फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के बीच गोलरहित ड्रॉ (तस्वीर क्रेडिट@Big71055006)

फीफा वर्ल्ड कप 2026: ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के बीच गोलरहित ड्रॉ,नॉकआउट में पहुँची ऑस्ट्रेलियाई टीम

सांता क्लारा,26 जून (युआईटीवी)- फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप डी में ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के बीच खेला गया मुकाबला बिना किसी गोल के 0-0 की बराबरी पर समाप्त हुआ। हालांकि मैच में कोई टीम गोल करने में सफल नहीं रही,लेकिन यह परिणाम ऑस्ट्रेलिया के लिए बेहद अहम साबित हुआ। इस ड्रॉ के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम ने ग्रुप डी में दूसरा स्थान हासिल करते हुए राउंड ऑफ 32 के लिए अपना टिकट पक्का कर लिया। दूसरी ओर पैराग्वे को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा और अब उसकी किस्मत टूर्नामेंट के अन्य ग्रुपों के परिणामों पर निर्भर करेगी। यदि वह तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ आठ टीमों में जगह बनाने में सफल रहती है,तभी उसे नॉकआउट चरण में खेलने का अवसर मिलेगा।

मुकाबले की शुरुआत से ही ऑस्ट्रेलिया ने आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया। टीम ने शुरुआती मिनटों में गेंद पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और लगातार पैराग्वे की रक्षापंक्ति पर दबाव बनाने की कोशिश की। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने तेज पासिंग और दोनों विंग का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए कई आक्रमण तैयार किए। विशेष रूप से दाएँ फ्लैंक पर जॉर्डन बोस,एडेन ओ’नील और क्रिस्टियन वोल्पाटो के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला। इन खिलाड़ियों ने कई बार पैराग्वे के डिफेंस को परेशान किया,लेकिन अंतिम क्षणों में गोल करने में सफलता नहीं मिल सकी।

मैच का पहला बड़ा अवसर चौथे मिनट में आया। क्रिस्टियन वोल्पाटो ने शानदार मूव बनाते हुए गेंद को कटबैक किया,जिस पर जैक्सन इरविन ने जोरदार शॉट लगाने की कोशिश की। हालाँकि,पैराग्वे के रक्षापंक्ति ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए इस खतरे को टाल दिया। शुरुआती मिनटों में मिले इस मौके ने यह साफ कर दिया कि ऑस्ट्रेलिया मुकाबले में जीत हासिल करने के इरादे से मैदान पर उतरा है।

पहले हाफ के दौरान ऑस्ट्रेलिया ने लगातार आक्रमण जारी रखा। टीम ने कई बार गेंद को विपक्षी पेनल्टी क्षेत्र तक पहुँचाया,लेकिन पैराग्वे का डिफेंस हर बार मजबूती से खड़ा दिखाई दिया। पैराग्वे के खिलाड़ियों ने अनुशासित रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया के लगभग हर हमले को विफल कर दिया। दोनों टीमों के बीच गेंद पर कब्जे की लड़ाई भी दिलचस्प रही,लेकिन ऑस्ट्रेलिया इस मामले में थोड़ा आगे नजर आया।

36वें मिनट में ऑस्ट्रेलिया को एक और अच्छा मौका मिला। जॉर्डी बोस ने शानदार दौड़ लगाते हुए गेंद को आगे बढ़ाया और टीम के लिए एक बेहतरीन अवसर बनाया। हालाँकि,अंतिम पास और फिनिशिंग में कमी के कारण यह मौका भी गोल में नहीं बदल सका। इसके बाद पहले हाफ के इंजरी टाइम में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर गोल करने की कोशिश की। विंग से आए शानदार क्रॉस पर जैक्सन इरविन ने हेडर लगाया,लेकिन वह संतुलन नहीं बना सके और गेंद गोल पोस्ट के बिल्कुल पास से बाहर निकल गई। यदि यह प्रयास सफल हो जाता,तो ऑस्ट्रेलिया पहले हाफ में बढ़त हासिल कर सकता था।

दूसरी ओर पैराग्वे पहले हाफ में ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सका। टीम ने सीमित अवसर बनाए और पूरे पहले हाफ में केवल एक शॉट ही गोल की दिशा में लगाया,जो लक्ष्य से बाहर चला गया। ऑस्ट्रेलिया के मजबूत दबाव और मिडफील्ड पर उसके नियंत्रण के कारण पैराग्वे को आक्रमण करने के पर्याप्त अवसर नहीं मिले। पहले 45 मिनट समाप्त होने तक दोनों टीमों के बीच मुकाबला 0-0 की बराबरी पर रहा।

दूसरे हाफ में मैच का स्वरूप कुछ बदला हुआ दिखाई दिया। पैराग्वे ने पहले हाफ की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक शुरुआत की और ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाने का प्रयास किया। टीम के युवा खिलाड़ी जूलियो एन्सिसो ने अपने शानदार खेल से मुकाबले की गति बदलने की कोशिश की। उन्होंने तेज दौड़ और सटीक पासों के जरिए कई बार ऑस्ट्रेलियाई रक्षापंक्ति को चुनौती दी। उनके प्रयासों से पैराग्वे के आक्रमण में नई ऊर्जा दिखाई दी और मैच पहले की तुलना में अधिक संतुलित हो गया।

हालाँकि,पैराग्वे के बढ़ते दबाव के बावजूद ऑस्ट्रेलिया का डिफेंस पूरी तरह सतर्क रहा। टीम के गोलकीपर ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार बचाव करते हुए विपक्षी टीम को बढ़त हासिल करने से रोक दिया। उनकी फुर्ती और सही समय पर लिए गए फैसलों ने ऑस्ट्रेलिया को मैच में बनाए रखा। डिफेंस और गोलकीपर के बेहतरीन तालमेल के कारण पैराग्वे के कई अच्छे आक्रमण भी बेअसर साबित हुए।

मैच के अंतिम चरण में दोनों टीमों ने ताजा खिलाड़ियों को मैदान पर उतारकर मुकाबले का परिणाम बदलने की कोशिश की। ऑस्ट्रेलिया की ओर से टेटे येंगी और पॉल ओकोन-एंगस्टलर को मैदान पर भेजा गया,ताकि आक्रमण को और धार मिल सके। इन खिलाड़ियों ने अपनी गति और ऊर्जा से विपक्षी डिफेंस पर दबाव बनाने की कोशिश की,लेकिन पैराग्वे की मजबूत रक्षापंक्ति ने उन्हें कोई स्पष्ट मौका नहीं दिया।

पैराग्वे ने भी अंतिम मिनटों में जीत के लिए पूरा जोर लगाया। टीम के खिलाड़ी मौरिसियो ने शानदार शॉट लगाकर गोल करने का प्रयास किया,लेकिन ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर ने बेहतरीन बचाव करते हुए गेंद को गोल में जाने से रोक दिया। यह मैच के सबसे महत्वपूर्ण बचावों में से एक था,जिसने ऑस्ट्रेलिया को हार से बचा लिया। इसके बाद दोनों टीमों ने कुछ और हमले किए,लेकिन किसी भी प्रयास का अंत गोल के रूप में नहीं हो सका।

निर्धारित समय समाप्त होने तक दोनों टीमों के बीच मुकाबला गोलरहित ड्रॉ पर खत्म हुआ। इस परिणाम से ऑस्ट्रेलिया को सबसे बड़ा फायदा मिला। टीम ने ग्रुप डी में दूसरा स्थान हासिल करते हुए राउंड ऑफ 32 में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली। अब ऑस्ट्रेलिया का सामना 4 जुलाई को डलास में ग्रुप जी की उपविजेता टीम से होगा। नॉकआउट चरण में टीम का लक्ष्य अपने अनुशासित खेल और मजबूत डिफेंस के दम पर आगे बढ़ना होगा।

दूसरी ओर पैराग्वे के लिए स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। टीम ग्रुप डी में तीसरे स्थान पर रही है और अब उसकी निगाहें अन्य ग्रुपों के मुकाबलों पर टिकी रहेंगी। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नए प्रारूप के अनुसार सभी ग्रुपों में तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ आठ टीमें भी राउंड ऑफ 32 में जगह बनाएँगी। ऐसे में पैराग्वे की उम्मीदें अभी जीवित हैं,लेकिन उसे अगले दौर में पहुँचने के लिए अन्य टीमों के प्रदर्शन पर निर्भर रहना पड़ेगा।

कुल मिलाकर यह मुकाबला गोलों से भले ही खाली रहा,लेकिन दोनों टीमों के डिफेंस, गोलकीपरों के शानदार प्रदर्शन और रणनीतिक खेल ने इसे रोमांचक बना दिया। ऑस्ट्रेलिया ने अपने लक्ष्य को हासिल करते हुए नॉकआउट चरण में प्रवेश कर लिया,जबकि पैराग्वे अब अगले दौर में पहुँचने की उम्मीद के साथ बाकी मुकाबलों के नतीजों का इंतजार करेगा।