आईएमएफ की नई शर्तों से पाकिस्तान पर बढ़ा आर्थिक दबाव (तस्वीर क्रेडिट@sknawaz478)

आईएमएफ की नई शर्तों से पाकिस्तान पर बढ़ा आर्थिक दबाव,जनता पर महँगाई और टैक्स का दोहरा संकट,आईएमएफ ने 1.73 लाख करोड़ रुपए लेवी टारगेट तय किया

नई दिल्ली,16 मई (युआईटीवी)-आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के सामने अब एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए पाकिस्तान पर टैक्स और राजस्व संग्रह को लेकर नई और सख्त शर्तें लागू कर दी हैं। इन शर्तों के तहत पेट्रोलियम लेवी का लक्ष्य बढ़ाकर 1 लाख 73 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है। यह मौजूदा बजट लक्ष्य से करीब 25 हजार 900 करोड़ रुपए अधिक है। ऐसे समय में जब पाकिस्तान की आम जनता पहले ही महँगाई,बेरोजगारी और बढ़ती कीमतों से परेशान है,तब आईएमएफ की इन नई शर्तों ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक,आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार से साफ कहा है कि उसे राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। इसके लिए केंद्र और प्रांतीय सरकारों को मिलकर करीब 86 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त जुटाने होंगे। इसमें से आधी राशि केंद्र सरकार नए टैक्स उपायों और उनके सख्त क्रियान्वयन के जरिए हासिल करेगी,जबकि बाकी रकम प्रांतीय सरकारें सेवाओं पर सेल्स टैक्स बढ़ाकर और कृषि आयकर लागू करके जुटाएंगी।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से लगातार दबाव में है। विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट,रुपये की कमजोरी,आयात पर निर्भरता और ऊँची महँगाई ने देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर बना दिया है। ऐसे में आईएमएफ से मिलने वाला वित्तीय सहायता पैकेज पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,लेकिन इस सहायता के बदले आईएमएफ लगातार सख्त आर्थिक सुधारों की माँग कर रहा है। इन सुधारों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

पेट्रोलियम लेवी बढ़ाए जाने का मतलब है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। पाकिस्तान में पहले ही ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। ईंधन महँगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है,जिसका असर खाद्य पदार्थों,बिजली और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई लेवी लागू होने के बाद महँगाई में और तेजी आ सकती है।

आईएमएफ की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान को अपने कर संग्रह तंत्र में भी व्यापक सुधार करने होंगे। इसी वजह से फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के लिए अगले वित्तीय वर्ष का 15 लाख 27 हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया है। यह लक्ष्य पिछले वर्षों की तुलना में काफी बड़ा माना जा रहा है। पाकिस्तान लगातार दो साल तक अपने राजस्व लक्ष्य पूरे करने में विफल रहा है,जिसके कारण आईएमएफ ने इस बार निगरानी को और सख्त बना दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार,पाकिस्तान सरकार ने 21 हजार 500 करोड़ रुपए के अतिरिक्त टैक्स लगाने की शर्त को स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा इतनी ही राशि ऑडिट,उत्पादन निगरानी और अन्य प्रवर्तन उपायों के जरिए जुटाई जाएगी। इसका अर्थ यह है कि टैक्स चोरी रोकने और करदाताओं पर निगरानी बढ़ाने के लिए सरकार प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वहाँ टैक्स देने वालों की संख्या बेहद कम है। बड़ी आबादी टैक्स नेटवर्क से बाहर है,जबकि सरकार का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। रक्षा,कर्ज भुगतान और प्रशासनिक खर्चों के कारण सरकार पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए पाकिस्तान का रक्षा बजट 2 लाख 66 हजार 500 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है,जो मौजूदा बजट से लगभग 10 हजार 100 करोड़ रुपए अधिक है। ऐसे में सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए नए टैक्स लगाने पड़ रहे हैं।

केंद्रीय बजट का आकार भी बढ़ाकर 17 लाख 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। यह चालू वित्तीय वर्ष के संशोधित बजट से लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। हालाँकि,अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ते खर्च और कमजोर आर्थिक गतिविधियों के बीच इतने बड़े बजट को सँभालना पाकिस्तान सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

आईएमएफ ने इस बार एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले जहाँ राजस्व लक्ष्य केवल एक संकेतक माना जाता था,वहीं अब इसे क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया का दर्जा दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तय लक्ष्य हासिल नहीं कर पाता,तो पाकिस्तान को आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड से विशेष छूट लेनी होगी। पाकिस्तान सरकार ने यह शर्त भी स्वीकार कर ली है। इससे साफ संकेत मिलता है कि आईएमएफ अब पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों और राजस्व संग्रह प्रक्रिया पर पहले से ज्यादा सख्त निगरानी रखना चाहता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नई शर्तों का असर केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसका राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। पाकिस्तान में पहले ही महँगाई और बेरोजगारी को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में अगर ईंधन,बिजली और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है,तो सरकार के खिलाफ असंतोष और तेज हो सकता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे आईएमएफ की शर्तों को पूरा करना है,ताकि अंतर्राष्ट्रीय सहायता जारी रह सके,वहीं दूसरी ओर उसे जनता के बढ़ते असंतोष को भी सँभालना है। यदि सरकार अत्यधिक टैक्स और कीमतों में बढ़ोतरी करती है,तो इसका असर आम लोगों की जीवनशैली और क्रय शक्ति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

फिलहाल पाकिस्तान सरकार आईएमएफ के साथ सहमति बनाकर आर्थिक स्थिरता हासिल करने की कोशिश कर रही है,लेकिन यह रास्ता आम नागरिकों के लिए काफी कठिन साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि सरकार इन सख्त आर्थिक सुधारों को किस तरह लागू करती है और जनता पर इसका कितना व्यापक असर पड़ता है।