भारतीय रिजर्व बैंक

सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द,आरबीआई की सख्ती से सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ी हलचल

मुंबई,13 मई (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक ने मुंबई स्थित सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने यह बड़ा फैसला बैंक की खराब वित्तीय स्थिति,पूँजी की कमी और भविष्य में कमाई की कमजोर संभावनाओं को देखते हुए लिया है। आरबीआई की ओर से जारी आदेश 12 मई को कारोबार बंद होने के बाद से प्रभावी हो गया। इस फैसले के बाद बैंक को तत्काल प्रभाव से सभी बैंकिंग गतिविधियाँ बंद करने का निर्देश दिया गया है। आरबीआई के इस कदम ने एक बार फिर देश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता और नियामकीय निगरानी को लेकर बहस तेज कर दी है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा कि सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के विभिन्न प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा था। केंद्रीय बैंक के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हित में नहीं था। आरबीआई ने साफ कहा कि बैंक की वित्तीय हालत इतनी कमजोर हो चुकी थी कि वह अपने ग्राहकों की जमा राशि सुरक्षित रखने और नियमित बैंकिंग सेवाएँ देने की स्थिति में नहीं बचा था।

लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक को जमा स्वीकार करने,ऋण देने और ग्राहकों को भुगतान करने जैसी सभी बैंकिंग सेवाएँ बंद करनी होंगी। इस फैसले से हजारों खाताधारकों के बीच चिंता का माहौल पैदा हो गया है। हालाँकि,आरबीआई ने जमाकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी बड़ी संख्या की जमा राशि सुरक्षित है और उन्हें डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन यानी डीआईसीजीसी के तहत भुगतान किया जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने और एक लिक्विडेटर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। यह लिक्विडेटर बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का मूल्यांकन करेगा तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत उनका निपटान करेगा। आरबीआई के मुताबिक बैंक अपने मौजूदा वित्तीय संसाधनों के आधार पर सभी जमाकर्ताओं का पूरा पैसा लौटाने में सक्षम नहीं है।

हालाँकि,राहत की बात यह है कि डीआईसीजीसी योजना के तहत प्रत्येक खाताधारक को पाँच लाख रुपये तक की जमा राशि का बीमा संरक्षण प्राप्त होता है। आरबीआई ने जानकारी दी कि सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता ऐसे हैं,जिन्हें डीआईसीजीसी के माध्यम से उनकी पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी। केंद्रीय बैंक के अनुसार 31 मार्च 2026 तक डीआईसीजीसी बैंक के ग्राहकों को बीमित जमा राशि के रूप में करीब 26.72 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर चुका है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई का यह कदम जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया एक सख्त लेकिन जरूरी फैसला है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार खराब होती जाती है और उसके सुधार की संभावना कम हो जाती है,तो ऐसे में नियामक संस्थाओं के लिए समय रहते कार्रवाई करना जरूरी हो जाता है,ताकि जमाकर्ताओं का नुकसान कम-से-कम हो।

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय रूप से कमजोर शहरी सहकारी बैंकों के खिलाफ अपनी निगरानी और सख्ती बढ़ाई है। कई छोटे और मध्यम सहकारी बैंक वित्तीय अनियमितताओं,खराब प्रबंधन,बढ़ते एनपीए और पूँजी की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। आरबीआई लगातार ऐसे बैंकों की स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जहाँ जरूरत पड़ रही है,वहाँ कड़े कदम भी उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र लंबे समय से कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन बैंकों में अक्सर सीमित पूँजी,कमजोर जोखिम प्रबंधन प्रणाली और प्रशासनिक कमियाँ देखने को मिलती हैं। इसके अलावा कई मामलों में पारदर्शिता की कमी और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में आरबीआई की ओर से बढ़ती सख्ती को बैंकिंग क्षेत्र में अनुशासन स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय में हुई है,जब हाल ही में आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के खिलाफ भी बड़ा कदम उठाया था। अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था। आरबीआई ने उस समय कहा था कि बैंक ने अपने लाइसेंस से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों का पालन नहीं किया था। इसके बाद बैंक को सभी बैंकिंग सेवाएँ बंद करने का निर्देश दिया गया था।

हालाँकि,पेटीएम पेमेंट्स बैंक के मामले में आरबीआई ने यह भरोसा भी दिलाया था कि बैंक के पास पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है और वह अपने ग्राहकों की जमा राशि लौटाने में सक्षम है। इसके विपरीत सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक की स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है,क्योंकि आरबीआई के अनुसार बैंक के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं बचे थे।

बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय रिजर्व बैंक अब नियामकीय मामलों में किसी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है। केंद्रीय बैंक का मुख्य फोकस जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और बैंकिंग प्रणाली में लोगों का भरोसा बनाए रखने पर है। इसी कारण आरबीआई लगातार बैंकों की वित्तीय स्थिति,पूँजी पर्याप्तता और संचालन प्रक्रियाओं की सख्ती से निगरानी कर रहा है।

इस फैसले के बाद सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में चिंता जरूर बढ़ी है,लेकिन कई विशेषज्ञ इसे सकारात्मक संकेत भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि कमजोर और नियमों का पालन न करने वाले बैंकों पर कार्रवाई से पूरे बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही इससे जमाकर्ताओं का भरोसा मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहकों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल अपनी जमा राशि की वापसी को लेकर है। हालाँकि,डीआईसीजीसी के तहत अधिकांश खाताधारकों को राहत मिलने की संभावना है,लेकिन जिनकी जमा राशि पाँच लाख रुपये से अधिक है,उन्हें लिक्विडेशन प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आरबीआई सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए और क्या कदम उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सख्ती ही नहीं,बल्कि प्रशासनिक सुधार,बेहतर तकनीकी निगरानी और मजबूत जोखिम प्रबंधन व्यवस्था भी जरूरी है,ताकि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सके और बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनाया जा सके।