नई दिल्ली,13 मई (युआईटीवी)- भारत और चिली के बीच रणनीतिक तथा आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में बुधवार को नई दिल्ली में अहम कूटनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चिली के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज मैकेना से मुलाकात की,जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश,आपूर्ति श्रृंखला,निर्यात और बहुपक्षीय सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है,जब भारत वैश्विक स्तर पर अपने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि चिली के विदेश मंत्री के साथ उनकी सुबह की मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने बाजारों और आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने,प्राथमिकता वाले उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और सेवा क्षेत्र से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को सुगम बनाने पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत और चिली ने बहुपक्षीय तथा बहु-देशीय मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
चिली के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज मैकेना 9 मई से भारत की सात दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। भारत पहुँचने के बाद उन्होंने भी इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि यह यात्रा चिली और भारत के बीच साझेदारी को और गहरा करने,व्यापार एवं निवेश के नए अवसर तलाशने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का शानदार मौका होगी।
भारत और चिली के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का एक अहम पहलू आर्थिक साझेदारी भी है। मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने चिली के विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ नाश्ते पर बैठक की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए पर चल रही वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
Delighted to meet FM Francisco Pérez Mackenna @MinPerezMac of Chile this morning.
Had a very good discussion on strengthening our bilateral cooperation to diversify markets and sourcing, promote export of priority items and facilitating the services economy.
Agreed to work… pic.twitter.com/8hiHpkHtEY
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) May 13, 2026
बैठक के बाद पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और चिली के बीच व्यापार,निवेश और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत चिली के साथ अपने पुराने और मैत्रीपूर्ण संबंधों को बेहद महत्व देता है और साझा विकास तथा समृद्धि के लिए आर्थिक जुड़ाव और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और चिली के बीच सीईपीए समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे व्यापारिक बाधाओं को कम करने,निवेश के नए अवसर पैदा करने और कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने में मदद मिलेगी। खासतौर पर कृषि,खनन,फार्मास्यूटिकल्स,डिजिटल सेवाओं और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं।
चिली लैटिन अमेरिका का एक महत्वपूर्ण देश माना जाता है और प्राकृतिक संसाधनों,विशेष रूप से तांबा और लिथियम के उत्पादन में उसकी बड़ी भूमिका है। वहीं भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग वैश्विक आर्थिक संतुलन और आपूर्ति स्रोतों के विविधीकरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत पिछले कुछ वर्षों में अपनी विदेश नीति के तहत लैटिन अमेरिकी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार चिली के साथ बढ़ते संबंध इस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। भारत ऐसे देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है,जहाँ प्राकृतिक संसाधन,उभरते बाजार और निवेश की संभावनाएँ मौजूद हैं।
दूसरी ओर चिली भी एशियाई देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को विस्तार देने की दिशा में सक्रिय है। भारत जैसे बड़े बाजार के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करना चिली के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही कारण है कि चिली के विदेश मंत्री की इस यात्रा को दोनों देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
इस दौरान फ्रांसिस्को पेरेज मैकेना ने भारतीय और चिली के कारोबारी नेताओं के साथ एक गोलमेज चर्चा में भी हिस्सा लिया। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कारोबारी प्रतिनिधियों ने नई साझेदारियों,निवेश अवसरों और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत कई देशों के साथ नए व्यापार समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों को आगे बढ़ा रहा है। कोरोना महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के बाद दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की आवश्यकता पर जोर बढ़ा है। ऐसे में भारत और चिली के बीच सहयोग दोनों देशों के लिए आर्थिक स्थिरता और व्यापार विस्तार के नए अवसर खोल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और चिली के बीच बढ़ते संबंध इंडो-पैसिफिक और लैटिन अमेरिकी क्षेत्रों के बीच आर्थिक संपर्क को भी मजबूत करेंगे। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और चिली की रणनीतिक स्थिति दोनों देशों को एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनाती है।
कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत और चिली कई वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं। जलवायु परिवर्तन,सतत विकास,ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर दोनों देशों के विचारों में समानता देखी जाती है।
भारत और चिली के बीच यह बढ़ती नजदीकी आने वाले समय में व्यापार,निवेश और रणनीतिक साझेदारी के नए अध्याय खोल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीईपीए वार्ता सफल रहती है और दोनों देश आर्थिक सहयोग को गति देते हैं,तो यह संबंध सिर्फ द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक समीकरणों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
