता बना हुआ है।
होर्मुज संकट के बीच भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रही है,लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते नजर आ रहे हैं। ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित रूप से इस खतरनाक जलमार्ग को पार करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब सभी की नजर ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित वापसी पर टिकी हुई है,जो इस पूरे अभियान का अंतिम और अहम चरण साबित हो सकता है।
