होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर ईरान से गंभीर परमाणु वार्ता को तैयार अमेरिका,मार्को रुबियो ने दिए बड़े संकेत

वाशिंगटन,25 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बड़ा बयान देकर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रुबियो ने संकेत दिया है कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोल देता है और क्षेत्र में समुद्री आवाजाही सामान्य हो जाती है,तो अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गंभीर और व्यापक बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन अब किसी जल्दबाजी में होने वाले समझौते के पक्ष में नहीं है,बल्कि चरणबद्ध और तकनीकी आधार पर आगे बढ़ना चाहता है।

नई दिल्ली यात्रा के दौरान एक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि 72 घंटे के भीतर किसी कागज पर हस्ताक्षर कराकर परमाणु समझौता नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यह बेहद जटिल और तकनीकी विषय है,जिसमें संवर्धित यूरेनियम, परमाणु निरीक्षण और सुरक्षा गारंटी जैसे कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले ईरान को होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खोलना होगा,ताकि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सके। इसके बाद ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ गंभीर वार्ता आगे बढ़ सकेगी।

रुबियो ने यह भी कहा कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका यूरेनियम संवर्धन के स्तर,अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार और ईरान की दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं पर विस्तार से चर्चा करना चाहता है। उनके अनुसार इन मुद्दों का समाधान कुछ दिनों में नहीं हो सकता,लेकिन इसे वर्षों तक भी नहीं खींचा जाना चाहिए।

अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान को इस लिहाज से भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है,जब ट्रंप प्रशासन की ओर से संकेत मिला है कि वाशिंगटन एक अंतरिम या चरणबद्ध समझौते के लिए तैयार हो सकता है। अब तक अमेरिका लगातार यह कहता रहा था कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगानी होगी,लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि अमेरिका पहले सीमित सहमति और भरोसे के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

रुबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि आने वाले दो महीनों में बातचीत से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता,तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर से सख्त कदम उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के पास आज जो विकल्प मौजूद हैं,वही 60 दिनों बाद भी रहेंगे। इस बयान को ईरान के लिए एक अप्रत्यक्ष चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि यदि कूटनीतिक प्रयास असफल होते हैं,तो अमेरिका सैन्य या आर्थिक दबाव बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगा।

हालाँकि,अब तक अमेरिका और ईरान की ओर से संभावित समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के आलोचकों का मानना है कि यदि चरणबद्ध समझौते की राह अपनाई जाती है,तो इससे भविष्य की बातचीत में अमेरिका की स्थिति कमजोर हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान पहले सीमित रियायतें देकर बाद में अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।

इसके बावजूद रुबियो ने बार-बार दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीति बिल्कुल स्पष्ट है और वह किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि जब तक डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति हैं,ईरान परमाणु हथियार नहीं रख पाएगा। रुबियो के अनुसार अमेरिका की प्राथमिकता पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखना और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करना है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी अमेरिका की चिंता लगातार बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक रास्तों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहाँ तनाव बढ़ता है या आवाजाही प्रभावित होती है,तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। इसी वजह से अमेरिका और खाड़ी क्षेत्र के उसके सहयोगी देश चाहते हैं कि यह मार्ग पूरी तरह खुला और सुरक्षित रहे।

रुबियो ने बताया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ऐसे प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं जिससे होर्मुज स्ट्रेट में किसी प्रकार का टोल न लगाया जाए और अंतर्राष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे। हालाँकि,उन्होंने यह भी माना कि इस योजना की सफलता पूरी तरह ईरान की सहमति और उसके व्यवहार पर निर्भर करेगी। यदि ईरान इस समझौते को पूरी तरह स्वीकार करता है और उसे लागू करता है,तभी क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता संभव हो सकेगी।

इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी इन बयानों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने कहा है कि वाशिंगटन अब धीरे-धीरे आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ऐसा अंतरिम समझौता स्वीकार कर सकता है,जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा तुरंत पूरी तरह हल न हो,लेकिन तनाव कम करने और भरोसा बहाल करने की दिशा में कदम उठाए जाएँ।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह अमेरिका और ईरान संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि दोनों देश बातचीत के जरिए किसी साझा रास्ते पर पहुँचते हैं,तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है। वहीं यदि वार्ता विफल होती है,तो क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य टकराव और अस्थिरता बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस संभावित समझौते और अमेरिका-ईरान संबंधों में आने वाले अगले मोड़ पर टिकी हुई है।