अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@garrywalia_)

ईरान के साथ समझौते के संकेत दे रहे ट्रंप,परमाणु हथियारों पर फिर दोहराया सख्त रुख

वाशिंगटन,7 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ एक बार फिर चर्चा में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और जल्द ही किसी संभावित समझौते तक पहुँचा जा सकता है। हालाँकि,इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। ट्रंप के इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति,ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि पिछले 24 घंटों में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहता है और यह पूरी तरह संभव है कि दोनों देश जल्द किसी समझौते तक पहुँच जाएँ। ट्रंप ने यह भी कहा कि तेहरान अब पहले की तरह अड़ियल रवैया नहीं अपना रहा और बातचीत में आगे बढ़ने की इच्छा दिखा रहा है।

हालाँकि,बातचीत में प्रगति के दावे के साथ ट्रंप ने ईरान पर बेहद सख्त टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और यह अमेरिका की स्पष्ट नीति है। ट्रंप ने कहा कि संघर्ष के दौरान ईरान के सैन्य बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी है और उसके युद्धपोत समुद्र में नष्ट हो गए हैं। ट्रंप के अनुसार ईरान की वायुसेना और मिसाइल क्षमताओं को भी गंभीर नुकसान पहुँचा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की विमानरोधी प्रणालियाँ,रडार नेटवर्क और मिसाइल भंडार लगभग समाप्त हो चुके हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया कि ईरान के अधिकांश शीर्ष सैन्य नेता अब जीवित नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका खुद को इस संघर्ष में विजेता मानता है। उनके अनुसार यदि इस समय संघर्ष समाप्त भी हो जाए,तो ईरान को अपनी सैन्य क्षमता दोबारा खड़ी करने में कई दशक लग जाएँगे।

ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका अभी ईरान से पीछे हट जाए,तब भी तेहरान को पुनर्निर्माण में कम से कम 20 साल लग सकते हैं। हालाँकि,जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ने समझौते के लिए कोई समय सीमा तय की है,तो उन्होंने कहा कि कोई तय समय सीमा नहीं है,लेकिन उन्हें विश्वास है कि अंततः समझौता हो जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पूरे संघर्ष के आर्थिक प्रभावों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजार अपेक्षा से अधिक मजबूत बने हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्हें शुरुआत में आशंका थी कि तेल की कीमतें 200 से 250 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं,लेकिन अभी कीमतें लगभग 100 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि जब संघर्ष शुरू हुआ था,तब कई विशेषज्ञों को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट की उम्मीद थी,लेकिन इसके विपरीत बाजार और ऊपर चला गया।

ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि व्हाइट हाउस में एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन के अधिकारियों के साथ चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने और तेल बाजार में संभावित संकट से बचने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दे रहा है।

हालाँकि,अमेरिका की ओर से समझौते की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत दिए जा रहे हैं,लेकिन ईरान ने फिलहाल इन दावों से दूरी बना ली है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है,जिनमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए एक छोटे समझौते के करीब पहुँच चुके हैं।

फार्स न्यूज एजेंसी ने इन खबरों को “मनगढ़ंत” बताया और कहा कि इस तरह की रिपोर्टें वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। एजेंसी ने दावा किया कि ऐसी खबरें वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित करने और कीमतों को नीचे लाने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। रिपोर्ट में दो अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ईरान ने अभी तक अमेरिका के ताजा प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है,जो पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया था।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने भी कहा कि तेहरान अभी अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद ही कोई अंतिम जवाब देगा। इस बयान से साफ है कि ईरान फिलहाल सावधानी के साथ आगे बढ़ना चाहता है और किसी जल्दबाजी में निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत की दिशा अब काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है। यदि अमेरिका और ईरान किसी समझौते तक पहुँचते हैं,तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक राजनीति,ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा। खासकर होर्मुज स्ट्रेट और तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में कमी आ सकती है।

हाल के महीनों में अमेरिका,ईरान और इजरायल के बीच बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था। सैन्य हमलों,समुद्री नाकेबंदी और कूटनीतिक टकराव के कारण वैश्विक समुदाय लगातार चिंता जता रहा है। कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के बयान एक ओर दबाव की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं,तो दूसरी ओर वे यह संकेत भी देते हैं कि अमेरिका अब संघर्ष को सीमित रखना चाहता है। ट्रंप लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका सैन्य रूप से मजबूत स्थिति में है,लेकिन वह कूटनीतिक समाधान के लिए भी तैयार है।

दूसरी तरफ ईरान की रणनीति फिलहाल सतर्क दिखाई दे रही है। तेहरान सार्वजनिक रूप से यह दिखाना चाहता है कि वह किसी दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा। यही वजह है कि वहाँ की सरकारी और अर्ध-सरकारी एजेंसियाँ अमेरिकी दावों को खुलकर चुनौती दे रही हैं।

फिलहाल दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि दोनों देश वास्तव में किसी समझौते की दिशा में बढ़ रहे हैं या फिर यह केवल दबाव और कूटनीति का हिस्सा है,लेकिन इतना तय है कि मौजूदा घटनाक्रम पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित कर रहा है।