मुंबई,22 जुलाई (युआईटीवी)- बंधन बैंक के शेयर में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। बैंक की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने रिटर्न-ऑन-एसेट (आरओए) के अनुमान को घटाने के बाद निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ गई, जिसका सीधा असर शेयर कीमत पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान बैंक का शेयर 17 प्रतिशत से अधिक टूट गया। हालाँकि,बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मुनाफे और परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया,लेकिन भविष्य के लिए जारी किए गए कमजोर आउटलुक ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बैंक ने तिमाही नतीजों के साथ अपने आरओए अनुमान में कटौती की घोषणा की। पहले बैंक को उम्मीद थी कि वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही तक उसका रिटर्न-ऑन-एसेट 1.6 से 1.8 प्रतिशत के बीच रहेगा,लेकिन अब इसे घटाकर 1.2 से 1.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव का प्रमुख कारण शुद्ध ब्याज मार्जिन में अपेक्षा से अधिक दबाव और परिचालन लागत में वृद्धि बताया गया है।
बंधन बैंक के अनुसार,आरओए अनुमान में कुल 40 आधार अंकों की कमी की गई है। इसमें 30 आधार अंकों की गिरावट शुद्ध ब्याज मार्जिन के कमजोर रहने के कारण हुई है, जबकि 10 आधार अंकों की कमी परिचालन खर्च बढ़ने की वजह से की गई है। बैंक का मानना है कि बढ़ती लागत और मार्जिन पर दबाव का असर आने वाली तिमाहियों में भी बना रह सकता है।
बैंक के इस संशोधित अनुमान के बाद शेयर बाजार में निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की। दोपहर करीब 12 बजे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर बंधन बैंक का शेयर 17.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 172.40 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान शेयर 171.56 रुपये के निचले स्तर तक भी पहुँच गया। यह गिरावट इस बात का संकेत मानी जा रही है कि निवेशकों ने बैंक के भविष्य के प्रदर्शन को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।
दिलचस्प बात यह है कि बैंक के तिमाही वित्तीय नतीजे अपेक्षाकृत मजबूत रहे। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बंधन बैंक का शुद्ध लाभ लगभग 35 प्रतिशत बढ़कर 502 करोड़ रुपये पहुँच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में बैंक का मुनाफा 372 करोड़ रुपये था। मुनाफे में यह वृद्धि बैंक के परिचालन प्रदर्शन और प्रावधानों में कमी का परिणाम मानी जा रही है।
इसी अवधि में बैंक की शुद्ध ब्याज आय भी बढ़ी। पहली तिमाही के दौरान शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 2,921 करोड़ रुपये हो गई। बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 6.2 प्रतिशत दर्ज किया गया,जो मौजूदा परिस्थितियों में संतोषजनक माना जा रहा है। हालाँकि,भविष्य में इसी मार्जिन पर दबाव रहने की आशंका के चलते बैंक ने अपने आउटलुक में संशोधन किया है।
बंधन बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (ग्रॉस एनपीए) अनुपात पिछली तिमाही के 3.27 प्रतिशत से घटकर 3.15 प्रतिशत रह गया। वहीं शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (नेट एनपीए) अनुपात भी 0.97 प्रतिशत से घटकर 0.93 प्रतिशत पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि बैंक ने खराब ऋणों पर नियंत्रण बनाए रखने में सफलता हासिल की है।
प्रावधानों के मोर्चे पर भी बैंक को राहत मिली। एक वर्ष पहले जहाँ बैंक ने 1,147 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था,वहीं इस बार यह घटकर 683 करोड़ रुपये रह गया। प्रावधानों में आई इस उल्लेखनीय कमी ने बैंक के मुनाफे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि परिसंपत्ति गुणवत्ता में इसी प्रकार सुधार जारी रहता है,तो भविष्य में बैंक की लाभप्रदता को और समर्थन मिल सकता है।
हालाँकि,मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद बाजार ने भविष्य के कमजोर अनुमान को अधिक महत्व दिया। निवेशकों का मानना है कि यदि शुद्ध ब्याज मार्जिन पर दबाव बना रहता है और परिचालन लागत बढ़ती है,तो आने वाली तिमाहियों में बैंक की आय वृद्धि प्रभावित हो सकती है। यही वजह रही कि सकारात्मक तिमाही परिणाम भी शेयर में गिरावट को रोक नहीं सके।
बंधन बैंक के शेयर में आई तेज गिरावट ऐसे समय देखने को मिली जब पूरे भारतीय शेयर बाजार में भी कमजोरी का माहौल था। वैश्विक संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के बीच प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स लगभग 690 अंक यानी 0.89 प्रतिशत टूटकर 76,790 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी भी 188 अंक यानी 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,999 के स्तर पर पहुँच गया।
बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी बैंक सूचकांक करीब 1.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 57,081 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों का रुझान पूरे बैंकिंग सेक्टर में फिलहाल सतर्क बना हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बंधन बैंक के ताजा नतीजे यह दिखाते हैं कि बैंक की मौजूदा वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है,लेकिन भविष्य के लिए प्रबंधन का सतर्क दृष्टिकोण निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। आने वाली तिमाहियों में बैंक के लिए सबसे बड़ी चुनौती शुद्ध ब्याज मार्जिन को स्थिर बनाए रखना,परिचालन लागत पर नियंत्रण रखना और लाभप्रदता में सुधार जारी रखना होगी। यदि बैंक इन मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन करता है,तो निवेशकों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सकता है। फिलहाल संशोधित आउटलुक के कारण बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और इसका असर बैंक के शेयर पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
