चमोली,13 जुलाई (युआईटीवी)- उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस बहुचर्चित प्रकरण की जाँच के दौरान अब एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है,जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार,मामले में अहम सबूत मानी जा रही 32 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जाँच टीम को नहीं मिल सकी है। बताया जा रहा है कि यही रिकॉर्डिंग दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े घटनाक्रम को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती थी। अब इस फुटेज को दोबारा प्राप्त करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक,शुरुआत में यह दावा किया गया था कि बद्रीनाथ धाम परिसर की लगभग 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है और आवश्यकता पड़ने पर उसे जाँच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाएगा। हालाँकि,जाँच आगे बढ़ने पर पता चला कि रिकॉर्डिंग का बड़ा हिस्सा उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में जाँच अधिकारियों के पास केवल सीमित अवधि की फुटेज मौजूद है,जबकि लगभग 32 दिनों की रिकॉर्डिंग गायब बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि रिकॉर्डिंग तकनीकी कारणों से नष्ट हुई या फिर इसे जानबूझकर हटाया गया।
सूत्रों का कहना है कि गायब हुई रिकॉर्डिंग को वापस लाने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम लगातार काम कर रही है। यदि रिकॉर्डिंग को किसी तकनीकी माध्यम से पुनर्प्राप्त किया जा सका तो इससे जाँच को नई दिशा मिल सकती है। अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज मामले की सच्चाई सामने लाने में सबसे अहम साक्ष्यों में से एक हो सकती है।
इससे पहले विशेष जाँच दल ने अपनी विस्तृत जाँच पूरी कर रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी थी। सूत्रों के अनुसार,चार सदस्यीय जाँच समिति ने करीब 18 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है,जिसमें पूरी घटना,उपलब्ध साक्ष्यों और जाँच के दौरान सामने आए तथ्यों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कथित तौर पर दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कई स्तरों पर अनियमितताओं और धन की हेराफेरी के संकेत मिलने की बात कही गई है।
जाँच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि समिति को घटना वाले दिन यानी दो जुलाई से केवल 14 दिन पहले तक की ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मिल सकी। इससे पहले की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं थी। बताया गया कि मंदिर परिसर में पहले से लगे सीसीटीवी कैमरों की तकनीकी क्षमता सीमित थी और उनकी स्टोरेज केवल लगभग 15 दिनों तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने में सक्षम थी। इसी कारण पुराने वीडियो अपने आप ओवरराइट हो गए या उपलब्ध नहीं रहे। हालाँकि,यह भी जाँच का विषय बना हुआ है कि जिन 32 दिनों की रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया जा रहा है,वह आखिर क्यों उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के अनुसार,दो जुलाई की फुटेज में कथित आरोपी को दान राशि से संबंधित गतिविधियों में संदिग्ध रूप से शामिल होते हुए देखा गया है। इसके अलावा घटना से पहले के 14 दिनों की रिकॉर्डिंग के कुछ हिस्से भी जाँच टीम के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन फुटेज के आधार पर पूरे घटनाक्रम की समय-रेखा तैयार करने में मदद मिल सकती है।
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी का मामला एक और दो जुलाई के दौरान सामने आया था। प्रारंभिक जाँच में ऐसे संकेत मिले थे कि श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल ने कथित तौर पर बिना अनुमति मंदिर निधि से धन निकाला था। इस जानकारी के सामने आने के बाद मंदिर समिति ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और पूरे मामले की जाँच के आदेश दिए।
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सात जुलाई को प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई। समिति ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थान में वित्तीय मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए समिति ने पहले ही चार सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया था। इस समिति को सभी उपलब्ध दस्तावेजों,वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जाँच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। जाँच समिति ने कई दिनों तक दस्तावेजों का परीक्षण किया, संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया।
अब 32 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद जाँच और अधिक जटिल हो गई है। तकनीकी विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि रिकॉर्डिंग को डिजिटल माध्यम से दोबारा प्राप्त किया जा सकता है या नहीं। यदि फुटेज सफलतापूर्वक रिकवर हो जाती है,तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित हेराफेरी की घटनाएँ कब और किस प्रकार हुईं तथा इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
मामले ने धार्मिक संस्थानों में दान और चढ़ावे के प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी चर्चा तेज कर दी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष बद्रीनाथ धाम में दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में इन निधियों का पारदर्शी,जवाबदेह और सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक डिजिटल निगरानी प्रणाली,अधिक क्षमता वाले सीसीटीवी स्टोरेज और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने से भविष्य में इस प्रकार के विवादों से बचा जा सकता है।
फिलहाल जाँच एजेंसियाँ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन पड़ताल कर रही हैं। साथ ही गायब सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को पुनर्प्राप्त करने के प्रयास भी जारी हैं। जाँच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान राशि में कथित हेराफेरी किस स्तर तक हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और गायब हुई रिकॉर्डिंग के पीछे तकनीकी कारण थे या किसी प्रकार की जानबूझकर की गई छेड़छाड़। पूरे मामले पर उत्तराखंड प्रशासन और श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की नजर बनी हुई है तथा अंतिम जाँच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
