मुंबई,1 जुलाई (युआईटीवी)- अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। इस मामले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार, जांच एजेंसियों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जाँच एजेंसियों ने अब तक केवल छोटे स्तर के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है,जबकि जिन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं,उन्हें जाँच के दायरे में लाकर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जाँच नहीं हुई,तो यह केवल न्याय व्यवस्था पर ही नहीं,बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर भी प्रश्नचिह्न होगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि यदि जाँच एजेंसियाँ वास्तव में निष्पक्ष तरीके से काम कर रही हैं,तो उन्हें उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए,जिनके नाम इस पूरे मामले में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले चंपत राय को गिरफ्तार किया जाए। इसके अलावा अनिल मिश्रा,गोपाल राय और उन सभी लोगों को भी गिरफ्तार किया जाए,जिन्होंने जमीन खरीदी और बाद में उसे राम मंदिर ट्रस्ट को बेचा। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या के महापौर को भी जाँच के दायरे में लाकर कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार अब तक केवल छोटे लोगों को निशाना बनाया गया है, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में राम मंदिर के नाम पर भारी अनियमितताएँ हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक गड़बड़ी का मामला नहीं है, बल्कि भगवान राम की आस्था से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार जिन लोगों ने कथित तौर पर राम मंदिर के नाम पर गलत तरीके से लाभ उठाया,उन्होंने भगवान राम के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने इसे ‘राम द्रोह’ बताते हुए कहा कि यह देश के खिलाफ सबसे बड़ा देशद्रोह भी है,क्योंकि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं,बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार के आरोप किसी अन्य संगठन या विपक्षी दल से जुड़े लोगों पर लगे होते,तो भाजपा देशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा कर देती और हिंदुत्व के खतरे में होने का दावा करती। उन्होंने सवाल किया कि जब आरोप राम मंदिर से जुड़े लोगों पर लग रहे हैं,तो अब हिंदुत्व की रक्षा की बात क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या अब यही हिंदुत्व की नई परिभाषा है और क्या इसे ही हिंदुत्व की सफलता माना जाएगा।
संजय राउत ने इस पूरे मामले की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी माँग की। उनका कहना है कि जब मामला करोड़ों लोगों की आस्था और सार्वजनिक धन से जुड़ा है,तो जाँच रिपोर्ट को गोपनीय रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि जाँच में क्या तथ्य सामने आए हैं,किन लोगों की भूमिका पाई गई है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार पारदर्शिता ही इस विवाद को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि राम मंदिर ट्रस्ट में कथित भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए कोई नई समिति गठित की जाती है,तो उसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के एक-एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि राम मंदिर किसी एक राजनीतिक दल या संगठन की संपत्ति नहीं है,बल्कि पूरे देश की आस्था का केंद्र है। इसलिए उसकी जाँच भी निष्पक्ष,पारदर्शी और सभी पक्षों की भागीदारी के साथ होनी चाहिए,ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक पक्षपात का आरोप न लगे।
संजय राउत ने कहा कि यह केवल किसी संस्था या ट्रस्ट का मामला नहीं है,बल्कि देश की जनता के विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मंदिर के नाम पर किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है,तो यह सीधे-सीधे देश की जनता और राम भक्तों के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी व्यक्ति को उसके पद,प्रभाव या राजनीतिक संबंधों के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जाँच नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं,बल्कि जनआस्था और जवाबदेही के प्रश्न के रूप में देखती है। इसलिए जब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती,तब तक उनकी पार्टी इस विषय को लगातार उठाती रहेगी।
राम मंदिर से जुड़े इस विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। एक ओर विपक्ष निष्पक्ष जाँच,एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने और कथित रूप से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहा है,वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जाँच एजेंसियाँ इस मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं और सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का किस तरह जवाब देती है।
