मुंबई,5 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रस्तावित करीब 30,000 करोड़ रुपये के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया है। सेबी की ओर से ऑब्जर्वेशन लेटर मिलना एनएसई के आईपीओ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही एक्सचेंज अब सार्वजनिक निर्गम की अंतिम तैयारियों की ओर बढ़ गया है। अगली प्रक्रिया के तहत एनएसई को सेबी के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी आरएचपी जमा करना होगा। इसके बाद बाजार की परिस्थितियों और अन्य प्रक्रियाओं के आधार पर आईपीओ को लॉन्च किया जा सकेगा।
एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के रूप में होगा। इसका मतलब है कि आईपीओ के जरिए जुटाई जाने वाली रकम सीधे एनएसई के पास नहीं जाएगी,बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। प्रस्ताव के तहत करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की जानी है। यह एनएसई की कुल पेड-अप कैपिटल का लगभग छह प्रतिशत हिस्सा होगा। इस तरह आईपीओ के जरिए एक्सचेंज के मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बाजार में बेचकर पूँजी जुटाने का अवसर मिलेगा।
प्रस्तावित आईपीओ में कई बड़े संस्थागत निवेशक और वित्तीय संस्थान अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक,एसबीआई समूह की ओर से करीब 2.475 करोड़ शेयरों की बिक्री की जा सकती है। इसके अलावा एमएस स्ट्रैटेजिक मॉरिशस लिमिटेड लगभग 1.60 करोड़ शेयर, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड करीब 1.19 करोड़ शेयर और अरंडा इन्वेस्टमेंट्स मॉरिशस प्राइवेट लिमिटेड लगभग 1.12 करोड़ शेयर बेच सकती है। बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से करीब 1.10 करोड़ और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से लगभग 1.09 करोड़ शेयरों की बिक्री प्रस्तावित है।
इसके अलावा कई सरकारी बीमा कंपनियों के भी इस आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचने की संभावना है। हालाँकि,अंतिम तौर पर कितने शेयर किस निवेशक या संस्था की ओर से बेचे जाएँगे, यह आईपीओ से जुड़े अंतिम दस्तावेजों और प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट होगा। चूँकि पूरा इश्यू ओएफएस है,इसलिए इसका प्रमुख उद्देश्य मौजूदा शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने का अवसर देना है। कंपनी के पास आईपीओ से सीधे नई पूंजी आने की स्थिति नहीं होगी।
एनएसई के आईपीओ को लेकर लंबे समय से बाजार में चर्चा होती रही है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल एनएसई की लिस्टिंग का इंतजार निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों को काफी समय से है। सेबी की ओर से ऑब्जर्वेशन लेटर जारी होने के बाद अब इस दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामकीय बाधा पार हो गई है। हालाँकि,इसके बाद भी आईपीओ लॉन्च होने से पहले कई प्रक्रियाएँ पूरी करनी होंगी। इनमें आरएचपी दाखिल करना,अंतिम दस्तावेज तैयार करना और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इश्यू की समयसीमा तय करना शामिल है।
एनएसई की लिस्टिंग का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर सूचीबद्ध होंगे। इससे देश के दो प्रमुख शेयर बाजारों के बीच प्रतिस्पर्धा और बाजार संरचना के संदर्भ में भी यह आईपीओ महत्वपूर्ण बन जाता है। एनएसई की लिस्टिंग के बाद निवेशकों को एक्सचेंज के शेयरों में सीधे कारोबार करने का अवसर मिलेगा,जिससे भारतीय पूँजी बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
एनएसई के अपने ही एक्सचेंज पर शेयरों की ट्रेडिंग को लेकर भी पिछले दिनों काफी चर्चा हुई थी। इसी महीने की शुरुआत में बीएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदररमन राममूर्ति ने कहा था कि एनएसई ने पुष्टि की है कि लिस्टिंग के बाद वह अपने ही एक्सचेंज पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति नहीं मांगेगा। यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद आया था,जिनमें दावा किया गया था कि एनएसई परमिटेड-टू-ट्रेड यानी पीटीटी श्रेणी के तहत अपने ही एक्सचेंज पर कारोबार करने की अनुमति माँग सकता है।
राममूर्ति के मुताबिक,एनएसई ने स्पष्ट किया है कि ऑफर डॉक्यूमेंट के साथ सेल्फ-ट्रेडिंग के लिए कोई अतिरिक्त या सप्लीमेंट्री दस्तावेज जारी नहीं किया जाएगा। इस स्पष्टीकरण से एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग के बाद उनके कारोबार को लेकर बनी अटकलों पर काफी हद तक विराम लगा है। अपने ही एक्सचेंज पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग को लेकर हितों के टकराव और नियामकीय पहलुओं को देखते हुए यह मुद्दा बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राममूर्ति ने यह भी बताया था कि बीएसई ने वर्ष 2017 में अपने ही एक्सचेंज पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति माँगी थी,लेकिन उसे इसकी इजाजत नहीं मिली थी। ऐसे में एनएसई की ओर से अपने ही प्लेटफॉर्म पर सेल्फ-ट्रेडिंग की अनुमति नहीं माँगने की पुष्टि को बाजार नियमन और पारदर्शिता के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेबी की मंजूरी के इस चरण के बाद अब एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ पर निवेशकों की निगाहें और बढ़ गई हैं। करीब 30,000 करोड़ रुपये के अनुमानित आकार वाला यह इश्यू भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है। हालाँकि, वास्तविक इश्यू का आकार,शेयरों की कीमत और अन्य महत्वपूर्ण शर्तें अंतिम दस्तावेजों और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी।
एनएसई के लिए यह आईपीओ सिर्फ लिस्टिंग की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे एक्सचेंज की कॉरपोरेट संरचना और उसके शेयरधारकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर तैयार होगा। दूसरी ओर, निवेशकों के लिए देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी हासिल करने का यह एक अनोखा मौका हो सकता है। अब सेबी से ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के बाद अगला बड़ा कदम आरएचपी दाखिल करना होगा। इसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनएसई अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ को किस समय बाजार में उतारता है और निवेशकों की ओर से उसे कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।
