अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@mdzishan0786)

ट्रंप और नेतन्याहू की फोन पर अहम बातचीत, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने पर बनी सहमति

तेल अवीव,25 मई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वैश्विक चिंता के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक अहम फोन वार्ता हुई। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम,होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति, लेबनान में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। नेतन्याहू ने इस बातचीत के बाद साफ संकेत दिए कि अमेरिका और इजरायल ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के मुद्दे पर एकमत हैं।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान के साथ संभावित अंतिम समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर चर्चा की। नेतन्याहू के अनुसार दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि ईरान के साथ किसी भी अंतिम समझौते में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि तेहरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके।

नेतन्याहू ने कहा कि इसका सीधा अर्थ यह है कि ईरान की सभी परमाणु संवर्धन साइट्स को पूरी तरह समाप्त किया जाए और उसके पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री को ईरानी क्षेत्र से बाहर हटाया जाए। इजरायली प्रधानमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है और वह किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं और दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर गहरी रणनीतिक समझ बनी हुई है।

फोन वार्ता के दौरान ट्रंप ने इजरायल की सुरक्षा के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता भी दोहराई। नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन’ और ‘एपिक फ्यूरी’ के दौरान अमेरिकी समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन सैन्य अभियानों में अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर ईरानी खतरे का मुकाबला किया था। नेतन्याहू के अनुसार दोनों देशों की साझेदारी सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है,बल्कि युद्ध के मैदान में भी यह मजबूत साबित हुई है।

इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार हैं। नेतन्याहू के बयान से यह साफ झलकता है कि इजरायल मौजूदा हालात में अमेरिका को अपना सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी मानता है।

इस बातचीत में लेबनान की स्थिति और हिज्बुल्लाह से जुड़े खतरे भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। नेतन्याहू ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने लेबनान समेत हर मोर्चे पर इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है। यह बयान ऐसे समय आया है,जब इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और सीमा क्षेत्रों में हमले जारी हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक,अमेरिका की ओर से तैयार किए जा रहे संभावित मसौदा समझौते में क्षेत्र के विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है। इसमें लेबनान पर इजरायल के सैन्य अभियानों को सीमित करने की संभावना भी बताई जा रही है। हालाँकि,नेतन्याहू इस प्रकार के किसी भी प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं,क्योंकि वह लंबे समय से हिज्बुल्लाह के पूर्ण निरस्त्रीकरण की माँग करते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर किसी प्रकार की रोक लगाने का प्रावधान शामिल होता है,तो इससे इजरायल और अमेरिका के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभर सकते हैं। इजरायल का मानना है कि हिज्बुल्लाह ईरान समर्थित सबसे बड़ा सैन्य खतरा है और जब तक उसके हथियार पूरी तरह समाप्त नहीं होते,तब तक उत्तरी सीमा पर स्थायी शांति संभव नहीं है।

पिछले महीने अमेरिका की मध्यस्थता में लागू हुए संघर्ष विराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। इजरायल ने लितानी नदी के दक्षिण और उत्तर दोनों क्षेत्रों में कई हवाई हमले जारी रखे हैं। इजरायली सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य हिज्बुल्लाह के सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को निशाना बनाना है।

दूसरी ओर ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। हाल के दिनों में उत्तरी इजरायल और दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है,तो मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की आशंका और बढ़ सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी इस बातचीत में महत्वपूर्ण रहा। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यहाँ अस्थिरता बनी रहती है,तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला और सुरक्षित रहे,ताकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप और नेतन्याहू की यह बातचीत केवल एक सामान्य कूटनीतिक संपर्क नहीं थी,बल्कि इसके जरिए दोनों देशों ने ईरान के खिलाफ अपनी साझा रणनीति का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। अमेरिका और इजरायल दोनों यह दिखाना चाहते हैं कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर किसी प्रकार की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं हैं।

मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच यह बातचीत आने वाले दिनों की कूटनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि ईरान के साथ संभावित समझौते में क्या शर्तें शामिल होती हैं और क्या इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकल पाएगा या नहीं।