नई दिल्ली,17 जून (युआईटीवी)- राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले भारत सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत में प्लेटफॉर्म पर लगाए गए एक सप्ताह के प्रतिबंध से 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने परीक्षा से जुड़े कथित लीक और धोखाधड़ी वाले नेटवर्क के खिलाफ पहले ही व्यापक कार्रवाई की थी।
पावेल डुरोव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए भारत सरकार के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया क्योंकि कुछ उपयोगकर्ताओं पर नीट-यूजी पुनर्परीक्षा से पहले कथित रूप से लीक हुए प्रश्नपत्र और उससे संबंधित सामग्री साझा करने का आरोप था। डुरोव के अनुसार, इस प्रतिबंध का असर केवल उन कुछ चैनलों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि भारत में टेलीग्राम का उपयोग करने वाले 15 करोड़ से अधिक लोगों को इसका सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान टेलीग्राम ने सैकड़ों ऐसे चैनलों और समूहों के खिलाफ कार्रवाई की,जिन पर परीक्षा से जुड़ी कथित लीक सामग्री साझा करने या उससे संबंधित धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। कंपनी का कहना है कि उसने अपने प्लेटफॉर्म को गलत गतिविधियों से मुक्त रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए और संदिग्ध सामग्री को हटाने के लिए लगातार निगरानी की।
डुरोव ने अपने बयान में टेलीग्राम के एक महत्वपूर्ण फीचर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कंपनी संदेशों पर दिखाई देने वाले ‘एडिटेड’ यानी संपादित किए गए लेबल को और अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाने पर काम कर रही है। उनके अनुसार,कुछ मामलों में पुराने संदेशों को बाद में संपादित कर उनकी समय मुहर यानी टाइमस्टैम्प से जुड़ी गलतफहमियाँ पैदा की जाती हैं। इससे ऐसा प्रतीत कराया जा सकता है कि कोई सामग्री पहले से मौजूद थी,जबकि वास्तव में उसे बाद में बदला गया होता है। कंपनी का उद्देश्य इस प्रकार की संभावित धोखाधड़ी और सामग्री में हेरफेर को रोकना है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है,जब भारत सरकार नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरत रही है। 21 जून को आयोजित होने वाली पुनर्परीक्षा के मद्देनजर सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाए रखना बताया गया है।
नीट-यूजी देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसी परीक्षा के आधार पर देशभर के मेडिकल और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। लाखों छात्र हर वर्ष इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इस वर्ष 3 मई को आयोजित मूल परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे,जिसके बाद पुनर्परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी,जो नीट परीक्षा का आयोजन करती है,ने परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई सिफारिशें सरकार को भेजी थीं। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का मानना था कि परीक्षा से पहले डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रश्नपत्र या उससे जुड़ी अफवाहें फैलाए जाने की आशंका को पूरी तरह समाप्त करना आवश्यक है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार,केवल टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक ही नहीं लगाई गई,बल्कि कंपनी को अपने संदेश संपादन फीचर को भी 30 जून तक भारत में बंद रखने का निर्देश दिया गया है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि अतीत में इस फीचर का दुरुपयोग किया गया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने परीक्षा प्रश्नपत्र सार्वजनिक होने के बाद संदेशों को संपादित कर ऐसा दिखाने की कोशिश की कि प्रश्न पहले ही लीक हो चुके थे। इससे जाँच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी और भ्रम की स्थिति पैदा होती थी।
अधिकारियों का कहना है कि संदेश संपादन सुविधा का उपयोग सामान्य परिस्थितियों में उपयोगी होता है,लेकिन परीक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में इसका गलत इस्तेमाल भी संभव है। इसी कारण एहतियात के तौर पर इस फीचर को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्देश दिया गया। सरकार का मानना है कि इससे किसी भी प्रकार के फर्जी सबूत तैयार करने या परीक्षा से संबंधित भ्रामक जानकारी फैलाने की संभावना कम होगी।
सरकारी निर्देशों के पालन में प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों ने भी कदम उठाए हैं। गूगल और एप्पल ने अपने-अपने ऐप स्टोर से टेलीग्राम को अस्थायी रूप से हटा दिया है। इसका मतलब है कि नए उपयोगकर्ता फिलहाल आधिकारिक ऐप स्टोर के माध्यम से इस एप्लिकेशन को डाउनलोड नहीं कर सकते। हालाँकि,जिन लोगों के फोन में पहले से टेलीग्राम इंस्टॉल है,वे भी प्रतिबंध की अवधि के दौरान सेवाओं की सीमित उपलब्धता का सामना कर सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने डिजिटल स्वतंत्रता,ऑनलाइन सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। एक ओर सरकार का तर्क है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है,वहीं दूसरी ओर टेलीग्राम का कहना है कि उसने पहले ही संदिग्ध चैनलों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की थी और प्रतिबंध का असर करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं पर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आज सूचना के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में किसी भी बड़े मंच पर प्रतिबंध का असर केवल संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि आम उपयोगकर्ताओं,छात्रों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थाओं पर भी पड़ता है। यही कारण है कि टेलीग्राम और भारत सरकार के बीच यह मुद्दा तकनीकी और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल सभी की निगाहें नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा के सफल आयोजन पर टिकी हैं। सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का लक्ष्य परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है,जबकि टेलीग्राम अपनी ओर से सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह अस्थायी प्रतिबंध परीक्षा सुरक्षा के उद्देश्य को किस हद तक पूरा कर पाता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन से जुड़े नियमों पर इसका क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
