नई दिल्ली,21 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर ईरान परमाणु समझौता बहस के केंद्र में आ गया है,जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने समझौते को देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि उनकी अगुवाई में तैयार की जा रही नई डील पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत,सख्त और प्रभावी होगी, जो न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान के साथ हुआ जेसीपीओए,जिसे आमतौर पर ईरान परमाणु समझौता कहा जाता है,अमेरिका के इतिहास के सबसे खराब समझौतों में से एक था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन के नेतृत्व में किया गया था,जिसने ईरान को परमाणु हथियारों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। ट्रंप के मुताबिक,यह समझौता न केवल रणनीतिक रूप से कमजोर था,बल्कि इससे अमेरिका की वैश्विक स्थिति भी प्रभावित हुई।
अपने बयान में ट्रंप ने आर्थिक पहलुओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के तहत ईरान को भारी मात्रा में नकद राशि दी गई थी। उन्होंने कहा कि लगभग 1.7 बिलियन डॉलर नकद रूप में एक विमान के जरिए ईरान भेजा गया था,जिसे वहाँ की सरकार अपनी मर्जी से खर्च कर सकती थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के लिए वॉशिंगटन डीसी,वर्जीनिया और मैरीलैंड के बैंकों से बड़ी मात्रा में नकदी निकाली गई थी,जो अपने आप में असामान्य और अभूतपूर्व कदम था।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि केवल नकद राशि ही नहीं,बल्कि सैकड़ों बिलियन डॉलर के अन्य आर्थिक लाभ भी ईरान को दिए गए,जिससे उस देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और वह अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में सक्षम हुआ। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने अपने कार्यकाल में इस समझौते को समाप्त नहीं किया होता,तो आज मध्य पूर्व की स्थिति कहीं अधिक खतरनाक होती। उनके अनुसार,इजरायल,मध्य पूर्व के अन्य देश और यहाँ तक कि अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी परमाणु खतरे के दायरे में आ सकते थे।
पूर्व राष्ट्रपति ने मीडिया पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ पत्रकार और समाचार संस्थान इस समझौते का समर्थन करते हैं,जबकि वे इसकी वास्तविक खामियों को जानते हैं। उन्होंने विशेष रूप से वॉशिंगटन पोस्ट के एक पत्रकार का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग जनता को गुमराह करने वाली है और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर निष्पक्षता जरूरी है।
ट्रंप ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनके नेतृत्व में ईरान के साथ कोई नया समझौता होता है,तो वह पूरी तरह अलग होगा। उन्होंने कहा कि नई डील इस तरह बनाई जाएगी कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने का मौका न मिले। इसके साथ ही यह समझौता वैश्विक स्तर पर शांति,स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नई डील केवल अमेरिका के हितों तक सीमित नहीं होगी,बल्कि इसका प्रभाव यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में भी सकारात्मक रूप से देखने को मिलेगा। ट्रंप के अनुसार,यह समझौता ऐसा होगा जिस पर पूरी दुनिया गर्व कर सकेगी, न कि पिछली तरह आलोचना और विवाद का सामना करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान से आगामी अमेरिकी चुनावों की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है,क्योंकि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे हमेशा से चुनावी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ईरान परमाणु समझौते को लेकर अमेरिका में पहले भी गहरी राजनीतिक विभाजन की स्थिति रही है और ट्रंप का यह ताजा बयान इस बहस को फिर से तेज कर सकता है।
दूसरी ओर,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले ही कई देशों के बीच मतभेद रहे हैं और ऐसे में किसी भी नए समझौते की दिशा और स्वरूप वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप के दावों और प्रस्तावित नई रणनीति को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं,जिनका जवाब आने वाले समय में ही मिल सकेगा।
ट्रंप का यह बयान न केवल पुराने समझौते की आलोचना है,बल्कि एक नए दृष्टिकोण की पेशकश भी करता है,जो भविष्य में अमेरिका की विदेश नीति को नई दिशा दे सकता है।
