श्रीलंका के जेवलिन थ्रोअर रुमेश थरंगा (तस्वीर क्रेडिट@Mahishini)

श्रीलंका के जेवलिन थ्रोअर रुमेश थरंगा पथिरगे ने रचा इतिहास,92.62 मीटर भाला फेंककर तोड़ा रिकॉर्ड और दुनिया को चौंकाया

रोम,6 जून (युआईटीवी)- श्रीलंका के स्टार जेवलिन थ्रोअर रुमेश थरंगा पथिरगे ने एथलेटिक्स की दुनिया में एक नई पहचान स्थापित करते हुए वांडा डायमंड लीग की प्रतिष्ठित गोल्डन गाला पिएत्रो मेनेया प्रतियोगिता में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 92.62 मीटर दूर भाला फेंककर नया रिकॉर्ड कायम किया और अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स जगत को हैरान कर दिया। इस शानदार उपलब्धि के साथ पथिरगे न केवल श्रीलंका के सबसे सफल भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं,बल्कि उन्होंने विश्व एथलेटिक्स के इतिहास में भी अपना नाम दर्ज करा लिया है।

प्रतियोगिता के दौरान पथिरगे ने शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। उन्होंने पहले प्रयास में 84.49 मीटर का थ्रो किया,जो मुकाबले में बढ़त हासिल करने के लिए पर्याप्त था। हालाँकि,इसके बाद उन्होंने जो प्रदर्शन किया,उसने दर्शकों और विशेषज्ञों को पूरी तरह चौंका दिया। दूसरे प्रयास में उन्होंने 90 मीटर का आँकड़ा पार करते हुए नया इतिहास रच दिया। इसी के साथ वह वर्ष 2026 सीजन में 90 मीटर या उससे अधिक दूरी का थ्रो करने वाले पहले एथलीट बन गए।

इसके बाद पथिरगे ने 92.62 मीटर का असाधारण थ्रो कर अपने प्रदर्शन को और ऊँचाई दे दी। यह थ्रो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ और इसी के साथ उन्होंने लगभग दो दशकों से कायम एक बड़े रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। उन्होंने एंड्रियास थोरकिल्डसन के 90.34 मीटर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया मानक स्थापित कर दिया। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इतने लंबे समय से यह रिकॉर्ड सुरक्षित माना जा रहा था और बहुत कम खिलाड़ियों को इसे तोड़ने का वास्तविक दावेदार समझा जाता था।

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद रुमेश थरंगा पथिरगे विश्व की सर्वकालिक सूची में आठवें स्थान पर पहुँच गए हैं। यह उपलब्धि किसी भी एथलीट के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है,क्योंकि विश्व एथलेटिक्स के इतिहास में केवल चुनिंदा खिलाड़ी ही इतनी लंबी दूरी तक भाला फेंकने में सफल रहे हैं। पथिरगे का नाम अब उन महान खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गया है,जिन्होंने 90 मीटर से अधिक दूरी का थ्रो कर अपनी अलग पहचान बनाई।

उनकी यह सफलता एशियाई एथलेटिक्स के लिए भी गर्व का विषय बन गई है। पथिरगे अब एशिया के दूसरे सबसे सफल भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने इस मामले में भारत के ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा को भी पीछे छोड़ दिया है,जिनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 90.23 मीटर रहा है। हालाँकि एशिया का शीर्ष प्रदर्शन अभी भी चीनी ताइपे के चेंग चाओ-सुन के नाम दर्ज है,जिन्होंने 91.36 मीटर का थ्रो किया था। अब पथिरगे ने उससे भी आगे निकलकर एशियाई एथलेटिक्स में एक नई मिसाल कायम कर दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार पथिरगे का 92.62 मीटर का थ्रो हाल के वर्षों के सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक है। यह 2024 ओलंपिक फाइनल के बाद दुनिया का सबसे लंबा थ्रो माना जा रहा है। इस उपलब्धि ने उन्हें मौजूदा समय के सर्वश्रेष्ठ भाला फेंक खिलाड़ियों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। उनकी तकनीक,गति,संतुलन और मानसिक मजबूती ने इस प्रतियोगिता में उन्हें बाकी खिलाड़ियों से काफी आगे रखा।

प्रतियोगिता में दो बार के विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स भी शामिल थे,लेकिन वह 83.91 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहे। विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता कर्टिस थॉम्पसन तीसरे स्थान पर रहे। पथिरगे के मुकाबले अन्य खिलाड़ी काफी पीछे दिखाई दिए, जिससे उनकी श्रेष्ठता साफ तौर पर नजर आई। जिस तरह से उन्होंने पूरे मुकाबले में नियंत्रण बनाए रखा,उसने यह साबित कर दिया कि वह अब केवल एक उभरते हुए खिलाड़ी नहीं,बल्कि विश्व स्तर के दावेदार बन चुके हैं।

जीत के बाद पथिरगे बेहद भावुक और उत्साहित दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। उनके अनुसार उन्होंने प्रतियोगिता में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य लेकर हिस्सा लिया था और वह अपने पुराने रिकॉर्ड में लगभग तीन मीटर का सुधार करने में सफल रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतियोगिता के दौरान उनके केवल दो प्रयास ही वैध रहे,लेकिन इसके बावजूद वह मानसिक रूप से पूरी तरह स्थिर बने रहे और उन्होंने उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाया।

पथिरगे ने यह भी कहा कि हाल ही में रबात में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान मौसम काफी गर्म था,जिससे खिलाड़ियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसके विपरीत रोम में मौसम बेहद अनुकूल था और उन्हें शुरुआत से ही महसूस हो रहा था कि यहाँ लंबी दूरी तक भाला फेंकने के लिए परिस्थितियाँ आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे मौसम और सकारात्मक मानसिकता ने उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ रुमेश थरंगा पथिरगे 90 मीटर का आँकड़ा पार करने वाले केवल चौथे एशियाई खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि चीनी ताइपे के चेंग चाओ-सुन, भारत के नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम हासिल कर चुके हैं। अब पथिरगे का नाम भी इस विशिष्ट सूची में शामिल हो गया है,जो एशियाई एथलेटिक्स के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।

उनकी इस सफलता ने श्रीलंका के खेल जगत में भी उत्साह की लहर पैदा कर दी है। लंबे समय से श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स में किसी बड़ी उपलब्धि की प्रतीक्षा कर रहा था और पथिरगे ने अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखते हैं,तो आने वाली विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक प्रतियोगिताओं में पदक के प्रबल दावेदार बन सकते हैं।

रुमेश थरंगा पथिरगे की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है,बल्कि यह एशियाई एथलेटिक्स की बढ़ती ताकत का भी प्रमाण है। हाल के वर्षों में एशियाई खिलाड़ियों ने भाला फेंक स्पर्धा में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और अब पथिरगे की ऐतिहासिक उपलब्धि ने इस परंपरा को और मजबूत कर दिया है। दुनिया भर के खेल प्रेमियों की नजर अब उनके आगामी प्रदर्शन पर टिकी होगी,क्योंकि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वह भविष्य में और भी बड़े रिकॉर्ड बनाने की क्षमता रखते हैं।