भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

भारत के साथ बड़ी बोइंग डील के करीब अमेरिका,राष्ट्रपति ट्रंप खुद कर रहे हैं आर्थिक साझेदारी की निगरानी: सर्जियो गोर

वाशिंगटन,30 जून (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी लगातार नए आयाम हासिल कर रही है। इसी क्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच एक बड़ी बोइंग विमान खरीद समझौता अंतिम चरण में पहुँच चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं और इस संभावित समझौते को सफल बनाने में व्यक्तिगत रुचि ले रहे हैं। उनके अनुसार,यह सौदा केवल एक व्यावसायिक समझौता नहीं होगा,बल्कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक तथा आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण प्रतीक भी बनेगा।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया बातचीत में बोइंग से जुड़ा मुद्दा प्रमुख विषयों में शामिल रहा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं है,बल्कि ऐसी दीर्घकालिक साझेदारी तैयार करना है,जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को नई गति दे सके।

सम्मेलन के दौरान बोइंग में सरकारी संचालन,वैश्विक सार्वजनिक नीति और कॉरपोरेट रणनीति के कार्यकारी उपाध्यक्ष जेफ शॉकी के साथ बातचीत में सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका बोइंग को केवल एक विमान निर्माता कंपनी के रूप में नहीं देखता,बल्कि उसे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि दुनिया के देश सबसे सुरक्षित,आधुनिक और कुशल विमान खरीदें और इस दिशा में भारत के साथ सहयोग को और मजबूत किया जाए।

सर्जियो गोर ने कहा कि भारत के साथ प्रस्तावित नया समझौता अपने अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष इसे जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सौदा दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा। उनके अनुसार,अमेरिका इस समझौते को केवल व्यापारिक दृष्टि से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देख रहा है।

राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं इस प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं और भारत के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाने के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हाल की बैठक के दौरान भी बोइंग से जुड़ा विषय सामने आया था और दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई थी। गोर ने कहा कि दोनों सरकारें इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक हैं और उम्मीद है कि जल्द ही इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं,बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक आर्थिक साझेदार के रूप में देखता है। उनके अनुसार,वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और अमेरिका इस परिवर्तन का सक्रिय भागीदार बनना चाहता है।

सर्जियो गोर ने कहा कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत का उदय हो चुका है और अब दुनिया उसे एक प्रमुख आर्थिक,तकनीकी और औद्योगिक केंद्र के रूप में देख रही है। ऐसे में अमेरिका का उद्देश्य भारत के साथ सभी प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक गहरा करना है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता,उन्नत प्रौद्योगिकी,विमानन,रक्षा,ऊर्जा,विनिर्माण और नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के पास साथ मिलकर काम करने की अपार संभावनाएँ हैं। उनके अनुसार,भारत और अमेरिका की क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि इनका प्रभावी उपयोग किया जाए,तो दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

राजदूत ने अपने भारत में कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल औपचारिक कार्यक्रमों और राजनयिक आयोजनों में भाग लेना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह भारत इसीलिए आए हैं ताकि दोनों देशों के बीच आर्थिक,औद्योगिक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी जा सके। उनके अनुसार,यह साझेदारी दोनों देशों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने निवेश के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस वर्ष अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर का नया निवेश आकर्षित किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत में अमेरिकी मिशन दुनिया भर के सभी अमेरिकी दूतावासों में निवेश आकर्षित करने के मामले में पहले स्थान पर पहुँच गया है।

सर्जियो गोर ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय कंपनियाँ और निवेशक अमेरिका में अवसरों को लेकर पहले से अधिक विश्वास जता रहे हैं। साथ ही यह भी साबित होता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल अमेरिकी दूतावास की नहीं,बल्कि भारत और अमेरिका के बीच विकसित हुए पारस्परिक विश्वास का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि जब अमेरिकी कंपनियाँ भारत में निवेश की संभावनाओं का आकलन करती हैं,तो उनके मन में कई स्वाभाविक प्रश्न होते हैं। वे जानना चाहती हैं कि क्या भारत में निवेश सुरक्षित रहेगा, क्या उनकी बौद्धिक संपदा की रक्षा होगी,क्या कानून और नीतियाँ स्थिर रहेंगी तथा क्या कर व्यवस्था पारदर्शी और भरोसेमंद है।

बोइंग का उल्लेख करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि यह कंपनी भारत में सबसे बड़े अमेरिकी निवेशकों और निर्यातकों में शामिल है। कंपनी का योगदान केवल वाणिज्यिक विमानन तक सीमित नहीं है,बल्कि रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भी उसका भारत के साथ व्यापक सहयोग है।

भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है। घरेलू हवाई यात्रा में लगातार वृद्धि,नए हवाई अड्डों का निर्माण और क्षेत्रीय संपर्क योजनाओं के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में हजारों नए विमानों की आवश्यकता होने का अनुमान है। ऐसे में बोइंग जैसी वैश्विक विमान निर्माता कंपनियों के लिए भारत अत्यंत महत्वपूर्ण बाजार बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित बोइंग समझौता अंतिम रूप लेता है,तो इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही विमानन क्षेत्र में तकनीकी सहयोग,रखरखाव सेवाओं,प्रशिक्षण, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे।

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा,तकनीक,ऊर्जा,महत्वपूर्ण खनिज,डिजिटल नवाचार और औद्योगिक सहयोग पहले से ही तेजी से बढ़ रहे हैं। अब वाणिज्यिक सहयोग भी इस रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है। दोनों सरकारों ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को कम करने,निवेश को प्रोत्साहित करने,औद्योगिक सहयोग बढ़ाने और नई तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। बोइंग जैसी बड़ी परियोजनाएँ इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

सर्जियो गोर के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रखना चाहता,बल्कि उन्हें आने वाले दशकों तक मजबूत आधार देना चाहता है। यदि प्रस्तावित बोइंग समझौता तय समय पर पूरा होता है,तो यह न केवल विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा,बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ते विश्वास,साझा आर्थिक दृष्टि और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर उभरेगा।