किंशासा,25 जून (युआईटीवी)- कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। देश में संक्रमण के मामलों और मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है,जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की चिंता बढ़ गई है। कांगो सरकार द्वारा जारी ताजा आँकड़ों के अनुसार देश में अब तक इबोला संक्रमण के 1,118 मामले सामने आ चुके हैं,जबकि 291 लोगों की मौत हो चुकी है। महामारी का केंद्र अभी भी देश का पूर्वी क्षेत्र बना हुआ है,जहाँ स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
कांगो के संचार एवं मीडिया मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट में बताया गया है कि संक्रमण से प्रभावित लोगों में से 122 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। वहीं 408 मरीजों का विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और उपचार इकाइयों में इलाज चल रहा है। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव होने के बावजूद चिकित्सा कर्मी लगातार मरीजों की देखभाल और संक्रमण की रोकथाम के लिए काम कर रहे हैं।
मंगलवार तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार इस प्रकोप में मृत्यु दर लगभग 26 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालाँकि,स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर उपचार और निगरानी की व्यवस्था मजबूत नहीं की गई,तो यह आँकड़ा और बढ़ सकता है। इबोला को दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है,क्योंकि यह तेजी से फैल सकती है और गंभीर मामलों में मौत का कारण बनती है।
महामारी की निगरानी और नियंत्रण के लिए सरकार ने व्यापक अभियान शुरू किया है। इस दौरान 138 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है,जिनकी जाँच और निगरानी की जा रही है। इसके अलावा संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य निगरानी के दायरे में लाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार संपर्क ट्रेसिंग की दर 77.1 प्रतिशत तक पहुँच गई है,जो महामारी नियंत्रण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
देश का पूर्वी इटुरी प्रांत अभी भी संक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। अधिकांश नए मामले इसी क्षेत्र से सामने आ रहे हैं। यहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी दबाव है और कई क्षेत्रों में चिकित्सा संसाधनों की कमी भी चुनौती बनी हुई है। इसके बावजूद सरकार और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियाँ मिलकर राहत और नियंत्रण कार्यों को तेज करने में जुटी हैं।
दूसरी ओर दक्षिण किवू प्रांत से कुछ राहत भरी खबर सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार 26 मई के बाद से इस क्षेत्र में संक्रमण का कोई नया मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालाँकि,स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि निगरानी अभी भी जारी रहेगी और किसी भी संभावित नए मामले पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। प्रभावित इलाकों में मरीजों की देखभाल, संक्रमण की रोकथाम और संपर्क में आए लोगों की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि अफ्रीका में इबोला के मामलों में वृद्धि चिंता का विषय है,लेकिन वर्तमान स्थिति में इस प्रकोप से उत्पन्न वैश्विक जोखिम अभी भी कम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण के फैलने की संभावना सीमित है,हालाँकि प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ्य आपातकालीन चेतावनी और प्रतिक्रिया संचालन विभाग के निदेशक अब्दिरहमान महमूद ने महामारी की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह इबोला प्रकोप के पहले महीने में दर्ज किए गए मामलों की सबसे बड़ी संख्या है। उनके अनुसार संक्रमण तेजी से फैला है,जिसके कारण स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिक्रिया तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह के दौरान उपचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महामारी की शुरुआत में जहाँ उपचार के लिए सीमित संख्या में बेड उपलब्ध थे,वहीं अब 19 स्वास्थ्य क्षेत्रों में 500 से अधिक बेड तैयार किए जा चुके हैं। इससे गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
प्रयोगशाला क्षमता में भी बड़ा विस्तार किया गया है। महामारी के शुरुआती चरण में राजधानी किंशासा में प्रतिदिन केवल लगभग 30 परीक्षण किए जा रहे थे। लेकिन अब इटुरी,उत्तरी किवू और दक्षिणी किवू प्रांतों में फैली आठ प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क तैयार किया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन 2,000 से अधिक परीक्षण किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर जाँच से संक्रमण के मामलों की शीघ्र पहचान और नियंत्रण में सहायता मिलेगी।
कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिकेदी ने भी इस संकट को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही इटुरी प्रांत का दौरा करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में जाकर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे तथा स्थानीय अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति का यह दौरा महामारी के खिलाफ चल रहे अभियान को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति त्शिकेदी ने यह घोषणा उस समय की जब उन्होंने किंशासा में बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरेस्ट नदाइशिमिये के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता की। बुरुंडी इस समय अफ्रीकी संघ की घूर्णनशील अध्यक्षता कर रहा है और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दोनों नेताओं ने महामारी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
संयुक्त प्रेस वार्ता से पहले दोनों राष्ट्रपतियों को राष्ट्रीय इबोला प्रतिक्रिया कार्य बल द्वारा महामारी की स्थिति और नियंत्रण उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान संक्रमण के प्रसार,उपचार क्षमता,निगरानी व्यवस्था और सीमावर्ती क्षेत्रों में उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई।
राष्ट्रपति त्शिकेदी ने इबोला के खिलाफ लड़ाई में क्षेत्रीय सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि संक्रमण को सीमित करने के लिए रोकथाम,महामारी विज्ञान निगरानी और त्वरित सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि केवल राष्ट्रीय स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे,बल्कि पड़ोसी देशों के साथ समन्वय भी जरूरी है।
बुरुंडी के राष्ट्रपति नदाइशिमिये ने भी इसी भावना को दोहराते हुए अफ्रीकी देशों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सीमाएँ बंद नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि महामारी से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका सहयोग,सूचना साझा करना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है,न कि लोगों और वस्तुओं की आवाजाही को पूरी तरह रोक देना।
विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला जैसी महामारी केवल स्वास्थ्य संकट नहीं होती,बल्कि इसका असर सामाजिक,आर्थिक और मानवीय स्तर पर भी पड़ता है। प्रभावित क्षेत्रों में व्यापार,शिक्षा और सामान्य जीवन प्रभावित हो जाता है। इसलिए महामारी नियंत्रण के साथ-साथ प्रभावित समुदायों को आर्थिक और सामाजिक सहायता प्रदान करना भी आवश्यक है।
फिलहाल कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और नए मामलों को रोकना है। सरकार,विश्व स्वास्थ्य संगठन और क्षेत्रीय साझेदार मिलकर इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। आने वाले सप्ताह महामारी नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि निगरानी,परीक्षण और उपचार की मौजूदा गति बरकरार रहती है,तो संक्रमण को सीमित करने में सफलता मिल सकती है। हालाँकि,स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और स्वास्थ्य अधिकारी लोगों से सतर्क रहने तथा सभी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील कर रहे हैं।
