बेंगलुरु,6 जून (युआईटीवी)- कर्नाटक सरकार ने सरकारी कार्यालयों में समय की पाबंदी और कार्य संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सुबह 10 बजे तक कार्यालय पहुँचना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही कर्मचारियों को अपनी उपस्थिति ‘कर्तव्य’ मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज करनी होगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नए नियम का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
राज्य के मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह निर्णय राज्य सरकार के प्रशासनिक सुधारों और सरकारी तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाने के प्रयासों का हिस्सा है। आदेश मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में 4 जून को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी किया गया है। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के देर से आने और उपस्थिति संबंधी अनियमितताओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।
सरकार का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में समय की पाबंदी सुनिश्चित किए बिना प्रशासनिक कार्यों में अपेक्षित सुधार नहीं लाया जा सकता। कई बार आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में आवश्यक कार्यों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है,क्योंकि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुँचते। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
नए आदेश के अनुसार,अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर से लेकर जिला और तहसील स्तर तक के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिदिन ‘कर्तव्य’ ऐप पर चेक-इन और चेक-आउट करना होगा। यानी कर्मचारी जब कार्यालय पहुँचेंगे,तब उन्हें ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी और कार्यालय छोड़ते समय भी अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। इससे कर्मचारियों की कार्य अवधि और उपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।
सरकार ने इस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एक उन्नत निगरानी प्रणाली भी तैयार की है। ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा विकसित इस प्रणाली के माध्यम से कर्मचारियों की उपस्थिति पर रियल-टाइम नजर रखी जाएगी। यदि कोई कर्मचारी सुबह 10 बजे तक अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करता है,तो सिस्टम स्वतः उसकी जानकारी रिकॉर्ड कर लेगा और संबंधित विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट भेज देगा।
यह रिपोर्ट जिला स्तर और कार्यालय स्तर पर अलग-अलग तैयार की जाएगी,जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस विभाग में समय पालन की स्थिति कैसी है। इसके बाद संबंधित विभाग प्रमुखों की जिम्मेदारी होगी कि वे रिपोर्ट की समीक्षा करें और नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सरकार ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है,जिन्हें अपने कार्य के दौरान अक्सर फील्ड में जाना पड़ता है या आधिकारिक दौरों पर रहना होता है। ऐसे कर्मचारियों को ‘कर्तव्य’ ऐप में ‘आउट ऑफ ऑफिस ड्यूटी’ यानी कार्यालय से बाहर ड्यूटी का विकल्प चुनना होगा। इसके बाद उनकी उपस्थिति और कार्य स्थिति की पुष्टि उनके वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वास्तविक फील्ड ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और केवल अनुपस्थित रहने वालों पर कार्रवाई की जाए।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की निगरानी करना नहीं है,बल्कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना भी है। राज्य सरकार चाहती है कि सभी विभागों में कार्य समय का पूरी तरह पालन हो और नागरिकों को सरकारी सेवाएँ समय पर मिल सकें। इसके लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए एक ऐसी प्रणाली विकसित की गई है,जिसमें मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो और निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से हो सके।
पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार लगातार प्रशासनिक सुधारों पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की योजनाओं और नीतियों का लाभ तभी लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुँच सकता है,जब सरकारी मशीनरी पूरी क्षमता और अनुशासन के साथ कार्य करे। इसी सोच के तहत विभिन्न विभागों में कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने और तकनीक के अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
‘कर्तव्य’ ऐप पहले भी कुछ विभागों में प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रारंभिक स्तर पर इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। कई विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति में सुधार देखने को मिला और कार्य निष्पादन की गति भी बढ़ी। इसी अनुभव के आधार पर अब सरकार ने इसे पूरे राज्य में लागू करने का फैसला किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल उपस्थिति प्रणाली सरकारी कार्यालयों में अनुशासन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे कर्मचारियों की उपस्थिति का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और कार्यालयों में समय पालन की संस्कृति को मजबूत किया जा सकेगा। हालाँकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक होगी,क्योंकि अंतिम स्तर पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी उन्हीं के पास रहेगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्नाटक देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा,जहाँ सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति पर तकनीक आधारित निगरानी को व्यापक स्तर पर अपनाया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी,सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और आम जनता को अधिक प्रभावी तथा समयबद्ध सेवाएँ प्राप्त होंगी।
कुल मिलाकर,कर्नाटक सरकार का यह कदम सरकारी कार्य संस्कृति में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘कर्तव्य’ ऐप आधारित यह नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे सरकारी कार्यालयों में समय की पाबंदी और जवाबदेही वास्तव में बढ़ पाती है।
