मुंबई,30 मई (युआईटीवी)- देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने मार्च तिमाही में 2,537 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह आँकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की तुलना में काफी निराशाजनक माना जा रहा है,क्योंकि उस समय कंपनी ने 3,067.5 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। ताजा वित्तीय नतीजों ने यह संकेत दिया है कि वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच विमानन उद्योग पर दबाव लगातार बना हुआ है।
कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार,तिमाही के दौरान कुल आय में मामूली वृद्धि दर्ज की गई। परिचालन से प्राप्त आय बढ़कर 22,438 करोड़ रुपये तक पहुँच गई,जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 22,152 करोड़ रुपये थी। हालाँकि,आय में वृद्धि देखने को मिली,लेकिन बढ़ती लागत और अन्य विशेष खर्चों के कारण कंपनी लाभ को बनाए रखने में सफल नहीं हो सकी। इसका परिणाम यह हुआ कि कंपनी को तिमाही के अंत में भारी घाटे का सामना करना पड़ा।
इंटरग्लोब एविएशन ने स्पष्ट किया कि इस तिमाही की लाभप्रदता पर लगभग 250 करोड़ रुपये के एकमुश्त शुल्क का भी प्रभाव पड़ा। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ ने कंपनी के समग्र प्रदर्शन को प्रभावित किया। विमानन उद्योग में परिचालन लागत पहले से ही ऊँचे स्तर पर बनी हुई है और ऐसे विशेष खर्चों ने वित्तीय दबाव को और बढ़ा दिया।
हालाँकि,कंपनी के परिचालन प्रदर्शन के कुछ संकेतक अपेक्षाकृत सकारात्मक रहे। तिमाही के दौरान एयरलाइन का ईबीआईटीडीए बढ़कर 6,396 करोड़ रुपये हो गया,जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 5,953 करोड़ रुपये था। यह दर्शाता है कि मुख्य परिचालन गतिविधियों से कंपनी की आय में सुधार हुआ है। इसके बावजूद लाभप्रदता के प्रमुख संकेतकों में गिरावट ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया।
विशेष रूप से ईबीआईटीडीए मार्जिन में आई तेज गिरावट चिंता का विषय रही। यह घटकर मात्र 3.6 प्रतिशत रह गया,जबकि एक वर्ष पहले यह 27.5 प्रतिशत था। यह गिरावट बताती है कि परिचालन स्तर पर आय बढ़ने के बावजूद लागत और अन्य वित्तीय दबावों ने कंपनी के मुनाफे को गंभीर रूप से प्रभावित किया। दूसरी ओर ईबीआईटीडीएआर मार्जिन में सुधार देखने को मिला और यह बढ़कर 28.5 प्रतिशत तक पहुँच गया,जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 26.9 प्रतिशत था।
मार्च तिमाही के दौरान एयरलाइन के सामने कई परिचालन चुनौतियाँ भी मौजूद रहीं। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और उससे जुड़े हवाई मार्गों पर पड़ने वाले प्रभाव ने वैश्विक विमानन उद्योग को प्रभावित किया। इंडिगो ने भी स्वीकार किया कि इन परिस्थितियों का असर उसके संचालन पर पड़ा। इसके बावजूद कंपनी ने अपनी क्षमता में वृद्धि दर्ज की। उपलब्ध सीट किलोमीटर के आधार पर मापी जाने वाली क्षमता 3.4 प्रतिशत बढ़कर 43.6 बिलियन तक पहुँच गई। यह दर्शाता है कि कंपनी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने नेटवर्क और उड़ान संचालन का विस्तार जारी रखा।
हालाँकि,क्षमता बढ़ने के बावजूद यात्री संख्या में हल्की गिरावट दर्ज की गई। तिमाही के दौरान एयरलाइन ने 31.6 मिलियन यात्रियों को सेवाएँ प्रदान कीं,जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.1 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव,कुछ मार्गों पर परिचालन बाधाएँ और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं।
कंपनी ने अपने कमजोर वित्तीय प्रदर्शन के लिए पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान बने चुनौतीपूर्ण कारोबारी वातावरण को जिम्मेदार ठहराया है। विमानन क्षेत्र पर ईंधन लागत, वैश्विक अनिश्चितताओं,विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और परिचालन खर्चों का दबाव लगातार बना हुआ है। इन परिस्थितियों ने एयरलाइनों के लिए लाभप्रदता बनाए रखना कठिन बना दिया है।
नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए इंटरग्लोब एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल भाटिया ने कहा कि बीता वित्त वर्ष कंपनी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि कई गंभीर परिचालन चुनौतियों का सीधा असर कंपनी की मुनाफाखोरी पर पड़ा। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि एयरलाइन का मूल कारोबार मजबूत बना हुआ है और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कंपनी ने कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रदर्शन किया है।
राहुल भाटिया के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की क्षमता में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही कुल आय में छह प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि कंपनी की बुनियादी कारोबारी ताकत अभी भी मजबूत है और वह बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है। उनके मुताबिक वर्तमान चुनौतियाँ अस्थायी प्रकृति की हैं और कंपनी भविष्य में विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बनी हुई है।
विमानन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन के लिए क्षमता विस्तार और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना महत्वपूर्ण है,लेकिन इसके साथ लागत नियंत्रण भी उतना ही आवश्यक है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में एयरलाइनों को परिचालन दक्षता बढ़ाने और खर्चों को नियंत्रित रखने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
वित्तीय नतीजों का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,418.40 रुपये पर बंद हुआ। निवेशकों ने कंपनी के घाटे और लाभप्रदता में आई गिरावट पर चिंता व्यक्त की,जिसका प्रभाव शेयर मूल्य पर दिखाई दिया।
फिलहाल इंडिगो के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिचालन विस्तार और वित्तीय संतुलन के बीच सामंजस्य बनाए रखने की है। कंपनी का नेटवर्क,यात्री आधार और बाजार में पकड़ मजबूत बनी हुई है,लेकिन बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती लागतों के बीच लाभप्रदता को फिर से पटरी पर लाना उसके लिए प्राथमिक लक्ष्य होगा। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के प्रदर्शन पर निवेशकों,उद्योग विशेषज्ञों और विमानन क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों की नजर बनी रहेगी।
