ईरान-अमेरिका तनाव फिर चरम पर, खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ी वैश्विक चिंता (तस्वीर क्रेडिट@thetimesq8)

ईरान-अमेरिका तनाव फिर चरम पर,खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ी वैश्विक चिंता

तेहरान/वॉशिंगटन,10 जून (युआईटीवी)- मध्य एशिया और खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे सहित खाड़ी क्षेत्र के 22 महत्वपूर्ण ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी सैन्य ठिकानों द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद यह अमेरिका और ईरान के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में से एक है। दोनों देशों के बीच पहले भी कई बार तनाव बढ़ा है,लेकिन इस बार हमलों का दायरा और उनकी तीव्रता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही है। ईरान ने जिस प्रकार एक साथ कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य परिसरों को निशाना बनाने का दावा किया है,उसने इस संघर्ष को केवल द्विपक्षीय विवाद तक सीमित नहीं रहने दिया है।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार,जॉर्डन,कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने हमलों के प्रमुख लक्ष्य थे। ईरान के सरकारी प्रसारक ने बताया कि बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पाँचवें बेड़े को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद बहरीन के गृह मंत्रालय ने तत्काल सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। देश की वायु रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया गया और सुरक्षा एजेंसियों को उच्चतम स्तर पर तैनात किया गया।

बाद में बहरीन के शाही दरबार के मीडिया सलाहकार ने दावा किया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से किए गए हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया। अधिकारियों के अनुसार किसी भी महत्वपूर्ण सैन्य या नागरिक ढाँचे को नुकसान नहीं पहुँचा और स्थिति नियंत्रण में है। हालाँकि,इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र के देशों को अपनी सुरक्षा रणनीतियों की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।

इससे पहले अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान ने जानकारी दी थी कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य ईरान की वायु रक्षा क्षमता,नियंत्रण केंद्रों और निगरानी रडार प्रणालियों को कमजोर करना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के जवाब में की गई थी।

ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि अमेरिका को अपने सैनिकों और सैन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रतिक्रिया देनी आवश्यक थी। उनके अनुसार अमेरिकी सेना ने अत्यंत प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर कड़ा जवाब नहीं दिया जाता,तो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर खतरा और बढ़ सकता है।

हालिया घटनाक्रम ने फरवरी में शुरू हुए उस व्यापक संघर्ष की यादें ताजा कर दी हैं,जिसकी शुरुआत अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त हवाई हमलों से हुई थी। उन हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके साथ ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया था।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है। हालिया तनाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हाल की सैन्य कार्रवाई लगभग चार घंटे तक चली और इस दौरान ईरान के करीब 20 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य केवल सैन्य बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचाना था और नागरिक क्षेत्रों को निशाना नहीं बनाया गया।

दूसरी ओर ईरानी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित केश्म द्वीप और सीरिक बंदरगाह क्षेत्र में भी हमले हुए। इसके अलावा बंदर अब्बास और जास्क के आसपास कई विस्फोटों की आवाजें सुनाई देने की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं ने स्थानीय आबादी में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में मौजूद चार महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला किया। इनमें ऐसे सैन्य अड्डे भी शामिल बताए गए जहाँ अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और कमांड सेंटर मौजूद हैं। हालाँकि,जॉर्डन की सेना ने इन दावों को सीमित करते हुए कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई पाँच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। जॉर्डन के अनुसार इस घटना में किसी प्रकार का नुकसान या जनहानि नहीं हुई।

उधर कुवैत ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया है। कुवैती सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियाँ संदिग्ध हवाई गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। यह बयान उस समय आया,जब ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत में स्थित अली अल-सलेम अमेरिकी सैन्य अड्डे को ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया है।

बहरीन में अमेरिकी पाँचवें बेड़े पर हमले के दावे ने भी स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखता है,तो उसके जवाब और अधिक व्यापक तथा कठोर होंगे। यह बयान संकेत देता है कि ईरान फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका ने ईरान के संकल्प और धैर्य की परीक्षा लेने का फैसला किया है,लेकिन ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगी। उनके इस बयान को ईरान के दृढ़ रुख और संभावित आगे की सैन्य रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ सकता है। यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है,तो क्षेत्रीय सुरक्षा,वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां और अंतर्राष्ट्रीय संगठन दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहे हैं।

फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी, मिसाइल और ड्रोन हमलों के दावे तथा जवाबी कार्रवाइयों की चेतावनियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थिति किसी भी समय और अधिक गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।