कंगना रनौत (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

प्रदर्शनकारियों पर फिर बरसीं कंगना रनौत,सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- ‘जब बोलते हो, तो सुनना भी पड़ेगा’

मुंबई,29 जुलाई (युआईटीवी)- भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाने वाली कंगना ने इस बार छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई टिप्पणी की है। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए प्रदर्शनकारियों के व्यवहार,सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का जिक्र करते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।

कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि जिन प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर आम जनता का विरोध झेलना पड़ रहा है और जिन्हें लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है,उसके पीछे उनके अपने व्यवहार और सोशल मीडिया पर साझा किए गए कथित अभद्र वीडियो जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखता है,तो उसे दूसरों की प्रतिक्रिया सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

अपने पोस्ट में कंगना ने लिखा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बोलता है,तो यह स्वाभाविक है कि उसके विचारों पर प्रतिक्रिया भी आएगी। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार केवल एक पक्ष तक सीमित नहीं है,बल्कि हर नागरिक को अपनी बात कहने का समान अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार,यदि प्रदर्शनकारी सरकार और देश के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कठोर भाषा का प्रयोग करते हैं,तो उन लोगों को भी अपनी बात रखने का अधिकार है,जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सरकार का चुनाव किया है।

कंगना ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मुद्दे पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रदर्शन के दौरान सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाता है,तो आम जनता भी उसके प्रति नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकती है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि सार्वजनिक संपत्ति पूरे देश की होती है और उसे नुकसान पहुँचाना किसी भी रूप में उचित नहीं माना जा सकता।

अभिनेत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि हर क्रिया की एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने इस सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी के व्यवहार का प्रभाव समाज पर पड़ता है,तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। कंगना ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि यदि अब तक लोगों को कारण और प्रभाव का संबंध समझ में नहीं आया था,तो अब यह बात अच्छी तरह समझ आ जाएगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया और इस पर समर्थकों तथा आलोचकों,दोनों की प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगीं।

दरअसल,हाल के दिनों में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन्हीं घटनाओं को लेकर कंगना रनौत लगातार अपनी राय व्यक्त कर रही हैं। उन्होंने इससे पहले भी कई पोस्ट साझा करते हुए प्रदर्शनकारियों की भाषा, तौर-तरीकों और विरोध प्रदर्शन की शैली पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सभी को है,लेकिन विरोध के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली भाषा और व्यवहार भी मर्यादित होना चाहिए।

कुछ दिन पहले किए गए एक अन्य पोस्ट में कंगना ने प्रदर्शनकारियों के वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए उन्हें लेकर कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने लिखा था कि उन्होंने अपने जीवन में एक साथ इतनी अभद्रता पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने नई पीढ़ी के कुछ प्रदर्शनकारियों के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ तक कह दिया था। कंगना ने लिखा था कि विरोध-प्रदर्शन से जुड़े वीडियो देखकर उन्हें घिन आती है और उनमें इस्तेमाल की जा रही भाषा तथा बोलने के तरीके ने उन्हें परेशान किया है।

अपने पहले के पोस्ट में उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि आखिर ऐसी भाषा और व्यवहार को बढ़ावा कौन दे रहा है। उन्होंने कहा था कि समाज और परिवारों को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि नई पीढ़ी किस तरह के संस्कार और व्यवहार के साथ आगे बढ़ रही है। उनके इन बयानों पर उस समय भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली थीं।

कंगना रनौत अक्सर सामाजिक,राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जानी जाती हैं। सांसद बनने के बाद भी उन्होंने विभिन्न विषयों पर लगातार अपने विचार सार्वजनिक रूप से साझा किए हैं। कई बार उनके बयान राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन जाते हैं। उनके समर्थक उन्हें बेबाक और स्पष्टवादी मानते हैं,जबकि आलोचक उनके बयानों को विवादास्पद बताते रहे हैं।

इस बार भी छात्र आंदोलन को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर नई बहस को जन्म दिया है। एक वर्ग उनके विचारों का समर्थन करते हुए कह रहा है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किसी भी आंदोलन को कमजोर करता है। वहीं,कुछ लोगों का मानना है कि किसी भी विरोध प्रदर्शन का आकलन कानून और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए तथा सभी प्रदर्शनकारियों को एक ही दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन को नागरिकों का अधिकार माना जाता है,वहीं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और कानून का पालन करना भी समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में सार्वजनिक हस्तियों द्वारा दिए गए बयान अक्सर व्यापक चर्चा का विषय बन जाते हैं और समाज के विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलती हैं।

फिलहाल कंगना रनौत का यह नया सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा के केंद्र में है। उनके बयान पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रमों के बीच इस मुद्दे पर सार्वजनिक विमर्श किस दिशा में आगे बढ़ता है।