सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल (तस्वीर क्रेडिट@BokaThob2383)

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी तेज,कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर टिकी सबकी निगाहें

बेंगलुरु,30 मई (युआईटीवी)- कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस विधायक दल के नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी क्रम में शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है,जिसे राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक माना जा रहा है। इस बैठक में नए विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा,जिसके बाद उसके मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सँभालने की संभावना जताई जा रही है।

बैठक से पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार की गतिविधियों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। शनिवार सुबह उनका राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का कार्यक्रम तय किया गया है। इसके बाद शाम चार बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों घटनाओं का आपस में गहरा संबंध हो सकता है और आने वाले घंटों में राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलने की तस्वीर साफ हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में शुक्रवार को हुई एक महत्वपूर्ण मुलाकात भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। इस मुलाकात को कांग्रेस नेतृत्व की ओर से संभावित नेतृत्व परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि,शिवकुमार ने इस मुलाकात के बाद सार्वजनिक रूप से कोई बड़ा राजनीतिक दावा नहीं किया,लेकिन उन्होंने यह अवश्य कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता कांग्रेस विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही की जाएगी।

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा उस समय और तेज हो गई,जब सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया,ताकि नए नेता का चयन किया जा सके। यह बैठक विधानसभा के सम्मेलन कक्ष में आयोजित की जाएगी और वर्तमान विधायक दल के नेता के रूप में सिद्धारमैया इसकी अध्यक्षता करेंगे। माना जा रहा है कि बैठक में विधायक दल के नेता के चयन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी और उसके बाद मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार की घोषणा हो सकती है।

बैठक में कांग्रेस संगठन और सरकार के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार,अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला,विधान परिषद में पार्टी के नेता एनएस बोस राजू तथा पार्टी के कार्यकारी अध्यक्षों सहित अनेक वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा सभी विधायक,विधान परिषद सदस्य, लोकसभा सांसद और राज्यसभा सांसदों को भी बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस नेतृत्व इस प्रक्रिया को व्यापक सहमति और संगठनात्मक एकता के साथ पूरा करना चाहता है।

कांग्रेस विधायक दल के सचिव अल्लामा प्रभु पाटिल द्वारा की गई टिप्पणी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को नया आयाम दिया है। उन्होंने दावा किया कि डीके शिवकुमार पहले से ही मुख्यमंत्री पद के लिए नामित हैं और यह बात अब किसी से छिपी नहीं है। उनका कहना था कि दिल्ली में हुई चर्चाओं के बाद सिद्धारमैया ने स्वयं संकेत दिया था कि उन्हें पद छोड़ने की सलाह दी गई है और डीके शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। पाटिल के अनुसार उसी समय यह लगभग स्पष्ट हो गया था कि राज्य की बागडोर अब शिवकुमार के हाथों में सौंपी जा सकती है।

हालाँकि,कांग्रेस की ओर से अभी तक औपचारिक रूप से किसी नाम की घोषणा नहीं की गई है,लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करना चाहता है। कांग्रेस के लिए यह केवल मुख्यमंत्री बदलने का मामला नहीं है,बल्कि राज्य में संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की भी चुनौती है। इसलिए पार्टी नेतृत्व हर कदम बेहद सावधानी से उठा रहा है।

डीके शिवकुमार लंबे समय से कर्नाटक कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। संगठन को मजबूत करने,चुनावी रणनीति तैयार करने और पार्टी को सत्ता तक पहुँचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी कारण उनके समर्थक लंबे समय से उन्हें मुख्यमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार मानते रहे हैं। दूसरी ओर सिद्धारमैया भी राज्य की राजनीति में एक मजबूत और लोकप्रिय नेता रहे हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की यह प्रक्रिया कांग्रेस के लिए संतुलन साधने की परीक्षा भी मानी जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुना जाता है,तो यह कांग्रेस नेतृत्व द्वारा राज्य में नई राजनीतिक दिशा देने का संकेत होगा। वहीं यदि किसी अन्य नाम पर सहमति बनती है तो यह भी राज्य की राजनीति में नया समीकरण पैदा कर सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें शनिवार शाम होने वाली विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई हैं।

कर्नाटक की राजनीति में यह क्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे राज्य सरकार के भविष्य की दिशा तय होगी। कांग्रेस नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया शांतिपूर्ण,संगठित और सर्वसम्मति के साथ पूरी हो। आने वाले घंटों में होने वाले फैसले न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित करेंगे,बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व शैली को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देंगे। ऐसे में कांग्रेस विधायक दल की बैठक और उसके बाद होने वाले घटनाक्रमों पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।