अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@mdzishan0786)

व्हाइट हाउस में ट्रंप की जेलेंस्की और नेतन्याहू से अहम मुलाकात, ईरान, यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सुरक्षा पर हुई गहन चर्चा

वॉशिंगटन,29 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में दो महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों के जरिए अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और बाद में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग मुलाकात की। दोनों बैठकें ऐसे समय हुईं,जब अमेरिका एक साथ दो बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों—रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव—से जुड़े जटिल कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी फैसलों का सामना कर रहा है। दोनों नेताओं के साथ हुई ये वार्ताएँ व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में बंद दरवाजों के पीछे आयोजित की गईं और इनमें मीडिया को शामिल नहीं किया गया।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने दोनों बैठकों के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपनी बैठकें पूरी कर ली हैं। उन्होंने बताया कि दोनों मुलाकातें सकारात्मक रहीं और विभिन्न महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत हुई। हालाँकि,व्हाइट हाउस ने बैठकों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया,लेकिन बाद में सामने आई जानकारियों से स्पष्ट हुआ कि दोनों वार्ताओं का केंद्र अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा,क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की कूटनीतिक रणनीति रही।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की मंगलवार सुबह लगभग 9 बजकर 40 मिनट पर व्हाइट हाउस पहुँचे। वे वेस्ट विंग के एक साइड एंट्रेंस से भीतर गए,जहाँ राष्ट्रपति ट्रंप ने उनका स्वागत किया। इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी सैन्य सहायता,वायु सुरक्षा प्रणाली और संभावित शांति वार्ता प्रमुख विषय रहे। रूस के साथ लंबे समय से जारी युद्ध के बीच यूक्रेन लगातार अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से सैन्य तथा आर्थिक सहायता की अपेक्षा करता रहा है। ऐसे में यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी गई।

बैठक के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने,आधुनिक रक्षा प्रणालियों की उपलब्धता और नई कूटनीतिक पहल पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों नेताओं के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के संभावित रास्तों पर विचार-विमर्श हुआ। जेलेंस्की वॉशिंगटन इस उम्मीद के साथ पहुँचे थे कि अमेरिका रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंधों पर विचार करेगा,ड्रोन सहयोग को आगे बढ़ाएगा और पैट्रियट हवाई रक्षा प्रणाली सहित अन्य सैन्य सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा।

सूत्रों के अनुसार, जेलेंस्की की अमेरिका यात्रा के दौरान उनकी कई अमेरिकी सांसदों से भी मुलाकात प्रस्तावित थी। इसके अलावा उनके पूरे सीनेट को संबोधित करने की संभावना भी जताई गई थी। यूक्रेन की कोशिश रही है कि अमेरिका का राजनीतिक और सैन्य समर्थन लगातार बना रहे,क्योंकि युद्ध अभी भी निर्णायक स्थिति तक नहीं पहुंचा है। व्हाइट हाउस ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनका प्रशासन रूस तथा यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त कराने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। प्रशासन का मानना है कि निरंतर कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से अंततः दोनों देशों के बीच शांति समझौते की संभावना बनाई जा सकती है।

दूसरी ओर,दोपहर के समय राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। रिपोर्टों के अनुसार,नेतन्याहू लगभग 12 बजकर 25 मिनट पर व्हाइट हाउस से रवाना हुए। बैठक के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दोनों नेताओं की साथ में तस्वीरें जारी कीं। एक इजरायली अधिकारी ने इस बैठक को अत्यंत सकारात्मक बताया और कहा कि दोनों नेताओं के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत का मुख्य केंद्र ईरान,लेबनान और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति रही। इसके अलावा अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में नए देशों को इस पहल से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। यह समझौता पश्चिम एशिया में अरब देशों और इजरायल के बीच संबंध सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है और अमेरिका लंबे समय से इसका समर्थन करता रहा है।

बैठक के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार,नेतन्याहू राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान की कथित परमाणु गतिविधियों से संबंधित कुछ नई खुफिया जानकारियाँ देने वाले थे। इनमें पिकैक्स माउंटेन नामक एक भूमिगत स्थल का भी उल्लेख किया गया,जिसके बारे में माना जाता है कि उसका संबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम से हो सकता है। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है,लेकिन यह मुद्दा दोनों देशों की सुरक्षा रणनीति में प्रमुख स्थान रखता है।

इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री की एक सार्वजनिक टिप्पणी पर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि नेतन्याहू ने अपनी योजना के बारे में सार्वजनिक घोषणा कर दी थी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से पूछा कि जब दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था है, तो पहले उन्हें जानकारी देने के बजाय इसे सार्वजनिक करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। इस बयान से यह संकेत मिला कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग मजबूत होने के बावजूद कुछ मुद्दों पर दृष्टिकोण में अंतर बना हुआ है।

ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल की रणनीतियों में भी कुछ अंतर दिखाई दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ईरान के साथ बातचीत की संभावना को पूरी तरह समाप्त नहीं मानते और यदि परिस्थितियाँ अनुकूल हों तो कूटनीतिक समाधान का रास्ता अपनाया जा सकता है। दूसरी ओर,इजरायल लगातार ईरान पर अधिक दबाव बनाए रखने की नीति का समर्थन करता रहा है। ट्रंप ने इससे पहले स्वीकार किया था कि दोनों देशों के बीच कुछ मतभेद हैं,लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दोनों सरकारें अधिकांश मामलों में एक-दूसरे के काफी करीब हैं।

मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख और स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि तेहरान किसी समझौते तक पहुंचने में विफल रहता है,तो अमेरिका पुलों,बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचों को निशाना बना सकता है। उनके इस बयान को ईरान के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। हालाँकि,उन्होंने साथ ही यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार होता है,तो अमेरिका कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने के लिए भी तैयार रहेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि व्हाइट हाउस में एक ही दिन यूक्रेन और इजरायल के नेताओं के साथ हुई ये बैठकें अमेरिकी विदेश नीति की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती हैं। एक ओर अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों में अपनी भूमिका बनाए रखना चाहता है,वहीं दूसरी ओर वह पश्चिम एशिया में ईरान,इजरायल और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय बना हुआ है। इन दोनों मोर्चों पर लिए जाने वाले निर्णय केवल संबंधित क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि वैश्विक सुरक्षा,ऊर्जा बाजार,अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और विश्व राजनीति पर भी उनका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

व्हाइट हाउस ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रशासन का कहना है कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे और अमेरिका युद्ध समाप्त करने के लिए हर संभव रचनात्मक भूमिका निभाएगा। साथ ही पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने,ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताओं का समाधान खोजने और अपने सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी अमेरिका सक्रिय रहेगा।

फिलहाल व्हाइट हाउस में हुई इन दोनों उच्चस्तरीय बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका आने वाले समय में वैश्विक संघर्षों के समाधान,अपने सहयोगियों के साथ रणनीतिक समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों को प्राथमिकता देता रहेगा। अब दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि इन बैठकों के बाद यूक्रेन युद्ध, ईरान के साथ संभावित बातचीत और पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों में अमेरिका आगे कौन से ठोस कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाता है।