लंदन,14 मई (युआईटीवी)- ब्रिटेन की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। स्थानीय चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सत्ता सँभालने के बाद पहली बार लेबर पार्टी के भीतर इस तरह खुलकर असंतोष सामने आया है और अब पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएँ भी तेज हो गई हैं। इस बढ़ते दबाव के बीच कीर स्टार्मर ने पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके खिलाफ नेतृत्व की चुनौती लेबर पार्टी को “अराजकता” की स्थिति में धकेल देगी।
स्थानीय चुनावों के नतीजों ने लेबर पार्टी के अंदर गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। कई क्षेत्रों में पार्टी को उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा,जिसके बाद प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे। पार्टी के भीतर कुछ सांसद और वरिष्ठ नेता अब नए नेतृत्व की माँग कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट स्टार्मर सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
इसी बीच ब्रिटिश मीडिया में ऐसी खबरें सामने आईं कि स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग नेतृत्व चुनौती पेश करने पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह इस्तीफा देकर प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी कर सकते हैं। हालाँकि,अभी तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है,लेकिन इन अटकलों ने लेबर पार्टी की अंदरूनी राजनीति को और गर्म कर दिया है।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक,अगर किसी नेता को स्टार्मर के खिलाफ औपचारिक नेतृत्व चुनौती पेश करनी है,तो उसे लेबर पार्टी के कम से कम 81 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किसी संभावित दावेदार के पास इतना समर्थन मौजूद है या नहीं,लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ती अस्थिरता ने ब्रिटिश राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
बुधवार सुबह संसद के औपचारिक उद्घाटन से पहले वेस स्ट्रीटिंग को 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुँचते देखा गया। हालाँकि,वह वहाँ लगभग 20 मिनट बाद ही बाहर निकल गए। इस छोटी मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें और तेज हो गईं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों के बीच मौजूदा संकट को लेकर अहम बातचीत हुई है।
स्थानीय चुनावों के बाद से लेबर पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को कई मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया,जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ गईं। हालाँकि,कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से कीर स्टार्मर के समर्थन में बयान भी दिए और कहा कि पार्टी को एकजुट रहने की जरूरत है,लेकिन इसके बावजूद पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
लेबर पार्टी से जुड़े 11 यूनियनों ने भी संयुक्त बयान जारी कर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। यूनियनों ने कहा कि यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अगले आम चुनाव में कीर स्टार्मर पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे। बयान में कहा गया कि पार्टी को किसी नए नेता के चुनाव की तैयारी शुरू करनी चाहिए। यूनियनों का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ब्रिटेन की राजनीति में ट्रेड यूनियनों का लेबर पार्टी पर हमेशा से गहरा प्रभाव रहा है।
उधर विपक्षी दल भी इस राजनीतिक संकट को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर हैं। जॉन स्विनी के नेतृत्व वाली स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने प्रधानमंत्री स्टार्मर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दी है। पार्टी का कहना है कि सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहा यह “तमाशा” अब ज्यादा समय तक नहीं चल सकता और देश को स्थिर नेतृत्व की जरूरत है।
इन घटनाक्रमों के बीच ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय ने नए संसदीय सत्र की शुरुआत करते हुए पारंपरिक “किंग्स स्पीच” दी। इस भाषण में प्रधानमंत्री स्टार्मर सरकार के विधायी एजेंडे और आने वाले समय की नीतिगत प्राथमिकताओं को पेश किया गया। सरकार ने आर्थिक सुधार,स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई बड़े वादे किए। लेकिन राजनीतिक संकट इतना गहरा हो चुका है कि सरकार की नीतिगत योजनाओं की तुलना में नेतृत्व संकट ज्यादा चर्चा में बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय चुनावों में खराब प्रदर्शन ने लेबर पार्टी की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। पार्टी के भीतर कई नेता मानते हैं कि जनता के बीच सरकार की लोकप्रियता तेजी से घटी है और इसका असर भविष्य के आम चुनावों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कुछ सांसद अब नए चेहरे के जरिए पार्टी को फिर से मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
कीर स्टार्मर के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब पार्टी को एकजुट रखना होगी। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी को स्थिर और संगठित दिखाने की कोशिश की थी,लेकिन हालिया घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में नेतृत्व को लेकर विवाद और बढ़ता है,तो यह सरकार की कार्यक्षमता और ब्रिटेन की राजनीति दोनों पर बड़ा असर डाल सकता है।
ब्रिटेन की जनता भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। आर्थिक चुनौतियों,महँगाई और सामाजिक मुद्दों के बीच राजनीतिक अस्थिरता ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में सरकार के भीतर उठ रहे सवाल विपक्ष को भी मजबूत करने का काम कर सकते हैं।
फिलहाल कीर स्टार्मर ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने पार्टी नेताओं से अपील की है कि वे लेबर पार्टी को और कमजोर करने के बजाय एकजुट होकर काम करें,लेकिन जिस तरह से पार्टी के भीतर बगावत की आवाजें उठ रही हैं,उससे साफ है कि आने वाले दिनों में ब्रिटेन की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
