पेरू में केको फुजीमोरी की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

पेरू में केको फुजीमोरी की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई,भारत-पेरू संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की जताई उम्मीद

नई दिल्ली/लीमा,4 जुलाई (युआईटीवी)- पेरू के राष्ट्रपति चुनाव में लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद आखिरकार केको फुजीमोरी ने जीत हासिल कर देश की नई राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त किया है। लगातार तीन चुनावी हार के बाद चौथे प्रयास में मिली इस जीत को न केवल पेरू की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है,बल्कि इसे पूरे लैटिन अमेरिका में बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केको फुजीमोरी को उनकी जीत पर हार्दिक बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में केको फुजीमोरी को राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भारत पेरू के साथ अपनी घनिष्ठ मित्रता को अत्यंत महत्व देता है और दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि वह केको फुजीमोरी के सफल कार्यकाल की कामना करते हैं और दोनों देशों के लोगों के हित में भारत-पेरू संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की आशा रखते हैं।

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब पेरू में लंबे समय तक चले चुनावी विवाद और मतगणना प्रक्रिया के बाद आखिरकार आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम घोषित किया गया। केको फुजीमोरी ने बेहद कांटे की टक्कर में अपने प्रतिद्वंद्वी वामपंथी उम्मीदवार रोबर्टो सांचेज को मामूली अंतर से हराया। इस चुनाव को पेरू के हालिया इतिहास का सबसे करीबी मुकाबला माना जा रहा है।

पेरू की समाचार एजेंसी एंडियाना के अनुसार,सात जून को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण,यानी रनऑफ मतदान में दोनों उम्मीदवारों के बीच बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अंतिम परिणामों के अनुसार,कुल 1.8 करोड़ से अधिक मतों में से केको फुजीमोरी ने 50 हजार से भी कम मतों के अंतर से जीत दर्ज की। उनकी पार्टी फुएरजा पॉपुलर को 50.135 प्रतिशत मत प्राप्त हुए,जबकि रोबर्टो सांचेज की टुगैदर फॉर पेरू पार्टी को 49.865 प्रतिशत वोट मिले। इतने कम अंतर के कारण चुनाव परिणाम को लेकर लंबे समय तक संशय की स्थिति बनी रही।

मतदान के बाद बड़ी संख्या में विवादित मतपत्रों की समीक्षा की गई। पेरू की राष्ट्रीय निर्वाचन जूरी,जिसे ज्यूराडो नैशनल डी एलेक्शन्स कहा जाता है,ने कई सप्ताह तक शिकायतों और आपत्तियों की जाँच की। सभी कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद तीन जुलाई को केको फुजीमोरी को आधिकारिक तौर पर चुनाव का विजेता घोषित किया गया। इसके साथ ही पेरू में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।

आधिकारिक घोषणा के बाद केको फुजीमोरी ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स के माध्यम से जनता के नाम संदेश जारी किया। उन्होंने उन लाखों मतदाताओं का आभार व्यक्त किया,जिन्होंने उन पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी होने और राष्ट्रीय निर्वाचन जूरी द्वारा परिणामों की आधिकारिक घोषणा के बाद वह उन सभी नागरिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करती हैं,जिन्होंने उन्हें अपना समर्थन दिया।

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि अब पेरू के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह इस जिम्मेदारी को पूरी विनम्रता,ईमानदारी और कर्तव्यबोध के साथ निभाएँगी। उनके अनुसार आने वाले दिनों में उनकी प्राथमिकता देशवासियों की बात सुनना,सभी वर्गों के साथ संवाद स्थापित करना और नई सरकार की प्रभावी शुरुआत के लिए पूरी तैयारी करना होगी।

केको फुजीमोरी ने यह भी संकेत दिया कि उनकी सरकार जनता के साथ लगातार संवाद बनाए रखने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से सरकार की तैयारियों,नीतियों और कार्यों की जानकारी नियमित रूप से साझा की जाएगी,ताकि नागरिकों को सरकार की गतिविधियों की पारदर्शी जानकारी मिलती रहे। उन्होंने लोगों से इस नई यात्रा में साथ जुड़ने की अपील भी की।

केको फुजीमोरी की यह जीत कई मायनों में विशेष मानी जा रही है। वह इससे पहले लगातार तीन बार राष्ट्रपति चुनाव हार चुकी थीं। प्रत्येक चुनाव में उन्हें अंतिम चरण तक पहुँचने के बावजूद सफलता नहीं मिल सकी थी। इस बार भी मुकाबला बेहद कठिन था, लेकिन अंततः उन्होंने बेहद कम अंतर से जीत दर्ज कर अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष का अंत किया।

वह पेरू के दिवंगत राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की पुत्री हैं। अल्बर्टो फुजीमोरी का शासन पेरू के इतिहास में अत्यंत प्रभावशाली होने के साथ-साथ विवादास्पद भी माना जाता है। उनके समर्थक उन्हें आतंकवाद और आर्थिक संकट से देश को बाहर निकालने वाला मजबूत नेता बताते हैं,जबकि आलोचक उनके शासनकाल में मानवाधिकार उल्लंघन और सत्ता के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल उठाते रहे हैं।

इसी कारण केको फुजीमोरी का राजनीतिक सफर भी हमेशा आसान नहीं रहा। उनके विरोधियों ने कई बार उनके पिता के शासनकाल को चुनावी मुद्दा बनाया। पेरू के अनेक मतदाता आज भी अल्बर्टो फुजीमोरी के शासन की कड़वी यादों को भूल नहीं पाए हैं। यही वजह रही कि केको को तीन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। हालाँकि,इस बार उन्होंने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया और खुद को अधिक संतुलित तथा संवादपरक नेता के रूप में प्रस्तुत किया।

चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने व्यवस्था बहाल करने, अपराध पर कठोर नियंत्रण स्थापित करने और आर्थिक स्थिरता लाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि पेरू को राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते अपराध के दौर से बाहर निकालना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनकी सरकार सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।

पिछले कुछ वर्षों में पेरू गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। एंडीज क्षेत्र में स्थित इस देश में पिछले दस वर्षों के दौरान आठ राष्ट्रपति बदल चुके हैं। लगातार सरकारों के बदलने से प्रशासनिक अस्थिरता बढ़ी और जनता का राजनीतिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ। कई बार राष्ट्रपति और संसद के बीच टकराव की स्थिति बनी,जिससे शासन व्यवस्था प्रभावित हुई।

इसके साथ ही देश में अपराध भी लगातार बढ़ा है। जबरन वसूली करने वाले गिरोहों की गतिविधियों में वृद्धि, सुपारी देकर कराई जाने वाली हत्याओं और संगठित अपराध के विस्तार ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी लीमा सहित कई शहरों में सुरक्षा को लेकर लोगों में असंतोष देखा गया। यही कारण रहा कि चुनाव प्रचार के दौरान कानून व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा।

हाल के महीनों में बड़ी संख्या में युवा भी सड़कों पर उतरकर राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन करते दिखाई दिए। विशेष रूप से नई पीढ़ी ने भ्रष्टाचार,बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। ऐसे माहौल में चुनाव केवल सरकार बदलने का नहीं,बल्कि व्यवस्था में व्यापक सुधार की उम्मीद का भी प्रतीक बन गया।

केको फुजीमोरी ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने पिता की तरह मजबूत प्रशासन देने का वादा किया,लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं का सम्मान करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने अपनी सार्वजनिक छवि को पहले की तुलना में अधिक संतुलित और नरम बनाने का प्रयास किया,जिससे उन्हें उन मतदाताओं का भी समर्थन मिला जो पहले उनसे दूरी बनाए हुए थे।

उनकी जीत को लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी राजनीति के पुनरुत्थान के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के कई देशों में राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं,जहाँ मतदाता आर्थिक चुनौतियों, अपराध और शासन से जुड़े मुद्दों के आधार पर नए नेतृत्व को चुन रहे हैं। पेरू का चुनाव भी इसी व्यापक राजनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।

भारत और पेरू के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। व्यापार,खनन,कृषि,औषधि,सूचना प्रौद्योगिकी,ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत पेरू को लैटिन अमेरिका में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है,जबकि पेरू भी भारतीय निवेश और तकनीकी सहयोग में रुचि रखता है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारतीय कंपनियाँ पेरू के खनन,ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं,जबकि पेरू से भारत को तांबा,सोना और अन्य खनिजों का निर्यात होता है। इसके अलावा स्वास्थ्य,डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की नई संभावनाएँ लगातार विकसित हो रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केको फुजीमोरी को भेजा गया बधाई संदेश इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारत नई सरकार के साथ अपने संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने का इच्छुक है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक,तकनीकी और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि केको फुजीमोरी अपनी चुनावी घोषणाओं को किस प्रकार अमल में लाती हैं। उनके सामने राजनीतिक स्थिरता बहाल करने,अपराध पर नियंत्रण पाने,अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और जनता का विश्वास जीतने जैसी कई बड़ी चुनौतियां होंगी। वहीं भारत सहित कई देशों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पेरू वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करेगा।