मनीला,23 जुलाई (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों फिलीपींस की राजधानी मनीला के दौरे पर हैं, जहाँ उन्होंने आसियान शिखर बैठकों और उससे जुड़े विभिन्न मंत्रिस्तरीय मंचों में हिस्सा लेते हुए भारत की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को मजबूती से प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने कई देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें कीं तथा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। उनके इस दौरे को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग और आसियान देशों के साथ व्यापक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मनीला में आयोजित बैठकों के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को और मजबूत बनाने,वैश्विक चुनौतियों से निपटने तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि काजा कैलास से मुलाकात करके उन्हें प्रसन्नता हुई। इस मुलाकात को भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगातार मजबूत हो रहे संबंधों की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश मंत्री ने अपने दौरे के दौरान श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ और बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से भी अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में भारत के पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद एस. जयशंकर ने एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक के दौरान श्रीलंका और बांग्लादेश के अपने समकक्षों से मिलकर उन्हें खुशी हुई। यह मुलाकातें भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती हैं।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार,विदेश मंत्री एस. जयशंकर 22 और 23 जुलाई 2026 को मनीला के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने आसियान ढांचे के अंतर्गत आयोजित कई महत्वपूर्ण विदेश मंत्रिस्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया। इनमें आसियान-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक,ईस्ट एशिया समिट तथा आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक शामिल रही। इन मंचों पर भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा,आर्थिक सहयोग,समुद्री संपर्क, व्यापार,आपदा प्रबंधन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता जैसे मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से रखा।
मनीला में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान एस. जयशंकर ने केवल आसियान सदस्य देशों तक ही अपनी कूटनीतिक गतिविधियों को सीमित नहीं रखा, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री सीनेटर पेनी वोंग,चीन के विदेश मंत्री वांग यी,अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो,रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियान बालाकृष्णन,कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद,थाईलैंड के प्रतिनिधि सिहासक फुआंगकेटकेओ,न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स तथा आसियान के महासचिव डॉ. काओ किम होर्न के साथ भी अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लिया।
इन बैठकों के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा,आर्थिक सहयोग,वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला,समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी जैसे अनेक विषयों पर चर्चा हुई। भारत ने अपने सभी साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मनीला में आयोजित क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया। बैठक के बाद उन्होंने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि क्वाड विदेश मंत्रियों के साथ बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और हाल के घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में हाल ही में हुई बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत स्वतंत्र,समावेशी,सुरक्षित और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के पक्ष में है तथा आसियान की केंद्रीय भूमिका का पूरा सम्मान करता है।
क्वाड देशों के बीच सहयोग को लेकर भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता,समुद्री सुरक्षा और नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। मनीला में हुई बैठक में भी इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया गया। भारत ने स्पष्ट किया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग किसी एक देश के खिलाफ नहीं,बल्कि शांति,स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि विदेश मंत्री का यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, भारत और आसियान के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों पक्ष व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यही कारण है कि दोनों पक्ष व्यापार,संपर्क,रक्षा,समुद्री सुरक्षा,डिजिटल सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा,नौवहन,ब्लू इकोनॉमी,आपदा प्रबंधन,समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और समुद्री संपर्क को मजबूत बनाना है। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत तथा आसियान देशों की साझा रणनीतिक और आर्थिक हितों को देखते हुए यह पहल दोनों पक्षों के लिए विशेष महत्व रखती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मनीला में एस. जयशंकर की सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी भारत की विदेश नीति की बदलती प्राथमिकताओं को भी दर्शाती है। भारत एक ओर अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है,वहीं दूसरी ओर प्रमुख वैश्विक शक्तियों और बहुपक्षीय संगठनों के साथ भी रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दे रहा है। आसियान देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत के लिए आर्थिक,सामरिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मनीला दौरे के दौरान हुई अनेक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को और अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की इन बैठकों से न केवल भारत और आसियान के बीच सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है,बल्कि विभिन्न वैश्विक साझेदारों के साथ भी भारत के संबंध और अधिक मजबूत होने की संभावना है। आने वाले समय में इन बैठकों में हुई चर्चाओं और समझ के आधार पर कई नए सहयोगात्मक कदम सामने आ सकते हैं,जो क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
