प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@EricS2075)

भारत को इजरायल का मजबूत मित्र बताया,बेंजामिन नेतन्याहू बोले- 140 करोड़ लोगों के देश से मिलता है जबरदस्त समर्थन

वाशिंगटन,6 जुलाई (युआईटीवी)- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को अपने देश का एक मजबूत और भरोसेमंद मित्र बताते हुए कहा है कि दुनिया में इजरायल के कई ऐसे सहयोगी हैं,जो विभिन्न क्षेत्रों में उसके साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान से भी असहमति जताई,जिसमें कहा गया था कि इस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इजरायल के एकमात्र सहयोगी हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप निश्चित रूप से व्हाइट हाउस में इजरायल के सबसे बड़े मित्र रहे हैं,लेकिन इसके साथ ही भारत जैसे कई अन्य देश भी इजरायल का लगातार समर्थन करते हैं।

अमेरिकी समाचार चैनल फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के साथ इजरायल के मजबूत संबंधों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत से इजरायल को जबरदस्त समर्थन मिलता है। उनका कहना था कि भारत के लोगों का समर्थन केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है,बल्कि सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक इजरायल के पक्ष में अपनी राय व्यक्त करते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं में भारतीय उपयोगकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी इसका एक बड़ा उदाहरण है।

नेतन्याहू ने अपने साक्षात्कार में कहा कि भारत और इजरायल के संबंध वर्षों के दौरान लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा,कृषि,विज्ञान,प्रौद्योगिकी,साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत केवल एक रणनीतिक साझेदार ही नहीं,बल्कि ऐसा मित्र देश भी है जिस पर इजरायल भरोसा करता है। उनके अनुसार,दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंध भविष्य में भी और अधिक मजबूत होंगे।

इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केवल भारत ही नहीं,बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों के नेता भी निजी तौर पर इजरायल का समर्थन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि अनेक राष्ट्र इजरायल के साथ रक्षा,साइबर सुरक्षा,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अत्याधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। उनका कहना था कि वैश्विक स्तर पर इजरायल की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा विशेषज्ञता को लेकर कई देशों में विश्वास है, जिसके कारण सहयोग की संभावनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

साक्षात्कार के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप व्हाइट हाउस में इजरायल के सबसे बड़े मित्र रहे हैं और उनके कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिली। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी नेताओं की राय हर मुद्दे पर समान होना आवश्यक नहीं है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जेडी वेंस की टिप्पणी से वह पूरी तरह सहमत नहीं हैं,क्योंकि उनका मानना है कि इजरायल के कई अन्य मजबूत सहयोगी भी हैं और भारत उनमें प्रमुख स्थान रखता है।

बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी और डोनाल्ड ट्रंप की सोच पूरी तरह एक जैसी है। उनके अनुसार,ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इजरायल की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौता नहीं भी हो पाता है,तब भी उनके प्रधानमंत्री रहते इजरायल किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

गौरतलब है कि पिछले महीने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक बयान में कहा था कि वर्तमान समय में डोनाल्ड ट्रंप ही दुनिया के ऐसे एकमात्र शीर्ष नेता हैं,जो इजरायल के प्रति पूरी सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि वह स्वयं इजरायली सरकार का हिस्सा होते,तो अपने सबसे शक्तिशाली सहयोगी की सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। जेडी वेंस के इस बयान को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा हुई थी और अब बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह स्पष्ट किया है कि इजरायल के मित्र देशों की सूची केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है।

भारत का उल्लेख करते हुए नेतन्याहू ने यह संदेश देने की कोशिश की कि दोनों देशों के संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं,बल्कि जनता के स्तर पर भी दोनों देशों के बीच सकारात्मक भावना मौजूद है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग,कृषि तकनीक,जल प्रबंधन,साइबर सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद भी नियमित रूप से होता रहा है और विभिन्न वैश्विक मंचों पर कई मुद्दों पर दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ सहयोग किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेंजामिन नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है,जब पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति,ईरान के परमाणु कार्यक्रम और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे माहौल में भारत का सार्वजनिक रूप से उल्लेख करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि इजरायल नई दिल्ली के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को विशेष महत्व देता है। साथ ही यह बयान भारत और इजरायल के बीच विकसित हुए व्यापक सहयोग और आपसी विश्वास को भी रेखांकित करता है।

नेतन्याहू की टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि इजरायल अपने वैश्विक साझेदारों के दायरे को व्यापक मानता है और भारत को उनमें एक महत्वपूर्ण स्थान देता है। आने वाले समय में रक्षा,प्रौद्योगिकी,व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।