पुणे,30 जून (युआईटीवी)- पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। महाराष्ट्र की वडगांव मावल अदालत ने सोमवार को इस मामले के दो मुख्य आरोपियों सिया गोयल और चेतन बाबूलाल चौधरी की पुलिस हिरासत पाँच दिन के लिए और बढ़ा दी। पुलिस का कहना है कि हत्या की गुत्थी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जाँच अभी अधूरी है और आरोपियों से आगे भी गहन पूछताछ की आवश्यकता है। अदालत में पुलिस ने बताया कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने,घटनास्थल का दोबारा परीक्षण करने और डिजिटल तथा भौतिक सबूतों की पुष्टि करने के लिए आरोपियों की हिरासत जरूरी है।
दोनों आरोपियों को सोमवार को वडगांव मावल अदालत में पेश किया गया,क्योंकि उनकी पहले से मिली पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त हो गई थी। सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि जाँच अभी निर्णायक चरण में है और कई ऐसे तथ्य हैं जिनकी पुष्टि केवल आरोपियों की मौजूदगी में ही की जा सकती है। पुलिस ने कहा कि यदि इस समय आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाता है,तो जाँच की गति प्रभावित हो सकती है। अदालत ने पुलिस की दलीलों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत पाँच दिन के लिए बढ़ाने का आदेश दिया।
यह मामला 18 जून को पुणे जिले के प्रसिद्ध लोहगड़ किले पर हुई 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की मौत से जुड़ा है। शुरुआत में इस घटना को दुर्घटना माना गया था और माना गया था कि केतन की मौत लगभग 400 फीट गहरी खाई में गिरने से हुई है। हालाँकि,बाद में पुलिस जाँच के दौरान सामने आए तथ्यों ने मामले को पूरी तरह नया मोड़ दे दिया। जाँच एजेंसी का दावा है कि यह कोई हादसा नहीं था,बल्कि सुनियोजित हत्या थी,जिसमें सिया गोयल और चेतन बाबूलाल चौधरी की कथित भूमिका सामने आई है।
पुलिस ने अदालत में बताया कि मामले की जाँच के दौरान घटनास्थल का दोबारा पुनर्निर्माण करना आवश्यक है। इसके लिए आरोपियों की मौजूदगी जरूरी है,ताकि घटना के क्रम को विस्तार से समझा जा सके और विभिन्न परिस्थितियों की पुष्टि की जा सके। पुलिस का कहना है कि अपराध स्थल के पुनर्निर्माण से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि घटना किस प्रकार हुई और उस समय दोनों आरोपियों की भूमिका क्या थी।
जाँच एजेंसी के अनुसार,घटना के बाद चेतन बाबूलाल चौधरी की गतिविधियों की भी विस्तार से जाँच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित हत्या के बाद उसने किन लोगों से संपर्क किया,कहाँ-कहाँ गया और उसके मोबाइल फोन तथा अन्य डिजिटल उपकरणों में क्या जानकारी मौजूद है। इसके साथ ही हत्या के बाद हुई फोन बातचीत और अन्य संचार माध्यमों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में केतन अग्रवाल के पासपोर्ट को नष्ट किए जाने का पहलू भी जाँच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जाँचकर्ताओं के अनुसार,सिया गोयल ने कथित रूप से केतन का पासपोर्ट चुराकर उसे फाड़ दिया और बाद में जला दिया। पुलिस का दावा है कि यह घटना उस समय हुई जब परिवार मुंबई हवाई अड्डे की ओर जा रहा था,जहाँ से उन्हें बाली की प्री-वेडिंग यात्रा के लिए रवाना होना था।
जाँच एजेंसी का मानना है कि पासपोर्ट को कथित रूप से जानबूझकर नष्ट किया गया ताकि केतन अग्रवाल और सिया गोयल साथ में विदेश यात्रा न कर सकें। पुलिस के अनुसार,इस घटना से यह संकेत मिलता है कि दोनों के संबंधों में पहले से तनाव था और इसके पीछे कोई पूर्व नियोजित उद्देश्य हो सकता है। हालाँकि,इन दावों की अंतिम पुष्टि जाँच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में वाहन चालक का बयान भी दर्ज किया गया है। चालक ने अपने बयान में कहा कि यात्रा के दौरान सिया गोयल कुछ समय के लिए अकेले वाहन में वापस गई थीं और वहाँ से कुछ सामान लेकर लौटी थीं। जाँच अधिकारी इस बयान को भी अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मिलाकर जाँच रहे हैं,ताकि घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला स्पष्ट हो सके।
जाँच के दौरान पुलिस ने 28 जून को लोहगड़ किले पर डमी की सहायता से पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण भी किया। इस प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा कारणों से किले को कुछ समय के लिए आम लोगों के लिए बंद रखा गया था। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर विभिन्न परिस्थितियों का परीक्षण किया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना के क्रम को समझने का प्रयास किया। जाँच एजेंसी का कहना है कि इस अभ्यास से कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य तथ्यों की पुष्टि करने में मदद मिली है।
पुलिस का दावा है कि जाँच में दोनों आरोपियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों के भी महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। जाँच के अनुसार,पिछले छह महीनों में सिया गोयल और चेतन बाबूलाल चौधरी के बीच दो हजार से अधिक फोन कॉल हुए और दोनों ने लगभग 238 घंटे तक बातचीत की। पुलिस इन कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन बातचीतों का मामले से क्या संबंध है और क्या इनमें किसी कथित साजिश से जुड़े संकेत मौजूद हैं।
जाँच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि यह पहली बार नहीं था,जब केतन अग्रवाल को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी जब तीनों लोहगड़ किले पर गए थे,तब सिया गोयल ने कथित रूप से केतन को धक्का देने का प्रयास किया था। हालाँकि,उस समय केतन ने झाड़ी पकड़कर खुद को बचा लिया था। बाद में सिया ने कथित रूप से यह कहा था कि उसने सांप देखकर उसे बचाने की कोशिश की थी। अब पुलिस इस पुराने घटनाक्रम की भी जाँच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उस समय वास्तव में क्या हुआ था।
जाँच अधिकारी मामले के हर पहलू को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर परखने में जुटे हैं। डिजिटल रिकॉर्ड,कॉल डिटेल,घटनास्थल से मिले साक्ष्य,गवाहों के बयान और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जाँच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल अदालत द्वारा पुलिस हिरासत बढ़ाए जाने के बाद जाँच एजेंसी को मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। आने वाले दिनों में आरोपियों से विस्तृत पूछताछ,डिजिटल साक्ष्यों की जाँच,घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की पुष्टि और अन्य गवाहों के बयान इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। पूरे मामले पर अब सभी की नजरें जाँच एजेंसी की अगली कार्रवाई और अदालत में पेश किए जाने वाले नए साक्ष्यों पर टिकी हुई हैं।
