केतन अग्रवाल और सिया गोयल (तस्वीर क्रेडिट@ag_Journalist)

केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़,सिया के भाई से 10 घंटे पूछताछ; बोला- पहले बताती तो शादी रद्द कर देते

पुणे,27 जून (युआईटीवी)- महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जाँच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल से पुलिस ने करीब 10 घंटे तक गहन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान साहिल ने जाँच अधिकारियों के सामने कई अहम बातें रखीं और कहा कि यदि उसकी बहन ने पहले ही परिवार को यह बता दिया होता कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती,तो परिवार स्वयं यह रिश्ता समाप्त कर देता। पुलिस अब साहिल के बयान के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं की जाँच कर रही है और यह जानने का प्रयास कर रही है कि परिवार को इस रिश्ते और आरोपियों के संबंधों के बारे में कितनी जानकारी थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार साहिल गोयल शुक्रवार सुबह पूछताछ के लिए जाँच टीम के सामने उपस्थित हुआ था। इसके बाद पूरे दिन उससे अलग-अलग पहलुओं पर सवाल-जवाब किए गए। देर शाम करीब 10 घंटे की पूछताछ के बाद उसे जाने की अनुमति दी गई। इस दौरान पुलिस ने उससे सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी के संबंधों,दोनों के बीच संपर्क,उनके व्यवहार,परिवार की जानकारी और घटना से पहले की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत पूछताछ की।

जाँच अधिकारियों के अनुसार साहिल ने पूछताछ के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सिया ने परिवार को यह बताया होता कि वह केतन अग्रवाल से विवाह नहीं करना चाहती या किसी अन्य व्यक्ति से संबंध में है,तो परिवार उस पर शादी के लिए कभी दबाव नहीं डालता। उसने कहा कि परिवार खुद ही यह रिश्ता समाप्त कर देता और ऐसी दुखद घटना कभी नहीं होती। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या परिवार को सिया और चेतन चौधरी के रिश्ते की पहले से कोई जानकारी थी या नहीं।

लोनावला ग्रामीण पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि साहिल गोयल को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। अधिकारी ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उससे कई घंटों तक विस्तार से पूछताछ की गई। हालाँकि,फिलहाल उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है और पूछताछ पूरी होने के बाद उसे जाने दिया गया। पुलिस का कहना है कि जाँच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर उसे दोबारा भी बुलाया जा सकता है।

पुलिस की अब तक की जाँच के अनुसार यह पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश का परिणाम था। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि 18 जून को लोनावला स्थित लोहगढ़ किले पर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की योजना को अंजाम दिया। आरोप है कि दोनों ने केतन को पहाड़ से धक्का देकर उसकी हत्या कर दी। शुरुआती जाँच में इस घटना को ट्रैकिंग के दौरान हुआ एक हादसा माना गया था,लेकिन बाद में सामने आए साक्ष्यों और जाँच के आधार पर पुलिस ने इसे पूर्व नियोजित हत्या की साजिश करार दिया।

जाँच एजेंसियों का मानना है कि सिया गोयल नवंबर में निर्धारित अपनी शादी से खुश नहीं थी और वह यह विवाह नहीं करना चाहती थी। पुलिस के अनुसार सिया और चेतन चौधरी के बीच प्रेम संबंध थे और दोनों इस रिश्ते में बाधा बन रहे केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाना चाहते थे। इसी उद्देश्य से कथित तौर पर हत्या की पूरी योजना बनाई गई और उसे अंजाम दिया गया।

मृतक केतन अग्रवाल एक प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से जुड़े थे। वह अपने परिवार की रियल एस्टेट कंपनी ‘सक्सेस ग्रुप’ में निदेशक और मुख्य विपणन अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। परिवार और व्यावसायिक जगत में उनकी एक सक्रिय और जिम्मेदार छवि मानी जाती थी। उनकी अचानक हुई मौत ने पहले सभी को स्तब्ध कर दिया था,क्योंकि शुरुआती जानकारी में इसे एक दुर्घटना बताया गया था। हालाँकि,बाद में पुलिस जाँच में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।

जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ी,पुलिस को कई ऐसे सुराग मिले जिन्होंने हत्या की आशंका को मजबूत किया। इसके बाद मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को मुख्य आरोपी बनाया गया। पुलिस अब दोनों के मोबाइल फोन,कॉल रिकॉर्ड,डिजिटल साक्ष्यों और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों की भी गहन जाँच कर रही है,ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने लाई जा सके।

यह मामला केवल पुणे या लोनावला तक सीमित नहीं रहा,बल्कि पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बन गया है। घटना की गंभीरता और इससे जुड़े तथ्यों ने समाज को भी झकझोर दिया है। मामले को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।

हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे पहुँचकर केतन अग्रवाल के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने मृतक के पिता से बातचीत करते हुए परिवार को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित न्याय सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी।

परिवार की माँग को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का निर्णय लिया है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। सरकार का मानना है कि विशेष अभियोजक की नियुक्ति और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई से मुकदमे की प्रक्रिया तेज होगी और पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को केवल एक आपराधिक मामला नहीं,बल्कि समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह सोचने की जरूरत है कि अच्छे परिवारों और शिक्षित युवाओं के बीच भी ऐसी आपराधिक मानसिकता और प्रतिशोध की भावना क्यों विकसित हो रही है। उनके अनुसार यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है,बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी है,जिस पर समाज को गंभीरता से विचार करना होगा।

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है। जाँच एजेंसियाँ सभी उपलब्ध साक्ष्यों,गवाहों के बयानों और डिजिटल प्रमाणों के आधार पर आरोपपत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। वहीं पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जाँच और त्वरित सुनवाई के जरिए दोषियों को जल्द सजा मिलेगी। आने वाले दिनों में जांच में और नए खुलासे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि पुलिस अभी भी कई पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है।