भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

इनविट्स के लिए सेबी की बड़ी राहत,अब 49 प्रतिशत से अधिक लीवरेज पर भी मिल सकेगा अतिरिक्त कर्ज

मुंबई,16 मई (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स यानी इनविट्स के लिए उधारी नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए महत्वपूर्ण राहत देने का फैसला किया है। बाजार नियामक ने शुक्रवार को जारी सर्कुलर में कहा कि अब ऐसे इनविट्स,जिनका लीवरेज उनकी एसेट वैल्यू के 49 प्रतिशत से अधिक है,उन्हें भी अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दी जाएगी। इस फैसले को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए अहम कदम माना जा रहा है,क्योंकि इससे परियोजनाओं को वित्तीय लचीलापन मिलेगा और बड़े स्तर पर फंडिंग जुटाने में आसानी होगी।

सेबी के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विकास और विस्तार को गति देना है। पिछले कुछ वर्षों में सड़क,ऊर्जा,लॉजिस्टिक्स और शहरी विकास जैसी परियोजनाओं में इनविट्स की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में उद्योग लंबे समय से माँग कर रहा था कि इनविट्स को उधारी सीमा में अधिक छूट दी जाए,ताकि वे बड़े पूँजीगत खर्च और रखरखाव जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकें।

नए नियमों के तहत अब इनविट्स अतिरिक्त उधारी लेकर उसे पूँजीगत खर्च में इस्तेमाल कर सकेंगे। इसका उपयोग परिसंपत्तियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने,परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने और नई तकनीकी सुविधाओं के विकास में किया जा सकेगा। सेबी का मानना है कि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और परिचालन क्षमता में सुधार होगा।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा सड़क क्षेत्र से जुड़े इनविट्स को मिलने की उम्मीद है। सड़क परियोजनाओं में समय-समय पर बड़े रखरखाव और मरम्मत कार्यों की जरूरत पड़ती है,जिनमें भारी निवेश की आवश्यकता होती है। पहले लीवरेज सीमा के कारण कई इनविट्स अतिरिक्त कर्ज लेने में सीमित हो जाते थे,लेकिन अब उन्हें इस दिशा में राहत मिल सकेगी।

सेबी ने अपने सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बड़े रखरखाव खर्चों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दी जा रही है। इसमें वे गैर-रूटीन रखरखाव कार्य शामिल होंगे,जो कंसेशन एग्रीमेंट के तहत अनिवार्य होते हैं। नियामक ने कहा कि बड़े रखरखाव खर्च का अर्थ ऐसे खर्च से है,जो सामान्य रखरखाव से अलग हो और परियोजना समझौते में तय दायित्वों के अनुसार किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को देखते हुए यह फैसला काफी अहम साबित हो सकता है। सरकार भी लगातार सार्वजनिक और निजी निवेश के जरिए सड़क,रेलवे,बंदरगाह और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में इनविट्स के लिए फंडिंग के नए विकल्प खुलना निवेश गतिविधियों को गति दे सकता है।

सेबी ने केवल अतिरिक्त उधारी की अनुमति ही नहीं दी,बल्कि इनविट्स,स्पेशल पर्पस व्हीकल्स और होल्डिंग कंपनियों के लिए मौजूदा कर्ज के पुनर्वित्तपोषण यानी रीफाइनेंसिंग की भी छूट प्रदान की है। हालाँकि,इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। नियामक ने साफ किया है कि रीफाइनेंसिंग केवल मूल कर्ज राशि तक सीमित होगी। इसमें जमा ब्याज, पेनल्टी,फीस या अन्य शुल्क शामिल नहीं किए जा सकेंगे।

सेबी ने कहा कि रीफाइनेंसिंग का उद्देश्य केवल मौजूदा कर्ज के मूल हिस्से को बेहतर शर्तों पर पुनर्गठित करना है। इससे कंपनियों पर ब्याज बोझ कम करने और नकदी प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि बढ़ती ब्याज दरों और वित्तीय दबाव के बीच यह राहत इनविट्स के लिए काफी उपयोगी साबित होगी।

यह संशोधित ढाँचा 17 अप्रैल 2026 को इनविट नियमों के रेगुलेशन 20(3)(बी)(ii) में किए गए बदलावों के बाद लागू किया गया है। इन संशोधनों के जरिए लीवरेज सीमा से ऊपर उधारी के उपयोग के दायरे को पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाया गया है।

सेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। यानी अब पात्र इनविट्स तुरंत इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को अपने विस्तार और रखरखाव योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलने की संभावना है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत कर सकता है। इनविट्स को भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जाता है। ये ट्रस्ट निवेशकों से पूँजी जुटाकर उसे इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं और निवेशकों को नियमित आय उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में वित्तीय लचीलापन बढ़ने से इनविट्स की आकर्षण क्षमता भी बढ़ सकती है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत में इनविट्स बाजार तेजी से विकसित हुआ है। कई बड़ी कंपनियों ने सड़क,बिजली ट्रांसमिशन,गैस पाइपलाइन और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं के लिए इनविट्स मॉडल को अपनाया है। सरकार भी निजी निवेश आकर्षित करने के लिए इस ढाँचे को बढ़ावा दे रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि सेबी के इस फैसले से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नई परियोजनाओं को गति मिल सकती है। खासकर सड़क और परिवहन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रखरखाव और विस्तार कार्यों के लिए अब अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

फिलहाल उद्योग जगत ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए सकारात्मक कदम बताया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस फैसले का असर निवेश गतिविधियों,परियोजना विस्तार और पूँजी प्रवाह पर साफ दिखाई देगा।