लॉर्ड्स में यास्तिका भाटिया का ऐतिहासिक शतक (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

लॉर्ड्स में यास्तिका भाटिया का ऐतिहासिक शतक,महिला टेस्ट क्रिकेट में रचा नया इतिहास

लंदन,13 जुलाई (युआईटीवी)- भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदानों में से एक लॉर्ड्स पर इतिहास रच दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र महिला टेस्ट मैच की दूसरी पारी में उन्होंने शानदार 113 रन बनाकर कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अपने नाम कर लीं। यास्तिका लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला बल्लेबाज बन गई हैं। उनके इस यादगार प्रदर्शन ने न केवल भारतीय महिला क्रिकेट को गौरवान्वित किया, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भी उनका नाम हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर पहली बार महिला टेस्ट मैच खेला जा रहा है और इस अवसर को यास्तिका ने अपने करियर की सबसे शानदार पारियों में बदल दिया। उन्होंने 158 गेंदों का सामना करते हुए 14 आकर्षक चौके लगाए और पूरे धैर्य,तकनीक तथा आत्मविश्वास के साथ इंग्लैंड के गेंदबाजों का सामना किया। उनकी इस पारी ने भारत को विशाल बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मेजबान टीम पर दबाव और बढ़ा दिया।

यास्तिका की यह पारी केवल एक शतक तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसके साथ उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट के कई पुराने रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिए। वह टेस्ट मैच की तीसरी या चौथी पारी में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला बल्लेबाज बन गई हैं। इससे पहले इस सूची में सबसे बड़ा स्कोर संध्या अग्रवाल के नाम दर्ज था,जिन्होंने वर्ष 1985 में न्यूजीलैंड के खिलाफ लखनऊ में 98 रन बनाए थे। उससे पहले वर्ष 1984 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में 83 रन की शानदार पारी खेली थी। यास्तिका ने इन दोनों उपलब्धियों को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया।

उनकी उपलब्धि का एक और खास पहलू यह है कि वह लॉर्ड्स में टेस्ट शतक लगाने वाली दूसरी बाएं हाथ की भारतीय बल्लेबाज बन गई हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि केवल पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के नाम दर्ज थी,जिन्होंने वर्ष 1996 में अपने टेस्ट पदार्पण मैच में इसी मैदान पर 131 रन की यादगार पारी खेली थी। अब लगभग तीन दशक बाद यास्तिका ने उसी ऐतिहासिक मैदान पर अपने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया है,जिसने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को गौरवान्वित कर दिया।

मैच की शुरुआत इंग्लैंड के टॉस जीतने के बाद भारत को पहले बल्लेबाजी का निमंत्रण मिलने से हुई। भारतीय टीम ने पहली पारी में 285 रन बनाए। शीर्ष क्रम की बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने शानदार 83 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 58 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली,जबकि दीप्ति शर्मा ने भी 57 रन का उपयोगी योगदान देकर भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया। इंग्लैंड की ओर से सोफी एक्लेस्टोन सबसे सफल गेंदबाज रहीं और उन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए।

भारत की पहली पारी के जवाब में इंग्लैंड की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। पूरी टीम केवल 170 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड की ओर से एमी जोन्स ने सर्वाधिक 52 रन बनाए,जबकि कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने 44 रन का योगदान दिया। इसके अलावा कोई भी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजी आक्रमण का मजबूती से सामना नहीं कर सका।

भारतीय गेंदबाजों में क्रांति गौड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाँच विकेट हासिल किए। उनकी धारदार गेंदबाजी ने इंग्लैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी और भारत को पहली पारी के आधार पर 115 रन की महत्वपूर्ण बढ़त मिल गई। इस बढ़त ने भारतीय टीम को मैच पर मजबूत पकड़ बनाने का अवसर प्रदान किया।

दूसरी पारी में भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक लेकिन संयमित बल्लेबाजी की। स्मृति मंधाना ने एक बार फिर अपनी शानदार फॉर्म का प्रदर्शन करते हुए 70 रन बनाए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाया। इसके बाद यास्तिका भाटिया ने पारी की जिम्मेदारी सँभालते हुए धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी का बेहतरीन नमूना पेश किया। उन्होंने शुरुआत में विकेट सँभालकर खेला और जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ी,अपने शॉट्स की रफ्तार बढ़ाते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।

यास्तिका ने अपने शतक तक पहुँचने के दौरान किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाई। उनकी बल्लेबाजी में तकनीकी मजबूती,शानदार फुटवर्क और बेहतरीन शॉट चयन साफ दिखाई दिया। उन्होंने ढीली गेंदों का पूरा फायदा उठाया और मैदान के चारों ओर आकर्षक चौके लगाए। उनकी पारी ने यह साबित किया कि वह लंबे प्रारूप में भी बड़ी और मैच जिताऊ पारियाँ खेलने की क्षमता रखती हैं।

भारतीय बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम की कुल बढ़त 400 रन के पार पहुँच गई। इस विशाल बढ़त ने भारत को मुकाबले में पूरी तरह मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। दूसरी पारी के दौरान भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा और मैच का रुख पूरी तरह अपने पक्ष में मोड़ दिया।

लॉर्ड्स के मैदान पर शतक बनाना किसी भी क्रिकेटर के लिए एक सपने के सच होने जैसा माना जाता है। इस ऐतिहासिक मैदान पर कई महान बल्लेबाजों ने यादगार पारियाँ खेली हैं और अब यास्तिका भाटिया का नाम भी उसी सूची में शामिल हो गया है। विशेष बात यह है कि महिला टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लॉर्ड्स पर यह पहला टेस्ट मैच खेला जा रहा है और उसी मैच में पहला शतक भी भारतीय बल्लेबाज के बल्ले से निकला है।

यास्तिका की यह पारी भारतीय महिला क्रिकेट के विकास और खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास का भी प्रतीक मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला टीम ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और अब टेस्ट क्रिकेट में भी भारतीय बल्लेबाज बड़े मंच पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।

फिलहाल मुकाबले में भारत पूरी तरह मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। पहली पारी की बढ़त और दूसरी पारी में स्मृति मंधाना तथा यास्तिका भाटिया की शानदार बल्लेबाजी ने इंग्लैंड के सामने बेहद कठिन लक्ष्य खड़ा कर दिया है। मैच के अंतिम चरण में भारतीय गेंदबाजों के पास इस मजबूत स्थिति को जीत में बदलने का सुनहरा अवसर होगा। वहीं, यास्तिका भाटिया का यह ऐतिहासिक शतक लंबे समय तक भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे यादगार पारियों में गिना जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।