प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@RitamVarta)

प्रधानमंत्री मोदी की पाँच देशों की अहम यात्रा 15 से 20 मई तक,यूरोप और खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

नई दिल्ली,14 मई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से पाँच दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा को भारत की वैश्विक कूटनीति,रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा में संयुक्त अरब अमीरात के अलावा चार यूरोपीय देशों—नीदरलैंड्स,स्वीडन,नॉर्वे और इटली—का दौरा शामिल है। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह यात्रा व्यापार,निवेश,रक्षा,प्रौद्योगिकी,हरित ऊर्जा,नवाचार और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को और मजबूत करेगी।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री की यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक संबंध तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है,जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की विदेश नीति में यूरोप और पश्चिम एशिया की बढ़ती अहमियत को स्पष्ट रूप से दर्शाएगी।

प्रधानमंत्री अपनी यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात से करेंगे। 15 मई को वह अबू धाबी पहुँचेंगे,जहाँ उनकी मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से होगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों,ऊर्जा सुरक्षा,निवेश,व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और यूएई के संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहद मजबूत हुए हैं और दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी विकसित हुई है।

यूएई भारत का एक प्रमुख व्यापारिक और ऊर्जा साझेदार है। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय समुदाय की बड़ी संख्या भी दोनों देशों के रिश्तों को विशेष बनाती है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यूएई में लगभग 45 लाख भारतीय रहते हैं,जो वहाँ की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं।

यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड्स की यात्रा पर जाएँगे। 15 से 17 मई तक चलने वाली यह यात्रा कई मायनों में अहम मानी जा रही है। वर्ष 2017 के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी नीदरलैंड्स यात्रा होगी। इस दौरान प्रधानमंत्री नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वह वहाँ के सम्राट विलेम-अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा से भी मुलाकात करेंगे।

नीदरलैंड्स के साथ भारत के संबंध व्यापार,कृषि,जल प्रबंधन,हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में लगातार मजबूत हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ नई तकनीकों और हरित विकास पर सहयोग को और आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। प्रधानमंत्री के वहाँ भारतीय समुदाय को संबोधित करने और शीर्ष कारोबारी नेताओं के साथ बैठक करने की भी संभावना है।

नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार, हरित प्रौद्योगिकी,नवाचार और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंध आने वाले वर्षों में तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।

नीदरलैंड्स के बाद प्रधानमंत्री स्वीडन जाएँगे। 17 मई को प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन के गोथनबर्ग पहुँचेंगे। यह उनकी दूसरी स्वीडन यात्रा होगी। इससे पहले वह वर्ष 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान स्वीडन गए थे। पिछले कुछ वर्षों में भारत और स्वीडन के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

वर्ष 2018 में घोषित भारत-स्वीडन नवाचार साझेदारी के तहत दोनों देशों के बीच तकनीक, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा और औद्योगिक सहयोग में तेजी आई है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान व्यापार और निवेश,हरित परिवर्तन,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,उभरती प्रौद्योगिकियाँ,आपूर्ति श्रृंखला,रक्षा सहयोग,अंतरिक्ष और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री इस दौरान यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री कार्यक्रम में भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस मंच पर यूरोप और ब्रिटेन के प्रमुख उद्योगपति तथा कारोबारी नेता मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक निवेशकों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेंगे और भारत की आर्थिक क्षमता तथा तकनीकी विकास को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम में यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी संबोधित करेंगी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और स्वीडन के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। भारत में 280 से अधिक स्वीडिश कंपनियाँ काम कर रही हैं,जबकि स्वीडन में 75 से अधिक भारतीय कंपनियों की मौजूदगी है।

भारत और स्वीडन के बीच तकनीकी सहयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। इस वर्ष फरवरी में आयोजित एआई एक्शन समिट के दौरान दोनों देशों ने “स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड एआई कॉरिडोर” स्थापित करने के लिए संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता,नवाचार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है।

रक्षा क्षेत्र में भी भारत और स्वीडन के संबंधों को नई मजबूती मिली है। स्वीडिश कंपनी साब ने भारत में अपने मानवरहित हवाई वाहन निर्माण संयंत्र की स्थापना की है। यह स्वीडन के बाहर साब की पहली विनिर्माण इकाई है और भारत के रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तहत स्थापित पहली सुविधा मानी जा रही है।

स्वीडन के बाद प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे की यात्रा पर जाएँगे। 18 मई को वह नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के निमंत्रण पर ओस्लो पहुँचेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी और पिछले 43 वर्षों में भारत के किसी प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा भी होगी।

नॉर्वे यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी वहाँ के राजा हैरल्ड पंचम और रानी सोन्या से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री स्टोरे संयुक्त रूप से भारत-नॉर्वे व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन का मुख्य फोकस व्यापार,तकनीक और निवेश को बढ़ावा देना होगा।

19 मई को ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में नॉर्वे,डेनमार्क,फिनलैंड,आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्री भी हिस्सा लेंगे। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच प्रौद्योगिकी,नवीकरणीय ऊर्जा,डिजिटलीकरण और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार लगभग 90 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है।

भारत में 700 से अधिक नॉर्डिक कंपनियां सक्रिय हैं,जबकि लगभग 150 भारतीय कंपनियों की मौजूदगी नॉर्डिक देशों में है। प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान डेनमार्क,फिनलैंड और आइसलैंड के प्रधानमंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।

अपनी यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी इटली पहुँचेंगे। हाल ही में इटली के रक्षा मंत्री की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर नई संभावनाएँ खुली हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और इटली रक्षा उत्पादन,सह-विकास और रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन पर चर्चा कर रहे हैं।

भारत और इटली समुद्री सुरक्षा,आतंकवाद विरोधी सहयोग और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी करीबी सहयोग कर रहे हैं। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ संयुक्त पहल की घोषणा भी की थी। इटली में लगभग ढाई लाख भारतीय रहते हैं,जबकि छह हजार से अधिक भारतीय छात्र वहां के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। विदेश मंत्रालय का मानना है कि यह यात्रा भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेगी तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करेगी।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की यह पाँच देशों की यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और बहुआयामी कूटनीति का बड़ा संकेत मानी जा रही है। व्यापार,निवेश,तकनीक,रक्षा, हरित ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ यह यात्रा भारत और यूरोप तथा खाड़ी देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने का काम कर सकती है। दुनिया की तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत अपने वैश्विक साझेदारों के साथ संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है।