व्हाइट हाउस ने 'गोल्ड ईगल' साइबर शील्ड लॉन्च किया (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

‘गोल्ड ईगल’ के जरिए साइबर सुरक्षा को नई धार देगा अमेरिका,व्हाइट हाउस ने एआई आधारित सुरक्षा तंत्र किया लॉन्च

वॉशिंगटन,15 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी तैयारियों को नई दिशा देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। व्हाइट हाउस ने ‘गोल्ड ईगल’ नामक एक अत्याधुनिक एआई क्लियरिंग हाउस लॉन्च किया है,जिसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में मौजूद साइबर सुरक्षा संबंधी कमजोरियों की पहचान करना,उनका विश्लेषण करना और उन्हें तेज़ी से दूर करना है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह नई व्यवस्था साइबर खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय को भी नई गति देगी।

व्हाइट हाउस के अनुसार, ‘गोल्ड ईगल’ केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि एक व्यापक सहयोगी तंत्र है,जिसमें संघीय एजेंसियाँ,ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर समुदाय,निजी क्षेत्र की कंपनियाँ और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ एक साझा मंच पर काम करेंगे। इस पहल के माध्यम से साइबर कमजोरियों की जानकारी एकत्र की जाएगी,उनका आकलन किया जाएगा और जोखिम के आधार पर उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी,ताकि सुरक्षा विशेषज्ञ समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकें।

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि आज के दौर में साइबर हमले केवल कंप्यूटर नेटवर्क तक सीमित नहीं हैं,बल्कि बिजली,बैंकिंग,परिवहन,स्वास्थ्य सेवाओं,संचार और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी कमजोरी का शीघ्र पता लगाना और उसे दूर करना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘गोल्ड ईगल’ को विकसित किया गया है।

व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि यह नई प्रणाली मौजूदा संघीय अधिकारों और संसाधनों का उपयोग करेगी। इस परियोजना को तैयार करने में अमेरिकी वित्त विभाग,गृह सुरक्षा विभाग, साइबर सुरक्षा एवं अवसंरचना सुरक्षा एजेंसी तथा युद्ध विभाग ने निजी उद्योगों और तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर काम किया है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच यह साझेदारी भविष्य में साइबर खतरों से निपटने की क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

‘गोल्ड ईगल’ का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण तंत्र है। यह प्लेटफॉर्म बड़ी मात्रा में उपलब्ध साइबर खतरे संबंधी जानकारी को बहुत कम समय में प्रोसेस कर सकेगा। इसके माध्यम से संभावित कमजोरियों की पहचान,उनके जोखिम का मूल्यांकन और प्राथमिकता तय करने का काम पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और सटीक तरीके से किया जा सकेगा। इससे सरकारी एजेंसियों और निजी संस्थानों को समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाने में मदद मिलेगी।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस पहल का एक उद्देश्य उन दोहराए जाने वाले कार्यों को भी कम करना है,जो वर्तमान में विभिन्न एजेंसियाँ अलग-अलग स्तर पर करती हैं। कई बार एक ही प्रकार की सुरक्षा जाँच अनेक संस्थानों द्वारा अलग-अलग की जाती है,जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। ‘गोल्ड ईगल’ इस प्रक्रिया को केंद्रीकृत करते हुए अधिक प्रभावी और समन्वित व्यवस्था विकसित करेगा।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस पहल को देश की वित्तीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में वित्त विभाग लगातार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर अमेरिकी वित्तीय संस्थानों को सुरक्षित बनाने और साइबर कमजोरियों को दूर करने के लिए काम कर रहा है। उनके अनुसार,अत्याधुनिक एआई तकनीक का उपयोग करके अमेरिका अपने विरोधियों से एक कदम आगे रहने और उभरते साइबर खतरों से नागरिकों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।

स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वित्तीय प्रणाली पर साइबर हमलों का असर केवल बैंकों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि इसका प्रभाव पूरे आर्थिक ढाँचे पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार और निजी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘गोल्ड ईगल’ इस दिशा में एक प्रभावी भूमिका निभाएगा।

यह नई पहल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो जून को जारी किए गए उस कार्यकारी आदेश के तहत स्थापित की गई है,जिसका उद्देश्य उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। व्हाइट हाउस ने इसे साइबर रक्षा के क्षेत्र में एक नए परिचालन मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है। प्रशासन का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तेज़ निर्णय लेने और त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित होगी।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अमेरिका साइबर क्षेत्र में युद्धकाल जैसी तत्परता के साथ काम कर रहा है। उनके अनुसार,आज साइबर हमले किसी भी देश की सुरक्षा के लिए उतने ही गंभीर खतरे बन चुके हैं,जितने पारंपरिक सैन्य हमले। उन्होंने कहा कि ‘गोल्ड ईगल’ के माध्यम से अमेरिका अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए देश के प्रमुख नवोन्मेषकों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर अत्याधुनिक एआई तकनीक का उपयोग करेगा।

गृह सुरक्षा मंत्री मार्कवेन मुलिन ने कहा कि यह साझेदारी मौजूदा सॉफ्टवेयर और नेटवर्क सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार यह लगातार अध्ययन कर रही है कि नई तकनीकों का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए किस प्रकार किया जा सकता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीकी नवाचार अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करें।

व्हाइट हाउस के अनुसार, ‘गोल्ड ईगल’ ने पहले ही विभिन्न उद्योगों में पहचानी गई साइबर कमजोरियों की जानकारी एकत्र करना और उन्हें प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह सॉफ्टवेयर और नेटवर्क की स्कैनिंग,सत्यापन और सुधार संबंधी प्रयासों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का कार्य भी कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे महत्वपूर्ण अवसंरचना क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा का स्तर और मजबूत होगा।

राष्ट्रीय साइबर निदेशक शॉन केर्नक्रॉस ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका की अग्रणी स्थिति बनाए रखने के लिए सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख नवप्रवर्तकों के सहयोग से अमेरिका भविष्य के लिए अधिक सुरक्षित और सक्षम साइबर ढाँचा तैयार कर रहा है। उनके अनुसार,यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अमेरिका की नेतृत्वकारी भूमिका को भी मजबूत करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में साइबर हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच सरकारों के लिए पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों के साथ-साथ एआई आधारित समाधानों को अपनाना आवश्यक होता जा रहा है। ऊर्जा संयंत्र,वित्तीय संस्थान,संचार नेटवर्क,अस्पताल, जल आपूर्ति प्रणाली और परिवहन नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ‘गोल्ड ईगल’ जैसी पहल संभावित खतरों का पहले से पता लगाने और समय रहते आवश्यक कदम उठाने में मदद कर सकती है।

अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इस परियोजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा इसमें नई तकनीकों और अतिरिक्त साझेदार संस्थानों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य ऐसा समन्वित साइबर सुरक्षा नेटवर्क तैयार करना है,जो बदलते डिजिटल परिदृश्य के अनुरूप तेजी से प्रतिक्रिया दे सके और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण ढाँचों को सुरक्षित रख सके।

व्हाइट हाउस का कहना है कि ‘गोल्ड ईगल’ केवल वर्तमान साइबर चुनौतियों का समाधान नहीं है,बल्कि भविष्य के खतरों को ध्यान में रखकर विकसित की गई दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता का उपयोग करते हुए यह प्रणाली जोखिमों की पहचान,उनके विश्लेषण और त्वरित समाधान की दिशा में नई संभावनाएँ खोलेगी। अमेरिकी प्रशासन को उम्मीद है कि यह पहल देश की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमेरिका की अग्रणी भूमिका को भी और अधिक सशक्त बनाएगी।