अयोध्या,30 जून (युआईटीवी)- अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जाँच लगातार तेज होती जा रही है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों को सोमवार को अयोध्या की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। इस बीच पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जाँच बाकी है। जाँच एजेंसी का कहना है कि वित्तीय लेनदेन,बैंक खातों,डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य संबंधित साक्ष्यों की विस्तृत जाँच की जा रही है,इसलिए आरोपियों का न्यायिक हिरासत में रहना आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा कि जाँच अभी पूरी नहीं हुई है और मामले के कई ऐसे पहलू हैं,जिनकी पुष्टि की जानी बाकी है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल जाँच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और नए तथ्यों के सामने आने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखना जाँच के हित में जरूरी है, ताकि साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका न रहे और जाँच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके।
इससे पहले पुलिस स्पष्ट कर चुकी थी कि शुरुआती दौर में वह आरोपियों की पुलिस हिरासत की माँग नहीं करेगी। जाँच एजेंसी का कहना है कि पहले सभी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का गहन अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद आरोपियों से पूछताछ के लिए विस्तृत प्रश्नावली तैयार की जाएगी। यदि जाँच के दौरान आवश्यकता महसूस हुई तो अदालत से पुलिस कस्टडी रिमांड की माँग की जाएगी,ताकि आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ कर कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
मामले की जाँच के तहत पुलिस ने विभिन्न बैंकों से भी महत्वपूर्ण जानकारी माँगी है। जाँच एजेंसी ने भारतीय स्टेट बैंक,बैंक ऑफ बड़ौदा,केनरा बैंक सहित लगभग छह बैंकों को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों के माध्यम से गिरफ्तार आरोपियों,श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों,लेनदेन,लॉकरों तथा वित्तीय गतिविधियों का पूरा विवरण माँगा गया है। पुलिस का मानना है कि बैंकिंग रिकॉर्ड से मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं,जिनसे कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
जाँच अधिकारियों के अनुसार,मामले का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि जाँच में लगभग 70 से 80 लोगों की भूमिका की जाँच की जा रही है। इनमें ट्रस्ट से जुड़े लोग,बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति तथा अन्य ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं,जिनका किसी न किसी रूप में मामले से संबंध रहा हो। पुलिस इन सभी लोगों को आवश्यकता के अनुसार नोटिस भेजेगी और उनके बयान दर्ज करेगी। जाँच के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि होने के बाद ही उसके संबंध में आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएँगे। अधिकारियों के अनुसार,वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी गहन जाँच की जा रही है,क्योंकि आज के समय में अधिकांश वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियाँ डिजिटल माध्यम से संचालित होती हैं।
इसी क्रम में जाँच एजेंसी ने सभी गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन फोरेंसिक साइंस लैब भेजने का निर्णय लिया है। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण चैट और डिजिटल संदेश हटा दिए हैं। अब विशेषज्ञ इन डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास करेंगे। जाँच एजेंसी का मानना है कि यदि हटाए गए संदेश और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड दोबारा प्राप्त हो जाते हैं,तो मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं और कथित लेनदेन या आपसी बातचीत की पुष्टि हो सकती है।
डिजिटल फोरेंसिक जाँच इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से मिलने वाली जानकारी यह स्पष्ट कर सकती है कि कथित घटनाक्रम के दौरान किन-किन लोगों के बीच संपर्क हुआ,किस प्रकार की बातचीत हुई और क्या कोई ऐसा डिजिटल साक्ष्य मौजूद है,जो जाँच को नई दिशा दे सके।
जाँच के दौरान पुलिस की एक टीम अयोध्या के नया घाट स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा भी पहुँचीं। इसी शाखा में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का प्रमुख बैंक खाता संचालित होता है। जाँच एजेंसी ने बैंक अधिकारियों से प्रारंभिक जानकारी प्राप्त की और संबंधित रिकॉर्ड का अध्ययन किया। सूत्रों के अनुसार,पुलिस शाखा प्रबंधक से भी पूछताछ कर सकती है और आवश्यकता पड़ने पर उनका बयान आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाएगा।
जाँच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया था या नहीं। यदि जाँच में किसी स्तर पर बैंक अधिकारियों की भूमिका सामने आती है,तो उससे जुड़े तथ्यों की भी स्वतंत्र रूप से जाँच की जाएगी। हालाँकि,अभी तक इस संबंध में किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया है और जाँच जारी है।
इस बीच इस पूरे मामले ने न्यायिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन की अदालत की निगरानी में जाँच तथा फोरेंसिक ऑडिट की माँग करने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालाँकि,इसका अर्थ यह नहीं है कि याचिका समाप्त हो गई है,बल्कि तत्काल सुनवाई की माँग स्वीकार नहीं की गई। इस घटनाक्रम के बाद अब मामले की नियमित न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में वित्तीय रिकॉर्ड,बैंकिंग दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और संबंधित व्यक्तियों के बयान जाँच के सबसे महत्वपूर्ण आधार होते हैं। यदि जाँच एजेंसियाँ सभी दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करती हैं,तो मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने में आसानी होगी। वहीं किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले जाँच पूरी होना और न्यायालय की प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।
फिलहाल इस मामले में जांच कई स्तरों पर एक साथ चल रही है। बैंक खातों की पड़ताल, डिजिटल साक्ष्यों की जाँच,संबंधित लोगों के बयान और वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण जारी है। पुलिस का कहना है कि यदि आगे की जाँच में आरोपियों से गहन पूछताछ की आवश्यकता महसूस हुई,तो अदालत से पुलिस कस्टडी रिमांड की माँग की जाएगी। अभी सभी आठों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और उन्हें 13 जुलाई को दोबारा अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। आने वाले दिनों में जाँच की दिशा और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
