ओस्लो,2 जून (युआईटीवी)- नॉर्वे शतरंज 2026 के सातवें दौर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में हर मुकाबला अंतिम चाल तक रोमांच से भरा हुआ है। सातवें राउंड में जहाँ भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रग्गनानंदा रमेशबाबू ने शानदार खेल दिखाते हुए अलीरेजा फिरोजा को क्लासिकल मुकाबले में पराजित किया,वहीं विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने वेस्ली सो के खिलाफ आर्मागेडन मुकाबले में जीत दर्ज कर महत्वपूर्ण अतिरिक्त अंक हासिल किए। इन परिणामों ने न केवल अंक तालिका को और दिलचस्प बना दिया है,बल्कि टूर्नामेंट के अंतिम चरण से पहले खिताबी दौड़ को भी बेहद रोमांचक बना दिया है।
सातवें राउंड का सबसे चर्चित मुकाबला प्रग्गनानंदा और अलीरेजा फिरोजा के बीच खेला गया। दोनों खिलाड़ियों के बीच शुरुआत से ही कड़ा संघर्ष देखने को मिला। मुकाबले के दौरान कई ऐसे मौके आए जब स्थिति बराबरी की दिखाई दे रही थी,लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने धैर्य,सटीक गणना और उत्कृष्ट रणनीतिक समझ का परिचय देते हुए धीरे-धीरे बढ़त बनानी शुरू की। जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा,प्रज्ञानानंद ने अपनी स्थिति को मजबूत किया और अंततः जीत सुनिश्चित कर ली।
यह जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। एक ओर प्रग्गनानंदा ने टूर्नामेंट के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में से एक को हराया,वहीं दूसरी ओर अलीरेजा फिरोजा को इस प्रतियोगिता में दूसरी क्लासिकल हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम ने शीर्ष स्थान की लड़ाई को और अधिक रोचक बना दिया है। शतरंज विशेषज्ञों का मानना है कि प्रज्ञानानंद का यह प्रदर्शन उनकी परिपक्वता और बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार विश्व स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है और नॉर्वे शतरंज में उनका प्रदर्शन इस बात का प्रमाण माना जा रहा है।
दूसरी ओर,विश्व चैंपियन डी. गुकेश और अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो के बीच मुकाबला भी कम रोमांचक नहीं रहा। दोनों खिलाड़ियों ने क्लासिकल मुकाबले में बेहद सावधानी और संतुलन के साथ खेला। लंबे समय तक चले इस संघर्ष में किसी भी खिलाड़ी को निर्णायक बढ़त नहीं मिल सकी और अंततः मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालाँकि,नॉर्वे शतरंज की विशेष प्रणाली के तहत ड्रॉ के बाद आर्मागेडन मुकाबला खेला गया,जिसमें गुकेश ने अपनी श्रेष्ठता साबित की।
आर्मागेडन मुकाबले में गुकेश ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की और अतिरिक्त अंक अपने नाम किए। यह जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही,क्योंकि इससे वह शीर्ष खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा में बने रहे। विश्व चैंपियन बनने के बाद गुकेश लगातार यह साबित कर रहे हैं कि वह केवल बड़े टूर्नामेंट जीतने तक सीमित नहीं हैं,बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी अपनी रणनीतिक क्षमता का शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।
टूर्नामेंट के मेजबान और विश्व के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन भी सातवें दौर में चर्चा के केंद्र में रहे। उनका मुकाबला जर्मनी के विंसेंट कीमर के साथ हुआ,जो लंबे समय तक चला और बेहद संतुलित रहा। दोनों खिलाड़ियों ने उच्च स्तर का खेल दिखाया और किसी को भी निर्णायक बढ़त नहीं मिल सकी। परिणामस्वरूप क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ।
इसके बाद खेले गए आर्मागेडन मुकाबले में कार्लसन ने अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए जीत हासिल की। अतिरिक्त अंक मिलने से वह खिताबी दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं। कार्लसन का लक्ष्य अपने घरेलू टूर्नामेंट में एक और खिताब जीतना है और सातवें दौर का परिणाम उनके लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
सात राउंड के बाद पुरुष वर्ग की अंक तालिका बेहद रोचक स्थिति में पहुँच गई है। वेस्ली सो 12.5 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। हालाँकि,उनके पीछे मौजूद खिलाड़ी बहुत अधिक अंतर पर नहीं हैं। अलीरेजा फिरोजा 10 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं,जबकि मैग्नस कार्लसन,विंसेंट कीमर और प्रग्गनानंदा रमेशबाबू 9-9 अंकों के साथ संयुक्त रूप से उनके पीछे मौजूद हैं। इस स्थिति ने आने वाले राउंड को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है,क्योंकि कुछ अच्छे परिणाम पूरे टूर्नामेंट का समीकरण बदल सकते हैं।
महिला वर्ग में भी सातवां दौर बेहद रोमांचक रहा। भारत की कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख के बीच क्लासिकल मुकाबला काफी संघर्षपूर्ण रहा। दोनों खिलाड़ियों ने उच्च स्तर की तैयारी और रणनीतिक समझ का प्रदर्शन किया। लंबे समय तक चले इस मुकाबले में किसी भी खिलाड़ी को निर्णायक बढ़त नहीं मिल सकी और अंततः खेल ड्रॉ पर समाप्त हुआ।
हालाँकि,आर्मागेडन मुकाबले में युवा भारतीय खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने शानदार प्रदर्शन किया। काले मोहरों से खेलते हुए उन्होंने दबाव को बखूबी सँभाला और जीत दर्ज कर अतिरिक्त अंक हासिल किए। यह सफलता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही,क्योंकि इससे उन्होंने महिला वर्ग की अंक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। दिव्या का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली रहा है और वह अब खिताब की प्रमुख दावेदारों में गिनी जा रही हैं।
महिला वर्ग में दिन का सबसे बड़ा परिणाम बिबिसारा अस्सौबायेवा के नाम रहा। उन्होंने क्लासिकल मुकाबले में झू जिनर को हराकर अपनी बढ़त को और मजबूत किया। सफेद मोहरों से खेलते हुए बिबिसारा को शुरुआती चरण में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा,लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया। मिडिलगेम में स्थिति को संतुलित करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे बढ़त बनाई और फिर उसे जीत में बदल दिया।
इस जीत से उन्हें पूरे तीन अंक मिले,जो टूर्नामेंट के इस चरण में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। उनकी इस सफलता ने महिला वर्ग में शीर्ष स्थान पर उनकी पकड़ को और मजबूत कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी लय को बनाए रखती हैं,तो खिताब जीतने की उनकी संभावना काफी बढ़ जाएगी।
मौजूदा महिला विश्व चैंपियन जू वेनजुन और एना मुजिचुक के बीच भी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। क्लासिकल खेल ड्रॉ पर समाप्त हुआ,लेकिन आर्मागेडन में एना मुजिचुक ने शानदार खेल दिखाते हुए जीत दर्ज की। इस अतिरिक्त अंक ने उन्हें शीर्ष खिलाड़ियों के करीब बनाए रखा है और खिताबी दौड़ में उनकी उम्मीदों को जीवित रखा है।
सातवें दौर के बाद महिला वर्ग की अंक तालिका में बिबिसारा अस्सौबायेवा 12.5 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं। भारत की दिव्या देशमुख 10 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर मौजूद हैं,जबकि एना मुजिचुक 9.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। अंक तालिका की यह स्थिति दर्शाती है कि महिला वर्ग में भी खिताब की लड़ाई पूरी तरह खुली हुई है।
नॉर्वे शतरंज 2026 अब अपने निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अंकों का अंतर बहुत कम है,जिससे प्रत्येक मुकाबले का महत्व बढ़ गया है। भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन विशेष रूप से उत्साहजनक रहा है। प्रग्गनानंदा,गुकेश,कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख ने लगातार मजबूत खेल दिखाकर यह साबित किया है कि भारतीय शतरंज विश्व मंच पर नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। आने वाले राउंड में सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या भारतीय खिलाड़ी इस शानदार लय को बरकरार रखते हुए खिताब की दौड़ में निर्णायक बढ़त हासिल कर पाते हैं या नहीं।
