सॉफ्टबैंक

ओपनएआई के संभावित आईपीओ में देरी की खबर से सॉफ्टबैंक को बड़ा झटका,शेयरों में 13 प्रतिशत की भारी गिरावट

नई दिल्ली,26 जून (युआईटीवी)- जापान की प्रमुख निवेश कंपनी सॉफ्टबैंक ग्रुप को शेयर बाजार में बड़ा झटका लगा है। टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के शेयरों में एक ही कारोबारी सत्र के दौरान लगभग 13 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पिछले तीन महीनों में सॉफ्टबैंक के शेयरों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट मानी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह वे रिपोर्ट्स हैं, जिनमें दावा किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी ओपनएआई का बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ तय समय से आगे बढ़ सकता है।

सॉफ्टबैंक ने पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती हुई प्रौद्योगिकी कंपनियों में बड़े स्तर पर निवेश किया है। इनमें ओपनएआई कंपनी उसका सबसे महत्वपूर्ण निवेश मानी जाती है। ऐसे में ओपनएआई के संभावित आईपीओ को लेकर बाजार में काफी समय से उत्साह बना हुआ था। निवेशकों को उम्मीद थी कि कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद सॉफ्टबैंक के निवेश का वास्तविक मूल्य सामने आएगा और इससे उसके बाजार मूल्यांकन को भी मजबूती मिलेगी। लेकिन अब आईपीओ में संभावित देरी की खबरों ने निवेशकों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार,ओपनएआई के सलाहकारों ने कंपनी को आगाह किया है कि वैश्विक तकनीकी शेयरों में लगातार बढ़ती अस्थिरता और उतार-चढ़ाव के कारण मौजूदा समय सार्वजनिक निर्गम के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं माना जा रहा है। यदि बाजार की स्थिति इसी तरह बनी रहती है तो निवेशकों की रुचि अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाएगी। इसी वजह से कंपनी अपने आईपीओ को अगले वर्ष तक टालने पर विचार कर सकती है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ओपनएआई का आईपीओ केवल एक कंपनी की लिस्टिंग नहीं है,बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटना होगी। दुनिया भर के निवेशकों की नजर इस आईपीओ पर टिकी हुई है,क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों का वास्तविक बाजार मूल्य कितना है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है,जिन्होंने ओपनएआई में बड़े स्तर पर निवेश किया है।

रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर तक सॉफ्टबैंक का ओपनएआई में कुल निवेश लगभग 65 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। यह निवेश सॉफ्टबैंक की अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक पहलों में शामिल है। कंपनी का मानना रहा है कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा और इसी सोच के तहत उसने इस क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ाया है।

हाल के महीनों में निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई थी कि ओपनएआई जल्द ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध होगी। इसी उम्मीद के चलते सॉफ्टबैंक के शेयरों में लगातार तेजी देखने को मिली थी। कंपनी का बाजार पूँजीकरण भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया था और एक समय वह जापान की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी टोयोटा मोटर के बाजार मूल्यांकन से भी आगे निकल गई थी,लेकिन आईपीओ में संभावित देरी की खबर सामने आते ही निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी,जिससे कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओपनएआई का आईपीओ सफलतापूर्वक पूरा होता है,तो सॉफ्टबैंक के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। इसके जरिए निवेशकों को पहली बार यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि कंपनी के सबसे बड़े निवेश की वास्तविक बाजार कीमत क्या है। वर्तमान में सॉफ्टबैंक का बड़ा निवेश निजी प्रौद्योगिकी कंपनियों में है, जिनका मूल्यांकन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में ओपनएआई की लिस्टिंग निवेशकों को कंपनी की कुल परिसंपत्तियों का बेहतर आकलन करने का अवसर प्रदान करेगी।

बाजार जानकारों का यह भी कहना है कि सॉफ्टबैंक के शेयरों में लंबे समय से एक प्रकार का मूल्यांकन छूट दिखाई देती रही है। इसकी प्रमुख वजह कंपनी के निजी निवेशों का स्पष्ट मूल्य सामने न आ पाना है। यदि ओपनएआई शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती है,तो यह अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो सकती है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भविष्य में सॉफ्टबैंक के शेयरों का मूल्यांकन अधिक मजबूत हो सकता है।

ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन के नेतृत्व में कंपनी ने हाल ही में अमेरिका के प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग के पास आईपीओ से जुड़े गोपनीय दस्तावेज जमा किए हैं। यह प्रक्रिया किसी भी कंपनी के सार्वजनिक निर्गम की दिशा में शुरुआती और महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है। हालाँकि,कंपनी ने अभी तक आईपीओ की संभावित तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार,ओपनएआई इस संभावित लिस्टिंग की तैयारी के लिए दुनिया की प्रमुख निवेश बैंकिंग कंपनियों गोल्डमैन सैश और मॉर्गन स्टेनली के साथ काम कर रही है। दोनों संस्थान आईपीओ की रणनीति,मूल्य निर्धारण और निवेशकों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कंपनी को सलाह दे रहे हैं। हालाँकि,बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।

वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय तकनीकी कंपनियों के शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में निवेश को लेकर निवेशकों का उत्साह बरकरार है,लेकिन बढ़ती ब्याज दरों,वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशक अधिक सतर्क रुख अपना रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी बड़े आईपीओ का समय तय करना कंपनियों के लिए आसान नहीं होता।

सॉफ्टबैंक लंबे समय से नई तकनीकों और भविष्य की संभावनाओं वाली कंपनियों में निवेश करने के लिए जाना जाता है। कंपनी ने कई स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को शुरुआती दौर में वित्तीय सहायता देकर उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ओपनएआई में उसका निवेश भी इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जाता है।

फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि ओपनएआई अपने आईपीओ को लेकर आगे क्या फैसला लेती है। यदि कंपनी बाजार की परिस्थितियों में सुधार का इंतजार करती है,तो सॉफ्टबैंक सहित उससे जुड़े निवेशकों को कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं यदि बाजार जल्द स्थिर होता है और आईपीओ निर्धारित समय पर आगे बढ़ता है,तो यह न केवल ओपनएआई बल्कि सॉफ्टबैंक के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। तब तक निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है और बाजार की हर नई जानकारी पर सॉफ्टबैंक के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।