शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत

शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलों से बढ़ा सियासी तापमान,सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति

नई दिल्ली,17 जून (युआईटीवी)- महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के सांसदों को तोड़ने की कथित कोशिशों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के प्रमुख नेताओं का दावा है कि कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी रकम की पेशकश की जा रही है और इसके पीछे एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान चल रहा है। इन आरोपों के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और राजनीतिक गलियारों में संभावित घटनाक्रमों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे को सबसे मुखर तरीके से उठाया है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कुछ सांसदों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है और उन्हें कथित रूप से 15-15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई है। राउत ने कहा कि फिलहाल उनके पास किसी सांसद के आधिकारिक रूप से पार्टी छोड़ने या इस्तीफा देने की जानकारी नहीं है,लेकिन मीडिया में लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं,जिनसे पार्टी को सतर्क रहना पड़ रहा है।

संजय राउत के अनुसार,हाल ही में मुंबई स्थित मातोश्री में उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में पार्टी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कुछ सांसद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए,जबकि अन्य सांसदों ने वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया। राउत ने बताया कि बैठक के दौरान सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अपनी आस्था जताई और पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में किसी भी सांसद ने पार्टी छोड़ने या किसी अन्य राजनीतिक दल के संपर्क में होने की बात नहीं कही।

हालाँकि,इसके बावजूद मीडिया में लगातार चल रही खबरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। संजय राउत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई सांसद पार्टी से विश्वासघात करने की कोशिश करता है,तो उसे राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि जो सांसद आज पार्टी के टिकट पर संसद पहुँचे हैं,वे शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिह्न और कार्यकर्ताओं की मेहनत की बदौलत चुने गए हैं। ऐसे में यदि कोई जनादेश का अपमान करते हुए दूसरी तरफ जाने का फैसला करता है,तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

राउत ने दावा किया कि इस पूरे मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से संसदीय बैठक के लिए व्हिप भी जारी किया गया है,ताकि सांसदों की स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि को गंभीरता से लिया जा रहा है।

अपने आरोपों को और गंभीर बनाते हुए संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में सांसदों की खुलेआम खरीद-फरोख्त की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी शिवसेना (यूबीटी) को कमजोर करने और उसके सांसदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। हालाँकि,भारतीय जनता पार्टी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन आरोपों पर आगे कोई ठोस साक्ष्य सामने आते हैं,तो यह मामला और अधिक राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

संजय राउत ने दावा किया कि कुछ सांसदों तक कथित रूप से करोड़ों रुपये पहुँचाए जा चुके हैं और कुछ लोग चार्टर्ड विमान के जरिए यात्रा कर रहे हैं। हालाँकि,उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिर भी उनके बयानों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। राउत ने कहा कि जिन नेताओं और सांसदों को पार्टी ने पहचान दी,टिकट दिया और चुनाव लड़ने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराई,उनके बारे में यदि ऐसी खबरें सामने आती हैं,तो उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अथक परिश्रम किया और सांसदों को जीत दिलाने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया। पार्टी ने आर्थिक और राजनीतिक रूप से उनका समर्थन किया। ऐसे में यदि कोई नेता पार्टी छोड़ने की सोचता है,तो उसे पहले जनता और कार्यकर्ताओं को जवाब देना होगा। राउत ने चेतावनी देते हुए कहा कि महाराष्ट्र की जनता अब ऐसी घटनाओं को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी और जनादेश से खिलवाड़ करने वालों को जनता जवाब देगी।

इस बीच,शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसद अरविंद सावंत ने भी पार्टी में टूट की खबरों को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल केवल सांसदों और विधायकों से नहीं बनते,बल्कि उनकी जड़ें संगठन और कार्यकर्ताओं में होती हैं। सावंत ने कहा कि अब तक किसी सांसद ने पार्टी नेतृत्व से संपर्क कर यह नहीं बताया है कि वह पार्टी छोड़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि मीडिया में जो खबरें चल रही हैं,उन्हें लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पार्टी नेतृत्व स्थिति पर नजर रखे हुए है।

अरविंद सावंत ने यह भी कहा कि राजनीतिक अफवाहों और अटकलों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार,पार्टी एक संगठित इकाई है और कोई भी फैसला व्यक्तिगत स्तर पर नहीं,बल्कि संगठनात्मक ढाँचे के भीतर ही लिया जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी के सांसद और कार्यकर्ता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एकजुट बने रहेंगे।

उधर,संजय राउत ने सामाजिक मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी कई पोस्ट साझा कर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि एक चार्टर्ड विमान नांदेड़ हवाई अड्डे पर उतरा और कथित रूप से दो सांसदों को लेकर रवाना हुआ। राउत ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जिन लोगों के पास कभी सामान्य साधनों से यात्रा करने की भी क्षमता नहीं थी,वे आज ठाकरे नाम और पार्टी की वजह से निजी विमानों में यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे सभी घटनाक्रमों का पूरा हिसाब रख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने मीडिया रिपोर्टों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे दिल्ली में उद्योग समिति की बैठक में शामिल होने गए हैं,लेकिन उनके बारे में अलग-अलग तरह की राजनीतिक कहानियाँ गढ़ी जा रही हैं। इसी तरह हिंगोली के सांसद नागेश अष्टेकर का भी बयान सामने आया,जिसमें उन्होंने कहा कि वह हिंगोली में ही मौजूद हैं और उनके बारे में फैलाई जा रही खबरें गलत हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि कुछ लोग उनके हस्ताक्षर तक फर्जी बना सकते हैं,इसलिए अफवाहों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

नागेश अष्टेकर ने यह भी कहा कि यदि किसी ने जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की,तो शिवसैनिक और आम जनता उसे माफ नहीं करेगी। उनका बयान ऐसे समय में आया है,जब पार्टी के भीतर संभावित टूट की अटकलें लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े घटनाक्रमों की साक्षी रही है। शिवसेना में पहले हुए विभाजन और उसके बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों ने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी थी। ऐसे में किसी भी नई राजनीतिक हलचल को बेहद गंभीरता से देखा जा रहा है। यही कारण है कि सांसदों के संभावित पाला बदलने की खबरों ने राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता का भी ध्यान आकर्षित किया है।

फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और किसी सांसद द्वारा आधिकारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की गई है,लेकिन संजय राउत और अन्य नेताओं के आरोपों ने यह संकेत जरूर दिया है कि शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व किसी संभावित राजनीतिक संकट को लेकर सतर्क है। आने वाले दिनों में यदि सांसदों की ओर से सार्वजनिक बयान सामने आते हैं या कोई राजनीतिक कदम उठाया जाता है,तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) का नेतृत्व अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा हुआ है,जबकि विपक्षी दलों पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या पार्टी अपने सभी सांसदों को साथ रखने में सफल रहती है या नहीं।