बारामती,13 मई (युआईटीवी)- महाराष्ट्र के बारामती तालुका में बुधवार को एक बार फिर प्रशिक्षण विमान हादसे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। गोजुबावी गाँव के पास रेडबर्ड कंपनी का एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान में मौजूद प्रशिक्षु पायलट सुरक्षित बताया जा रहा है और किसी बड़े जानमाल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे प्रशिक्षण विमान हादसों ने बारामती में संचालित फ्लाइट ट्रेनिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। उड़ान के दौरान अचानक विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह खेतों की ओर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विमान काफी नीचे उड़ रहा था और कुछ ही क्षणों में तेज आवाज के साथ जमीन पर आ गिरा। विमान के गिरते ही आसपास के गाँवों में दहशत फैल गई। लोगों ने पहले तेज धमाके जैसी आवाज सुनी और फिर खेतों की ओर धुआँ उठता दिखाई दिया।
स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर दौड़ लगाई और बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस,प्रशासनिक अधिकारी और राहत दल मौके पर पहुँच गए। घटनास्थल पर सुरक्षा घेरा बना दिया गया और विमान के मलबे की जाँच शुरू कर दी गई।
दुर्घटना में विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। खेतों में गिरने के कारण उसका अगला हिस्सा बुरी तरह टूट गया था। हालाँकि,विमान में मौजूद प्रशिक्षु पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक पायलट को मामूली चोटें आई हैं और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। प्रशासन ने राहत की सांस ली कि हादसा किसी आबादी वाले इलाके में नहीं हुआ,वरना नुकसान कहीं अधिक गंभीर हो सकता था।
फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती आशंका तकनीकी खराबी या उड़ान के दौरान नियंत्रण खोने की जताई जा रही है। विमानन विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों को जाँच के लिए बुलाया गया है। पुलिस ने विमान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी गड़बड़ी,मानवीय भूल या किसी अन्य कारण से हुआ।
इस घटना के बाद बारामती में चल रहे फ्लाइट ट्रेनिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है। बारामती पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख पायलट प्रशिक्षण केंद्रों में उभरकर सामने आया है। यहाँ रेडबर्ड और कार्वर एविएशन जैसी कंपनियाँ बड़ी संख्या में प्रशिक्षु पायलटों को उड़ान प्रशिक्षण देती हैं। हर दिन कई प्रशिक्षण विमान इलाके के ऊपर उड़ान भरते हैं।
हालाँकि,लगातार हो रहे हादसों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशिक्षण विमान अक्सर गाँवों और खेतों के ऊपर कम ऊँचाई पर उड़ते दिखाई देते हैं,जिससे डर का माहौल बना रहता है। लोगों का कहना है कि यदि कोई विमान आबादी वाले इलाके में गिर जाए तो बड़ी जनहानि हो सकती है।
गोजुबावी क्षेत्र पहले भी विमान दुर्घटनाओं के कारण चर्चा में रह चुका है। इससे पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान भी इसी इलाके के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस घटना ने भी सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा रेडबर्ड कंपनी का एक अन्य ट्रेनिंग विमान भी पहले इसी क्षेत्र में हादसे का शिकार हो चुका है। लगातार दोहराई जा रही ऐसी घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और विमानन नियामक संस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण विमानों के संचालन में सुरक्षा मानकों का बेहद कड़ाई से पालन जरूरी होता है। छोटे प्रशिक्षण विमान लगातार उड़ानों के कारण अधिक दबाव में रहते हैं और उनकी नियमित तकनीकी जाँच बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि रखरखाव में थोड़ी भी लापरवाही हो तो हादसे की आशंका बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने अब प्रशिक्षण विमानों की सुरक्षा जाँच और निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की माँग शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि प्रशिक्षण उड़ानों के लिए तय मार्गों और ऊँचाई के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। साथ ही विमानन कंपनियों की तकनीकी जाँच भी नियमित अंतराल पर की जानी चाहिए।
प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि घटना की पूरी जाँच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है,तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विमान दुर्घटना की जाँच से जुड़े अधिकारी विमान के ब्लैक बॉक्स,तकनीकी रिकॉर्ड और पायलट के बयान के आधार पर पूरी घटना का विश्लेषण करेंगे।
विमान हादसों के बढ़ते मामलों ने पूरे देश में फ्लाइट ट्रेनिंग संस्थानों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। हाल के वर्षों में भारत में पायलट प्रशिक्षण की माँग तेजी से बढ़ी है,क्योंकि एविएशन सेक्टर का विस्तार हो रहा है। इसके चलते कई निजी कंपनियाँ प्रशिक्षण सेवाएँ दे रही हैं,लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते इस क्षेत्र में सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
बारामती में हुआ यह ताजा हादसा भले ही बड़े नुकसान के बिना टल गया हो,लेकिन इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशिक्षण विमानों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए,तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
फिलहाल प्रशासन ने दुर्घटनास्थल से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है और जाँच एजेंसियाँ हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। पूरे इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा बनी हुई है और लोग अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि बार-बार हो रहे ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएँगे।
