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आरबीआई की नीतियों से भारत में आ सकता है 40 अरब डॉलर का निवेश,रुपये को मिल सकती है मजबूती: एसबीआई रिसर्च

नई दिल्ली,6 जून (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति और उससे जुड़े फैसलों को लेकर एसबीआई रिसर्च ने एक महत्वपूर्ण आकलन प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के अनुसार,केंद्रीय बैंक की नीतियों से आने वाले समय में भारत में लगभग 40 अरब डॉलर तक का पूँजी निवेश आ सकता है। इस संभावित निवेश प्रवाह का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दे सकता है और डॉलर के मुकाबले रुपया 92 से 93 के स्तर तक मजबूत हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक अगस्त में होने वाली अगली मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान ब्याज दरों को यथावत रख सकता है।

शुक्रवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में किसी बड़े नीतिगत बदलाव की ओर नहीं बढ़ेगा और आने वाले महीनों में महँगाई के आँकड़ों का बारीकी से विश्लेषण जारी रखेगा। रिपोर्ट के अनुसार,मौजूदा परिस्थितियों में आर्थिक विकास को समर्थन देना केंद्रीय बैंक की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार के एक वर्ग को जहाँ भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका दिखाई दे रही है,वहीं विकास से जुड़े कारक इस संभावना को कमजोर कर सकते हैं। यही कारण है कि अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीतिगत दरों में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं की जा रही है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि केंद्रीय बैंक मौजूदा स्थिति को बनाए रखते हुए अर्थव्यवस्था की दिशा पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर ही आगे कोई कदम उठाएगा।

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने हाल ही में सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही समिति ने अपनी तटस्थ नीति को भी जारी रखा। इस फैसले को बाजार और वित्तीय क्षेत्र में संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा गया। केंद्रीय बैंक ने जहाँ आर्थिक वृद्धि के अनुमान में संशोधन करते हुए उसे 6.6 प्रतिशत तक पहुँचाया,वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के अनुमान को भी संशोधित कर 5.1 प्रतिशत कर दिया।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार,इन संशोधित अनुमानों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है,जबकि महँगाई को लेकर भी केंद्रीय बैंक सतर्क बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौद्रिक नीति की भाषा और उसके संकेतों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर निगरानी बनाए रखने के साथ-साथ बाहरी आर्थिक जोखिमों से भी सतर्क है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय बैंक का तटस्थ रुख वास्तव में एक विवेकपूर्ण रणनीति है। इससे वित्तीय बाजारों और निवेशकों को स्थिरता का संदेश जाता है। केंद्रीय बैंक का यह दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि वह अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर आश्वस्त है और किसी प्रकार की घबराहट या अनिश्चितता को बढ़ावा नहीं देना चाहता। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी नीति निवेशकों का विश्वास मजबूत करती है और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद करती है।

एसबीआई रिसर्च ने अपने विश्लेषण में यह भी उल्लेख किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने नीति वक्तव्य में एक बार फिर रुपये की विनिमय दर को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कई बार रुपये की चाल आर्थिक बुनियादी कारकों के अनुरूप नहीं होती। यह संकेत उन चर्चाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है,जिनमें कुछ विश्लेषकों द्वारा यह तर्क दिया जा रहा था कि रुपये को डॉलर के मुकाबले और अधिक कमजोर होने दिया जाना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार,केंद्रीय बैंक की यह टिप्पणी ऐसे सभी अनुमानों और दावों पर विराम लगाने का काम करती है,जो रुपये को अत्यधिक कमजोर स्तरों तक जाने की संभावना व्यक्त कर रहे थे। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि इस प्रकार की अटकलें विदेशी मुद्रा बाजार में अनावश्यक सट्टेबाजी को बढ़ावा देती हैं,जिससे मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत में वास्तव में 40 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त पूँजी निवेश आता है,तो इसका सकारात्मक प्रभाव कई क्षेत्रों में दिखाई देगा। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी,वित्तीय बाजारों में तरलता बढ़ेगी और रुपये को भी समर्थन प्राप्त होगा। विदेशी निवेशकों का बढ़ता भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं को और मजबूत कर सकता है।

हाल के महीनों में भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। मजबूत विकास दर,नियंत्रित महँगाई,बढ़ता विदेशी निवेश और स्थिर बैंकिंग प्रणाली ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाए रखा है। ऐसे में यदि केंद्रीय बैंक की नीतियाँ इसी प्रकार संतुलित बनी रहती हैं,तो विदेशी पूँजी प्रवाह में और वृद्धि हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियाँ केवल महँगाई नियंत्रण तक सीमित नहीं हैं,बल्कि उनका उद्देश्य व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना भी है। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों,मुद्रा विनिमय दर और वित्तीय बाजारों की स्थिति को एक साथ ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रहा है।

आर्थिक जानकारों के अनुसार,वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब कई देशों की अर्थव्यवस्थाएँ चुनौतियों का सामना कर रही हैं,तब भारत का अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन निवेशकों के लिए विश्वास का आधार बन रहा है। यदि विदेशी पूँजी प्रवाह में अनुमानित बढ़ोतरी होती है और रुपया अपेक्षित स्तर तक मजबूत होता है,तो इससे आयात लागत कम करने,मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर,एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार,भारतीय रिजर्व बैंक की संतुलित मौद्रिक नीति, मजबूत आर्थिक आधार और निवेशकों का बढ़ता भरोसा आने वाले महीनों में देश की वित्तीय स्थिति को और मजबूत बना सकता है। साथ ही,विदेशी निवेश में संभावित वृद्धि और रुपये की मजबूती भारत की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।