रोम,20 जून (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर की गई विवादित टिप्पणियों ने अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप के बयान के बाद इटली की राजनीतिक व्यवस्था में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों से लेकर विभिन्न दलों के नेताओं ने इसे केवल प्रधानमंत्री का नहीं,बल्कि पूरे इटली का अपमान बताया है। विवाद इतना बढ़ गया कि इटली के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री एंटोनियो तजानी ने अमेरिका की अपनी निर्धारित यात्रा तक रद्द कर दी।
यह पूरा मामला उस समय और गंभीर हो गया जब ट्रंप ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में दावा किया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। ट्रंप ने कहा कि मेलोनी उनके साथ फोटो लेना चाहती थीं और उन्होंने उनसे इसके लिए गुजारिश की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस टिप्पणी को इटली में अपमानजनक और अस्वीकार्य माना गया। इसके बाद राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
इटली के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री एंटोनियो तजानी ने सबसे कड़ा कदम उठाते हुए अपनी अमेरिका यात्रा रद्द करने की घोषणा की। उन्हें 21 और 22 जून को मियामी में आयोजित एक महत्वपूर्ण बिजनेस फोरम में हिस्सा लेना था,लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में उनकी यात्रा संभव नहीं है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में तजानी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्द न केवल उनके लिए,बल्कि पूरे इटली के लिए अपमानजनक हैं। उन्होंने कहा कि देश की गरिमा सर्वोपरि है और इसी कारण उन्होंने अपनी यात्रा रद्द करने का निर्णय लिया है।
तजानी के इस फैसले को इटली सरकार की ओर से एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम दिखाता है कि रोम ट्रंप की टिप्पणियों को हल्के में लेने के मूड में नहीं है और वह राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर एकजुट रुख अपनाना चाहता है।
इसी बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में अंडरसेक्रेटरी जियोवनबतिस्ता फजोलारी ने भी ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना यूरोपीय नेताओं के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की जा रही टिप्पणियों की एक और कड़ी है। उन्होंने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि ट्रंप जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं या फिर उनकी राजनीतिक विफलताओं का परिणाम है,लेकिन उनकी बयानबाजी अमेरिका और यूरोप के बीच दशकों पुराने रिश्तों को नुकसान पहुँचा रही है।
फजोलारी ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच मजबूत साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों पर आधारित रही है। ऐसे में सार्वजनिक मंचों पर सहयोगी देशों के नेताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ करना संबंधों को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रकार की बयानबाजी से यूरोप में अमेरिका की छवि प्रभावित हो रही है और इसका सबसे अधिक नुकसान स्वयं अमेरिका को उठाना पड़ सकता है।
इटली के राजनीतिक दलों में भी इस मुद्दे पर व्यापक एकजुटता देखने को मिली। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद और महासचिव लुइगी मैराटिन ने कहा कि यह मामला किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा का नहीं है,बल्कि राष्ट्रीय सम्मान का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि जब किसी मित्र देश का प्रमुख सार्वजनिक रूप से इटली के प्रधानमंत्री का अपमान करता है,तब पूरे राजनीतिक वर्ग को एकजुट होकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
मैराटिन ने अपने बयान में कहा कि चाहे राजनीतिक मतभेद कितने भी बड़े क्यों न हों,देश की गरिमा और सम्मान सर्वोपरि हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले में पूरा इटली उनके साथ खड़ा है। उनके बयान को विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच दुर्लभ राजनीतिक एकता के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,ट्रंप ने इटली के एक टेलीविजन कार्यक्रम में फोन पर दिए गए इंटरव्यू के दौरान मेलोनी को लेकर विवादित टिप्पणियाँ की थीं। उन्होंने कहा था कि मेलोनी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए उत्सुक थीं और उन्होंने इसके लिए उनसे अनुरोध किया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके लिए मेलोनी से बात करना कोई आवश्यक बात नहीं थी,लेकिन उन्होंने उनसे बातचीत की।
ट्रंप ने अपने इंटरव्यू में यूरोप की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों ने ऊर्जा और आव्रजन के मुद्दों पर गंभीर गलतियाँ की हैं। उनके अनुसार,यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो यूरोप का भविष्य प्रभावित हो सकता है। हालाँकि,इटली में ट्रंप की इन टिप्पणियों की तुलना में मेलोनी को लेकर दिए गए बयान पर अधिक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत बयान तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। इटली न केवल यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है,बल्कि नाटो और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी भी रहा है। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सार्वजनिक विवाद अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नई चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।
हालाँकि,अभी तक दोनों देशों की सरकारों ने किसी औपचारिक कूटनीतिक संकट की घोषणा नहीं की है,लेकिन इटली के विदेश मंत्री द्वारा अमेरिका यात्रा रद्द करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि रोम इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वाशिंगटन इस विवाद को शांत करने के लिए कोई कदम उठाता है या फिर बयानबाजी का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है।
फिलहाल इटली के राजनीतिक नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर वह एकजुट है। जॉर्जिया मेलोनी के समर्थन में सामने आए बयानों ने यह दिखा दिया है कि ट्रंप की टिप्पणियों को इटली में केवल राजनीतिक आलोचना नहीं,बल्कि देश की प्रतिष्ठा से जुड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और ट्रांस-अटलांटिक संबंधों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
