अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की(तस्वीर क्रेडिट@omkarchaudhary)

यूक्रेन पर बदला ट्रंप का रुख? जेलेंस्की की जमकर तारीफ,कहा- हिम्मत से लड़ रहे हैं, नाटो प्रमुख ने भी सराहा कीव का प्रदर्शन

वाशिंगटन,25 जून (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को लेकर हाल के महीनों में अपने सबसे सकारात्मक और सराहनापूर्ण बयान दिए हैं। लंबे समय से यूक्रेन युद्ध को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाने वाले ट्रंप ने अब जेलेंस्की की दृढ़ता और यूक्रेनी सेना के संघर्ष की खुलकर प्रशंसा की है। व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ हुई बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन बेहद कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती से खड़ा हुआ है और उसके सैनिक असाधारण साहस का प्रदर्शन कर रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है,जब रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों को भारी मानवीय तथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। युद्ध के मैदान में लगातार बदलते हालात के बीच ट्रंप की यह टिप्पणी अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में विशेष महत्व रखती है,क्योंकि वह पहले कई बार यूक्रेन को दी जा रही अमेरिकी सहायता और युद्ध की रणनीति पर सवाल उठा चुके हैं।

व्हाइट हाउस में हुई बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि यूक्रेन इस संघर्ष में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यूक्रेन की स्थिति को किसी भी नजरिए से देखा जाए,वह उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यूक्रेन अभी भी अपनी स्थिति बनाए हुए है और लगातार दबाव के बावजूद लड़ाई जारी रखे हुए है।

ट्रंप ने युद्ध की भयावह मानवीय कीमत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दोनों पक्षों में बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और यह स्थिति चिंताजनक है। हालाँकि,उन्होंने यह भी माना कि यूक्रेन के सैनिकों ने जिस प्रकार से कठिन परिस्थितियों में लड़ाई जारी रखी है,वह उल्लेखनीय है। ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन के पास केवल आधुनिक सैन्य उपकरण ही नहीं हैं,बल्कि ऐसे सैनिक भी हैं,जो पूरी प्रतिबद्धता और साहस के साथ अपने देश की रक्षा कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनके और जेलेंस्की के संबंधों को लेकर अतीत में कई बार तनाव की खबरें सामने आती रही हैं,लेकिन इस बार ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यूक्रेनी नेतृत्व और सेना की सराहना करते हुए संकेत दिया कि वह युद्ध के मैदान में यूक्रेन के प्रदर्शन को गंभीरता से देख रहे हैं।

व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अगले महीने तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा करना था। इस सम्मेलन में यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक समर्थन,यूरोप की सामूहिक सुरक्षा और रक्षा उत्पादन बढ़ाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहने वाले हैं।

नाटो महासचिव मार्क रूटे ने भी यूक्रेन के प्रदर्शन की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच से छह महीनों के दौरान युद्ध क्षेत्र में यूक्रेन की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। रूटे के अनुसार इस सुधार के पीछे अमेरिकी सहायता और पश्चिमी देशों का समर्थन एक महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार आवश्यक सैन्य सहायता उपलब्ध करा रहा है और यही वजह है कि यूक्रेन रूसी सेना का मुकाबला करने में सक्षम बना हुआ है।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए रूटे ने अमेरिका की भूमिका को निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को हथियार,गोला-बारूद और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में अमेरिका की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूरोपीय और कनाडाई सहयोगी देशों ने भी वित्तीय और सैन्य सहयोग के माध्यम से इस प्रयास में योगदान दिया है।

रूटे ने ट्रंप की अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कई वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय नेतृत्व दिखाया है और उनकी भूमिका अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रही है। रूटे ने विशेष रूप से यूक्रेन और ईरान से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में अमेरिका ने महत्वपूर्ण दिशा प्रदान की है।

नाटो महासचिव ने कहा कि यूक्रेन को समर्थन देना केवल एक देश की मदद करने का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे यूरो-अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उनका मानना है कि यदि यूक्रेन कमजोर पड़ता है,तो इसका प्रभाव व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। इसलिए सहयोगी देशों का दायित्व है कि वे आवश्यक समर्थन जारी रखें।

बैठक के दौरान रक्षा उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विशेष चर्चा हुई। रूटे ने कहा कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए नाटो देशों को अपने रक्षा उद्योग को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों को इंटरसेप्टर मिसाइलों,उन्नत हथियार प्रणालियों,टैंकों,ड्रोन तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रक्षा प्रणालियों के उत्पादन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने पश्चिमी देशों को यह एहसास कराया है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के लिए पर्याप्त रक्षा उत्पादन क्षमता होना अत्यंत आवश्यक है। युद्ध के दौरान बड़ी मात्रा में हथियारों और गोला-बारूद की खपत हुई है, जिसके कारण कई देशों को अपने भंडार फिर से भरने की आवश्यकता महसूस हुई है।

नाटो के आगामी शिखर सम्मेलन में इसी मुद्दे पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सम्मेलन में सदस्य देशों द्वारा रक्षा खर्च बढ़ाने और सामूहिक सुरक्षा ढाँचे को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा। पिछले वर्ष हुए समझौते के अनुसार नाटो सदस्य देश वर्ष 2035 तक अपनी सकल घरेलू उत्पाद का पाँच प्रतिशत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र पर खर्च करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार यह लक्ष्य नाटो के इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा निवेश योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य केवल सैन्य क्षमता बढ़ाना नहीं,बल्कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों जैसे साइबर हमले,ड्रोन युद्ध,मिसाइल खतरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध प्रणालियों से निपटने की तैयारी करना भी है।

यूक्रेन को लेकर नाटो का रुख भी स्पष्ट बना हुआ है। संगठन के नेताओं ने बार-बार कहा है कि भविष्य में यदि रूस और यूक्रेन के बीच किसी प्रकार की शांति वार्ता होती है,तो उससे पहले यूक्रेन की स्थिति मजबूत होना जरूरी है। नाटो देशों का मानना है कि केवल मजबूत सैन्य स्थिति ही किसी भी संभावित वार्ता में यूक्रेन को बेहतर शर्तों पर बातचीत करने का अवसर दे सकती है।

इसी संदर्भ में ट्रंप और रूटे दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन को आवश्यक सहायता मिलती रहनी चाहिए। हालाँकि,दोनों नेताओं ने यह भी स्वीकार किया कि युद्ध का अंतिम लक्ष्य स्थायी शांति होना चाहिए। रूटे ने कहा कि नाटो का उद्देश्य संघर्ष को अनिश्चितकाल तक जारी रखना नहीं है,बल्कि ऐसी परिस्थितियाँ तैयार करना है,जिनसे स्थायी और न्यायपूर्ण शांति स्थापित की जा सके।

इस बीच ईरान का मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा रहा। नाटो नेताओं ने दोहराया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का यह साझा मत है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने चाहिए। उनका कहना है कि परमाणु प्रसार को रोकना वैश्विक सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इस दिशा में सहयोगी देशों को मिलकर काम करना होगा।

अंकारा में 7 और 8 जुलाई को होने वाला नाटो शिखर सम्मेलन कई महत्वपूर्ण फैसलों का मंच बन सकता है। यूक्रेन युद्ध, रक्षा खर्च,हथियार उत्पादन,यूरोपीय सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिति जैसे मुद्दे सम्मेलन के केंद्र में रहने वाले हैं। ऐसे में ट्रंप और रूटे की यह बैठक आगामी रणनीतिक चर्चाओं की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।

ट्रंप द्वारा जेलेंस्की और यूक्रेनी सैनिकों की सार्वजनिक प्रशंसा ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नीतियाँ किस दिशा में आगे बढ़ती हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यूक्रेन का मुद्दा नाटो और पश्चिमी देशों की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बना हुआ है और आने वाले समय में भी यह वैश्विक कूटनीति का प्रमुख विषय रहेगा।