नई दिल्ली,22 अप्रैल (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले की बरसी पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के समर्थन की मजबूत आवाज सुनाई दी है। इस अवसर पर यूरोपीय संघ के 27 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए इस जघन्य हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की। यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
भारत स्थित आयरिश दूतावास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए इस बयान में यूरोपीय संघ ने साफ तौर पर कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। संगठन ने इस हमले को “निंदनीय” बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्य मानवता के खिलाफ हैं और इसके जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाना बेहद जरूरी है। इस बयान के जरिए यूरोपीय देशों ने न केवल आतंकवाद की निंदा की,बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे इस कठिन समय में भारत और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं।
यूरोपीय संघ ने अपने संदेश में पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमला न सिर्फ भारत के लिए,बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बयान में कहा गया कि आतंकवाद किसी भी देश या समाज को अस्थिर करने का प्रयास करता है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर मिलकर लड़ना ही एकमात्र रास्ता है। इस तरह के बयानों से यह संकेत मिलता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के मुद्दे पर पहले से अधिक एकजुट होता जा रहा है।
केवल यूरोपीय संघ ही नहीं,बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों ने भी पहलगाम हमले की बरसी पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। इजरायल,अर्जेंटीना,ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के दूतावासों ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी देशों ने एक स्वर में इस घटना को घृणित बताते हुए कहा कि ऐसी हिंसा को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन देशों ने यह भी दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सहयोग और समन्वय बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में यह भयावह आतंकी हमला हुआ था। उस दिन पर्यटक अपने परिवारों के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए वहाँ पहुँचे थे,तभी आतंकवादियों ने अचानक उन पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी,जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय पोनीवाला शामिल था। आतंकियों ने लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया,जिससे पूरे देश में गहरा आक्रोश और शोक फैल गया था।
इस घटना के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रुख को और स्पष्ट करते हुए निर्णायक कार्रवाई की थी। 7 और 8 मई की रात भारतीय सुरक्षा बलों ने योजनाबद्ध तरीके से पाकिस्तान स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस सैन्य कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया,जिसने भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।
भारत सरकार ने उस समय भी और अब भी यह दोहराया है कि वह आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा। देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएँगे। पहलगाम हमले के बाद की गई कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों पर हमले का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।
पहलगाम हमले की बरसी पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की यह एकजुटता भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत को वैश्विक समर्थन प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समर्थन से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती मिलती है और दोषियों पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव भी बढ़ता है।
इस अवसर पर देशभर में भी विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ लोगों ने मोमबत्तियाँ जलाकर और दो मिनट का मौन रखकर उन निर्दोष लोगों को याद किया,जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई थी। यह केवल एक यादगार क्षण नहीं,बल्कि आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक संकल्प को दोहराने का अवसर भी था।
पहलगाम हमले की बरसी ने एक बार फिर दुनिया को यह याद दिलाया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक देश की नहीं,बल्कि पूरी मानवता की लड़ाई है। यूरोपीय संघ और अन्य देशों द्वारा व्यक्त की गई एकजुटता इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है,जो आने वाले समय में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को और मजबूत बना सकती है।
