ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@SavalRohit)

लेबनान को लेकर ईरान और राष्ट्रपति औन के बीच बढ़ी जुबानी जंग,हिज्बुल्लाह विवाद के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराया

तेहरान,6 जून (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच लेबनान को लेकर ईरान और लेबनानी नेतृत्व के बीच बयानबाजी का नया दौर शुरू हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें “असल दुश्मन” की पहचान करने की सलाह दी है। दोनों नेताओं के बीच यह सार्वजनिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है,जब लेबनान,इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है तथा क्षेत्र में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है।

विवाद की शुरुआत उस साक्षात्कार से हुई,जिसमें राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ईरान पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिका के साथ अपनी बातचीत और क्षेत्रीय रणनीति में लेबनान को एक मोल-भाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि लेबनान किसी भी बाहरी शक्ति की सौदेबाजी का उपकरण नहीं बन सकता। औन ने कहा कि लेबनान एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसके आंतरिक मामलों में किसी भी देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता।

राष्ट्रपति औन ने अपने साक्षात्कार में ईरान को सीधे संबोधित करते हुए कहा था कि लेबनान की जनता ने वर्षों तक संघर्ष,विस्थापन और अस्थिरता का सामना किया है और अब देश को शांति तथा पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय शक्तियों को अपने भू-राजनीतिक हितों के लिए लेबनान का उपयोग बंद करना चाहिए। उनके इस बयान को लेबनान की ओर से ईरान के प्रभाव के खिलाफ अब तक की सबसे स्पष्ट आलोचनाओं में से एक माना जा रहा है।

औन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी किया। उन्होंने राष्ट्रपति के साक्षात्कार का एक वीडियो साझा करते हुए तंज भरे अंदाज में लिखा कि उनके बयान ऐसे प्रतीत होते हैं मानो लेबनान के एक बड़े हिस्से पर ईरान ने कब्जा कर रखा हो,लाखों लोगों को विस्थापित किया हो और प्रतिदिन बमबारी कर रहा हो। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति औन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें लेबनान के वास्तविक दुश्मन की पहचान करनी चाहिए और अपने देश की रक्षा उसी से करनी चाहिए।

अराघची की यह टिप्पणी सीधे तौर पर इजरायल की ओर संकेत मानी जा रही है। ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि लेबनान में अस्थिरता और विनाश के लिए इजरायली सैन्य कार्रवाई जिम्मेदार है,जबकि लेबनान के भीतर एक बड़ा वर्ग मानता है कि हिज्बुल्लाह और उसके पीछे ईरान का प्रभाव भी देश को लगातार संघर्ष की ओर धकेलता रहा है।

अपने साक्षात्कार में राष्ट्रपति औन ने केवल ईरान की ही आलोचना नहीं की,बल्कि हिज्बुल्लाह को भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लेबनान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का समाधान युद्ध या हिंसा नहीं हो सकता। उनके अनुसार,केवल संवाद,कूटनीति और राजनीतिक समझौते के माध्यम से ही स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने हिज्बुल्लाह से अपील की कि वह सैन्य टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाए।

यह बयान ऐसे समय आया है,जब दक्षिणी लेबनान में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। हाल के दिनों में इजरायली हवाई हमलों और जवाबी हमलों में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार,दक्षिणी क्षेत्रों में हुए ताजा हमलों में कई नागरिकों की जान गई है। मृतकों में स्थानीय प्रशासन से जुड़े लोग,बच्चे और राहत कार्यों में जुटे कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं।

स्थिति को और गंभीर बनाते हुए लेबनानी सेना भी अब सीधे तौर पर हिंसा की चपेट में आती दिखाई दे रही है। रिपोर्टों के अनुसार,दक्षिणी लेबनान में एक हमले के दौरान लेबनानी सेना के कई जवानों की मौत हो गई,जिनमें एक अधिकारी भी शामिल था। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लेबनानी सेना अब तक हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष से दूरी बनाए रखने का प्रयास करती रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि लेबनान इस समय अत्यंत जटिल स्थिति का सामना कर रहा है। एक ओर देश को आर्थिक संकट,राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है,वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा उसे संघर्ष के केंद्र में बनाए हुए है। राष्ट्रपति जोसेफ औन की टिप्पणियों को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है,जहाँ वे लेबनान की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर देना चाहते हैं।

दूसरी ओर,ईरान यह तर्क देता रहा है कि वह लेबनान के प्रतिरोधी समूहों का समर्थन केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और इजरायली सैन्य कार्रवाइयों का मुकाबला करने के लिए करता है। तेहरान का दावा है कि हिज्बुल्लाह की भूमिका लेबनान की रक्षा से जुड़ी हुई है,जबकि उसके आलोचक कहते हैं कि इस समर्थन ने लेबनान को बार-बार क्षेत्रीय संघर्षों में उलझाया है।

पिछले कुछ महीनों में अमेरिका की मध्यस्थता से संघर्ष विराम स्थापित करने के प्रयास भी किए गए हैं। हालाँकि,कई दौर की बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर हिंसा पूरी तरह नहीं रुक सकी है। हवाई हमले,रॉकेट हमले और सीमा पार सैन्य गतिविधियाँ लगातार जारी हैं,जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

मध्य पूर्व के जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति औन और ईरानी विदेश मंत्री के बीच यह सार्वजनिक बयानबाजी केवल व्यक्तिगत मतभेद का मामला नहीं है,बल्कि यह लेबनान की भविष्य की दिशा को लेकर चल रहे व्यापक राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक है। एक तरफ लेबनानी नेतृत्व देश को क्षेत्रीय टकरावों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है,जबकि दूसरी तरफ ईरान अपने रणनीतिक प्रभाव को बनाए रखने के पक्ष में दिखाई देता है।

फिलहाल,लेबनान में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। लगातार बढ़ते हमले,बढ़ती मौतें और राजनीतिक मतभेद देश के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहे हैं। ऐसे समय में राष्ट्रपति जोसेफ औन और ईरान के बीच बढ़ी यह जुबानी जंग इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में केवल सैन्य संघर्ष ही नहीं,बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक टकराव भी आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।