नई दिल्ली,1 जुलाई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार शाम ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति,क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की शांति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और संघर्ष को समाप्त करने के लिए सहमति बनने के बाद क्षेत्र में स्थिरता कायम रखने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष समाप्त करने की दिशा में बनी सहमति का स्वागत किया और कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों को लगातार संवाद और कूटनीतिक प्रयास जारी रखने चाहिए।
बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम,संघर्ष के बाद की स्थिति और आगे की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने क्षेत्र में चल रहे राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी प्रयासों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ओर से स्पष्ट किया कि देश का हमेशा से यही मानना रहा है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान युद्ध या सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत, आपसी विश्वास और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि संवाद ही ऐसा माध्यम है,जो लंबे समय तक शांति और स्थिरता की नींव रख सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि पश्चिम एशिया में स्थिरता केवल क्षेत्रीय देशों के लिए ही नहीं,बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ है। यदि समुद्री परिवहन प्रभावित होता है तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला,ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक है कि समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहें और जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता रहा है। भारत के ईरान,सऊदी अरब,संयुक्त अरब अमीरात,इज़राइल और अन्य खाड़ी देशों के साथ मजबूत संबंध हैं। यही कारण है कि भारत लगातार सभी पक्षों से संयम बरतने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी बातचीत में यही संदेश दोहराया कि किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल संबंधित देशों बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक समुदाय के हितों को प्रभावित करता है।
यह पहली बार नहीं है,जब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई हो। इससे पहले 21 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। उस समय क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी हालात और बढ़ते तनाव पर विस्तार से चर्चा की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उस बातचीत में क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी देश के आवश्यक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना चिंता का विषय है और इससे आम नागरिकों के जीवन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियाँ भी प्रभावित होती हैं।
21 मार्च की बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। हिंद महासागर,अरब सागर और फारस की खाड़ी जैसे समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षित नौवहन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। भारत ने हमेशा इस बात का समर्थन किया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन हो और समुद्री मार्गों पर किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न न होने दिया जाए।
इससे पहले 12 मार्च को भी प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी नेतृत्व के बीच बातचीत हुई थी। उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि लगातार बढ़ रहे संघर्ष के कारण निर्दोष नागरिकों की जान गई है और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है। उन्होंने उस समय भी सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की अपील की थी। भारत का यह रुख लगातार बना हुआ है कि हिंसा की बजाय संवाद और कूटनीति ही किसी भी संकट का सबसे प्रभावी समाधान है।
भारत और ईरान के संबंध केवल राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक,व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है। इसी सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक चाबहार बंदरगाह को माना जाता है। यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय संपर्क नीति और मध्य एशिया तक पहुँच की रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
पिछले महीने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान की साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण बताया था। उन्होंने कहा था कि इस परियोजना ने दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है और भविष्य में इसका महत्व और बढ़ेगा।
सैयद अब्बास अराघची ने कहा था कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकेसस और यूरोप तक पहुँचने का सुनहरा द्वार साबित होगा। उनके अनुसार यह केवल भारत और ईरान के लिए ही नहीं,बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी हिंद महासागर तक पहुँचने का एक महत्वपूर्ण मार्ग बनेगा। उन्होंने कहा कि इस बंदरगाह की रणनीतिक स्थिति इसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो सकी है। इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि भारत इस परियोजना में अपनी भूमिका जारी रखेगा और चाबहार बंदरगाह का विकास भविष्य में दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से न केवल व्यापार बढ़ेगा,बल्कि क्षेत्रीय संपर्क को भी नई दिशा मिलेगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक स्तर पर सकारात्मक छवि है और वह शांति,कूटनीति तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के फारस की खाड़ी के लगभग सभी देशों के साथ अच्छे और संतुलित संबंध हैं,इसलिए क्षेत्र में किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक पहल में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। ईरान भारत के ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करता है,जो पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति को मजबूत करें।
भारत की विदेश नीति लंबे समय से रणनीतिक संतुलन,संवाद और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित रही है। पश्चिम एशिया में भी भारत ने हमेशा सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखते हुए किसी भी विवाद के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच हुई ताजा बातचीत इसी नीति का विस्तार मानी जा रही है। इस संवाद से यह संकेत भी मिलता है कि भारत क्षेत्र में शांति, स्थिरता,समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देता है तथा भविष्य में भी कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से पश्चिम एशिया में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
