कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट,मुक्त व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों ने बढ़ाए कदम

वॉशिंगटन/ओटावा,26 मई (युआईटीवी)- भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से ठहरे रिश्तों में अब नई ऊर्जा और सकारात्मकता देखने को मिल रही है। दोनों देशों ने आर्थिक,व्यापारिक और निवेश संबंधों को नई दिशा देने की स्पष्ट इच्छा जताई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई अहम बैठक के बाद यह संकेत मिला है कि दोनों देश इस वर्ष के अंत तक लंबे समय से रुके हुए मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। इस बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़े बदलाव और नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को कनाडा के कामगारों और उद्योगों के लिए “गेम चेंजर” बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ऐसे में उसके साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी कनाडा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कार्नी ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते से कनाडा के व्यवसायों को एक विशाल नया बाजार मिलेगा और इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं।

कार्नी ने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने चल रही व्यापार वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की और ऊर्जा,कृषि-खाद्य,प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। उनके अनुसार भारत और कनाडा के बीच साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में साझा विकास और रणनीतिक सहयोग का भी महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस समय कनाडा दौरे पर हैं और वह अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपति,निवेशक और कारोबारी नेता शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को फिर से गति देने की दिशा में एक अहम कदम है।

पीयूष गोयल ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात के बाद कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएँ पहुँचाई और कार्नी की हालिया भारत यात्रा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस यात्रा ने भारत-कनाडा संबंधों को नई ऊर्जा और नया भरोसा दिया है। गोयल ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने को लेकर “आगे की सोच वाली बातचीत” हुई है।

गोयल ने इस संबंध को “बहुत तेजी से रीसेट हो रहा रिश्ता” बताया। उनके अनुसार भारत और कनाडा अब पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व ने वार्ताकारों को निर्देश दिए हैं कि इस वर्ष के अंत तक या उससे पहले व्यापक दृष्टिकोण के साथ मुक्त व्यापार समझौते को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इससे रणनीतिक और राजनीतिक संबंधों में भी मजबूती आएगी। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखने को मिला था,लेकिन अब दोनों पक्ष आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देते हुए संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

ओटावा में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने कहा कि दोनों देश इस समझौते को जल्द पूरा करने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा सरकार ने अपने नागरिकों से वादा किया था कि वह तेजी से काम करेगी और अब उस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक व्यापार वार्ता के दो दौर पूरे हो चुके हैं और दोनों पक्ष कई अहम मुद्दों पर आगे बढ़ रहे हैं।

मनिंदर सिद्धू ने यह भी कहा कि कनाडा अब अपने व्यापारिक साझेदारों को विविध बनाना चाहता है। लंबे समय से कनाडा का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिका पर निर्भर रहा है,लेकिन अब वह गैर-अमेरिकी बाजारों में भी बड़े अवसर तलाश रहा है। उन्होंने कहा कि कनाडा लगभग 300 अरब डॉलर के अतिरिक्त गैर-अमेरिकी निर्यात अवसरों को खोलना चाहता है और भारत इस रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण साझेदार साबित हो सकता है।

भारत और कनाडा के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते से कई क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा,कृषि,खाद्य प्रसंस्करण,तकनीक,शिक्षा,खनिज,हरित ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ सकता है। भारत को कनाडा से स्वच्छ ऊर्जा,पोटाश और कृषि तकनीक के क्षेत्र में लाभ मिल सकता है,जबकि कनाडा को भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुँच प्राप्त हो सकती है।

गोयल ने कहा कि दोनों देश वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि दोनों देश तेजी से आगे बढ़ते हैं,तो यह साझेदारी केवल व्यापार जगत ही नहीं,बल्कि दोनों देशों के आम नागरिकों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा दोनों लोकतांत्रिक मूल्य साझा करते हैं और यही समानता भविष्य की साझेदारी को मजबूत आधार प्रदान करती है।

अपने कनाडा दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद,कृषि मंत्री हीथ मैकडोनाल्ड और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू से भी मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार,खाद्य सुरक्षा,कृषि तकनीक,स्थिरता,निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा कि दोनों देशों ने व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की ताकि व्यवसायों,कामगारों और निवेशकों के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकें। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच मजबूत आर्थिक संबंध दोनों देशों के दीर्घकालिक हित में हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल उपभोक्ता बाजार कनाडा के लिए बेहद आकर्षक हैं। वहीं भारत भी अपने वैश्विक व्यापार नेटवर्क को मजबूत करने और नए निवेश आकर्षित करने के लिए कनाडा जैसे विकसित देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है। ऐसे में यह समझौता दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं। कनाडा भारत में शिक्षा,कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा निवेशक रहा है। वहीं भारत की कई प्रमुख कंपनियाँ भी कनाडा में सक्रिय हैं। दोनों देशों के बीच बड़ी संख्या में छात्र,पेशेवर और कारोबारी समुदाय भी संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

अब जब दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते को लेकर गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं,तो यह केवल आर्थिक साझेदारी का मामला नहीं रह गया है,बल्कि यह वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच नई रणनीतिक साझेदारी का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वार्ताएँ कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं और क्या दोनों देश वास्तव में इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने में सफल हो पाते हैं।

फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि भारत और कनाडा दोनों अपने रिश्तों को नई दिशा देने के लिए पहले से कहीं अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि इस नई पहल को दोनों देशों के संबंधों में “नई शुरुआत” और “नए भरोसे” का प्रतीक माना जा रहा है।