नई दिल्ली,14 मई (युआईटीवी)- भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के विदेश मंत्री तथा वरिष्ठ राजनयिक हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुँचे। बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं। यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित पहली बड़ी मंत्रीस्तरीय बैठक मानी जा रही है और इसे इस साल के अंत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
भारत मंडपम में आयोजित इस बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने विभिन्न देशों से पहुँचे नेताओं और प्रतिनिधियों का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। इस दौरान अब्बास अराघची,सर्गेई लावरोव और सुगियोनो सहित कई देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी नेताओं के पहुँचने के बाद विदेश मंत्री जयशंकर के साथ आधिकारिक समूह तस्वीर भी ली गई,जिसने इस बैठक के कूटनीतिक महत्व को और रेखांकित किया।
नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक ऐसे समय में हो रही है,जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात,आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक संघर्षों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी और सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि बैठक में अंतर्राष्ट्रीय शासन व्यवस्था में सुधार,वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था,ऊर्जा सुरक्षा,आपूर्ति श्रृंखला,जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय संघर्षों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है।
ब्रिक्स समूह को दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का सबसे प्रभावशाली मंच माना जाता है। इसमें ब्राजील,रूस,भारत,चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस समूह का विस्तार भी हुआ है और कई नए साझेदार देशों की भागीदारी ने इसकी वैश्विक भूमिका को और मजबूत किया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक इस लिहाज से भी अहम है क्योंकि भारत ब्रिक्स मंच के जरिए वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
बैठक के दौरान सदस्य देशों के विदेश मंत्री आपसी हितों से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। माना जा रहा है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष,पश्चिम एशिया की स्थिति,इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता जैसे मुद्दों पर भी नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने की माँग भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी पुष्टि की कि बैठक में हिस्सा लेने वाले विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने तथा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर जोर दे सकते हैं।
नई दिल्ली में चल रही यह दो दिवसीय बैठक 14 और 15 मई तक जारी रहेगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह बैठक आगामी ब्रिक्स लीडर्स समिट के एजेंडे को तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी। भारत की कोशिश है कि इस मंच के जरिए विकासशील देशों के साझा हितों को वैश्विक स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक देश की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को भी दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। जी20 की सफल मेजबानी के बाद अब ब्रिक्स की अध्यक्षता को भी भारत के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रिक्स मंच को पश्चिमी देशों के प्रभाव वाले वैश्विक संस्थानों के विकल्प के रूप में भी देखा जाता है। यही वजह है कि इस समूह की बैठकों पर दुनिया की नजर रहती है। भारत की कोशिश है कि ब्रिक्स को केवल आर्थिक मंच तक सीमित न रखकर इसे राजनीतिक, रणनीतिक और विकासात्मक सहयोग के व्यापक मंच के रूप में आगे बढ़ाया जाए।
नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक भारत के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक से निकलने वाले निष्कर्ष और साझा बयान आने वाले महीनों में वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ब्रिक्स देशों के बीच इस बैठक में किन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनती है और भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान इस मंच को किस नई दिशा में आगे बढ़ाता है।
