नई दिल्ली,15 जुलाई (युआईटीवी)- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज रफ्तार ने दुनिया भर की प्रौद्योगिकी कंपनियों के सामने नई चुनौतियां और अवसर खड़े कर दिए हैं। इस बदलते तकनीकी परिदृश्य में कई कंपनियों ने अपने कारोबार की दिशा तेजी से बदली, जबकि कुछ कंपनियाँ ग्राहकों की नई प्राथमिकताओं को समय रहते नहीं समझ सकीं। इसी कड़ी में अमेरिका की दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम ने स्वीकार किया है कि वह ग्राहकों के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते निवेश के रुझान को सही समय पर समझने में चूक गई। कंपनी के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद कृष्णा ने माना कि इस रणनीतिक चूक का असर अब कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में साफ दिखाई दे रहा है।
दूसरी तिमाही के शुरुआती वित्तीय नतीजों के साथ निवेशकों को भेजे गए पत्र में अरविंद कृष्णा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कंपनी ने यह अनुमान तो लगाया था कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी कुछ चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं,लेकिन यह उम्मीद नहीं की थी कि ग्राहक अपने प्रौद्योगिकी बजट का बड़ा हिस्सा सर्वर,स्टोरेज और मेमोरी जैसे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने लगेंगे। उन्होंने कहा कि बाजार में आए इस बदलाव का असर कंपनी की आय और बड़े व्यावसायिक सौदों पर पड़ा है।
अरविंद कृष्णा ने अपने संदेश में स्वीकार किया कि वास्तविक स्थिति कंपनी की अपेक्षाओं से कहीं अधिक कठिन साबित हुई। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में आईबीएम की टीमों से तेज निर्णय और तेजी से बदलते हालात के अनुरूप काम करने की उम्मीद थी,लेकिन कंपनी उस गति से खुद को नहीं बदल सकी। इसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक समझौते तय समय पर पूरे नहीं हो पाए और इसका सीधा असर दूसरी तिमाही के प्रदर्शन पर दिखाई दिया।
कंपनी के इस स्वीकारोक्ति भरे बयान का असर शेयर बाजार में भी तुरंत देखने को मिला। निवेशकों की चिंता बढ़ने के बाद आईबीएम के शेयरों में लगभग 25 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी के नेतृत्व द्वारा रणनीतिक चूक स्वीकार करना पारदर्शिता का संकेत जरूर है,लेकिन निवेशकों के लिए यह संकेत भी है कि प्रतिस्पर्धी तकनीकी बाजार में आईबीएम को अपनी गति और रणनीति दोनों में तेजी लानी होगी।
आईबीएम के अनुसार,दूसरी तिमाही के दौरान ग्राहकों ने अपने तकनीकी निवेश की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव किया। कंपनी ने बताया कि संभावित मूल्य वृद्धि और सीमित उपलब्धता को देखते हुए कई ग्राहकों ने जून के अंतिम सप्ताह में अपने तिमाही बजट का बड़ा हिस्सा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित करने पर खर्च कर दिया। इससे उन परियोजनाओं और सेवाओं पर असर पड़ा,जिन पर आईबीएम का पारंपरिक कारोबार काफी हद तक निर्भर रहा है।
कंपनी ने यह भी माना कि साइबर सुरक्षा से जुड़े तेजी से बदलते वैश्विक खतरे भी ग्राहकों की प्राथमिकताओं में बदलाव का एक बड़ा कारण बने। संस्थानों और बड़े उद्यमों ने सुरक्षा से जुड़े निवेश को तत्काल प्राथमिकता दी,जिससे अन्य तकनीकी सेवाओं पर खर्च अपेक्षाकृत कम हुआ। इसका प्रभाव विशेष रूप से आईबीएम के इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार पर पड़ा।
दूसरी तिमाही के शुरुआती वित्तीय आँकड़ों के अनुसार,आईबीएम ने 17.2 अरब डॉलर की आय दर्ज की,जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में केवल एक प्रतिशत अधिक रही। यह वृद्धि कंपनी की अपेक्षाओं के मुकाबले काफी कम मानी जा रही है। हालाँकि,सॉफ्टवेयर कारोबार में पाँच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई,लेकिन कंसल्टिंग कारोबार लगभग स्थिर रहा। सबसे अधिक दबाव इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार पर देखने को मिला,जहाँ आय में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कमाई के आँकड़ों पर नजर डालें,तो कंपनी की प्रति शेयर डाइल्यूटेड आय दो प्रतिशत घटकर 2.27 डॉलर रह गई। हालाँकि,परिचालन स्तर पर प्रति शेयर कमाई में पाँच प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 2.93 डॉलर तक पहुँच गई। इसके बावजूद निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से कुल आय में आई सुस्ती और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित रहा।
अरविंद कृष्णा ने बताया कि इस तिमाही में सबसे अधिक निराशाजनक प्रदर्शन कंपनी के जेड मेनफ्रेम कारोबार और उससे जुड़े सॉफ्टवेयर व्यवसाय का रहा। विशेष रूप से ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर की मांग उम्मीद से कमजोर रही,जिससे कुल आय पर दबाव बढ़ा। आईबीएम लंबे समय से अपने मेनफ्रेम प्लेटफॉर्म को एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए एक मजबूत समाधान के रूप में पेश करती रही है,लेकिन बदलते तकनीकी वातावरण में ग्राहकों का ध्यान अब एआई आधारित सर्वर और कंप्यूटिंग क्षमताओं की ओर अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
हालाँकि,कंपनी ने मौजूदा चुनौतियों के बावजूद अपने दीर्घकालिक भविष्य को लेकर भरोसा जताया है। अरविंद कृष्णा ने कहा कि आईबीएम लगातार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। उनका कहना है कि ये दोनों क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक तकनीकी उद्योग की दिशा तय करेंगे और आईबीएम इन क्षेत्रों में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि एक तिमाही का कमजोर प्रदर्शन कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति को नहीं बदलता। उनके अनुसार आईबीएम का पोर्टफोलियो मजबूत है और कंपनी का रणनीतिक बदलाव सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में कंपनी बाजार की नई मांगों के अनुरूप अपने उत्पादों और सेवाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से विकसित करेगी।
तकनीकी उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में दुनिया भर की बड़ी कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश कर रही हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाले प्रोसेसर,स्टोरेज सिस्टम और मेमोरी समाधान की माँग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जिन कंपनियों ने समय रहते अपनी रणनीति बदली,उन्हें बाजार का लाभ मिला, जबकि पारंपरिक कारोबार पर अधिक निर्भर कंपनियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
आईबीएम का यह स्वीकार करना कि वह ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं को समय पर नहीं समझ सकी,इस बात का संकेत है कि वैश्विक तकनीकी उद्योग में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक तेज हो चुकी है। अब केवल नवाचार ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि बाजार की दिशा को समय रहते समझना और उसी गति से रणनीति बदलना भी उतना ही आवश्यक हो गया है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूसरी तिमाही के वित्तीय विवरणों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अभी जारी है। आईबीएम अपने विस्तृत वित्तीय परिणाम 22 जुलाई को जारी करेगी। उस समय निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजर विशेष रूप से कंपनी के भविष्य के मार्गदर्शन,एआई कारोबार की प्रगति और अगले महीनों की रणनीति पर रहेगी।
आईबीएम के लिए आने वाला समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक तकनीकी उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे बड़ा निवेश क्षेत्र बन चुका है। यदि कंपनी अपने एआई,क्लाउड और क्वांटम कंप्यूटिंग कारोबार को अपेक्षित गति दे पाती है,तो वह फिर से मजबूत स्थिति हासिल कर सकती है। फिलहाल कंपनी के नेतृत्व ने अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य की रणनीति में तेजी, लचीलापन और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप निर्णय लेना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
