नई दिल्ली,22 अप्रैल (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भारत की अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न कर ली और इसके तुरंत बाद वह अगले पड़ाव के रूप में वियतनाम के लिए रवाना हो गए। उनकी यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है,जिसमें कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ठोस प्रगति दर्ज की गई है। इस दौरे ने न केवल मौजूदा साझेदारी को मजबूत किया,बल्कि भविष्य के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी एजेंडा भी निर्धारित किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस यात्रा को बेहद सफल बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच सहयोग के कई आयामों में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि इस दौरे ने भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को एक नए और मजबूत आधार पर स्थापित किया है,जो आने वाले समय में और अधिक गहराई प्राप्त करेगा। राष्ट्रपति ली को भारत से विदाई देते समय सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा मौजूद रहे,जो इस उच्चस्तरीय यात्रा के महत्व को दर्शाता है।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई,जिनमें व्यापार,प्रौद्योगिकी,बुनियादी ढाँचा,डिजिटल सहयोग और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्र शामिल रहे। राष्ट्रपति ली ने अपने दौरे के दौरान यह स्पष्ट किया कि भारत और दक्षिण कोरिया अब केवल पारंपरिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि एक व्यापक और बहुआयामी साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच अपार संभावनाएँ हैं,जिन्हें सही रणनीति और सहयोग के माध्यम से साकार किया जा सकता है।
भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ली ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनके सम्मान में आयोजित भोज में भी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करते हुए जिस तरह समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम किया है,वह अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज भारत में जो आत्मविश्वास दिखाई देता है,वह ऐसे ही नेतृत्व और दूरदृष्टि का परिणाम है।
राष्ट्रपति ली ने अपने वक्तव्यों में भारत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें यहाँ जो सम्मान और गर्मजोशी मिली,वह उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं,बल्कि यह एक गहरे विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में दोनों देश मिलकर एक-दूसरे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
भारत यात्रा के बाद राष्ट्रपति ली का अगला पड़ाव वियतनाम है,जहाँ वह क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। बुधवार को हनोई में उनकी मुलाकात वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम से प्रस्तावित है। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों नेता इससे पहले अगस्त में भी मिल चुके हैं,जब वियतनाम के राष्ट्रपति दक्षिण कोरिया की यात्रा पर गए थे। इस बार की बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा होने की संभावना है।
गुरुवार को राष्ट्रपति ली वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग और नेशनल असेंबली के चेयरमैन ट्रान थान मान से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मंच में हिस्सा लेंगे,जहाँ दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि एकत्र होंगे और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श करेंगे। इस मंच को दक्षिण कोरिया और वियतनाम के बीच व्यापारिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति ली की यह बहु-देशीय यात्रा एशिया क्षेत्र में दक्षिण कोरिया की सक्रिय कूटनीतिक रणनीति को भी दर्शाती है। भारत और वियतनाम जैसे प्रमुख देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है,बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए भी आवश्यक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की यात्राएँ वैश्विक स्तर पर संतुलन बनाने और साझेदारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारत यात्रा के संदर्भ में देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया है। इस दौरान जिन समझौतों और चर्चाओं को आगे बढ़ाया गया,वे आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने में सहायक होंगे। राष्ट्रपति ली के शब्दों में,भारत और दक्षिण कोरिया अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ वे केवल सहयोगी नहीं,बल्कि एक-दूसरे के विकास के साझेदार बनेंगे।
अंततः,राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा और उसके बाद वियतनाम के लिए उनका प्रस्थान यह दर्शाता है कि एशिया में सहयोग और साझेदारी के नए समीकरण बन रहे हैं। यह यात्रा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से सफल रही,बल्कि इसने भविष्य के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार किया है,जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
