नई दिल्ली,30 जुलाई (युआईटीवी)- राज्यसभा में बुधवार को दिल्ली स्थित मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय एकेजी भवन में दिल्ली पुलिस के प्रवेश का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। इस मामले को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस एक छात्र नेता को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी मुख्यालय में दाखिल हुई थी। इस मुद्दे को नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब माँगा। वहीं,सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा सामान्य प्रशासनिक मामला है और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। बहस के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई,जिसके कारण सदन में लगातार हंगामा होता रहा और अंततः राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही के दौरान डॉ. जॉन ब्रिटास ने एकेजी भवन में पुलिस के प्रवेश का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का मामला नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में पुलिस के प्रवेश से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि पुलिस एक छात्र नेता को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से पार्टी मुख्यालय में पहुँची थी,जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार,राजनीतिक दलों के कार्यालयों की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।
डॉ. जॉन ब्रिटास के वक्तव्य के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मामले पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में इस प्रकार पुलिस का प्रवेश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से उचित नहीं माना जा सकता। खड़गे ने इसे बेहद गंभीर और शर्मनाक घटना बताते हुए कहा कि यदि आज एक राजनीतिक दल के कार्यालय में इस प्रकार प्रवेश किया जा सकता है,तो भविष्य में किसी अन्य दल के कार्यालय के साथ भी ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा के सभापति से आग्रह किया कि पूरे मामले की गंभीरता से जाँच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पुलिस को पार्टी कार्यालय में प्रवेश करने का आदेश किस स्तर से मिला और किन परिस्थितियों में यह कार्रवाई की गई। उन्होंने माँग की कि सरकार इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी सदन के सामने रखे और यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है,तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस घटना को आवश्यकता से अधिक तूल दिया जा रहा है। उनके अनुसार,यह पूरी तरह कानून-व्यवस्था से जुड़ा सामान्य प्रशासनिक मामला है और पुलिस ने अपने दायित्व के अनुरूप कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक होती है,तो पुलिस अपना कर्तव्य निभाती है और इसे लोकतंत्र पर हमला या असाधारण घटना के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
जेपी नड्डा ने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं लंबे समय तक छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं और आपातकाल के दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि एक बार नहीं,बल्कि दो बार उन्हें सीधे कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों और सक्रिय राजनीति में भाग लेने वाले लोगों को कई बार कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव के आधार पर वह यह समझते हैं कि पुलिस जब कानून के तहत कार्रवाई करती है तो उसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार,इस मामले में भी पुलिस ने अपने अधिकार क्षेत्र और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप कार्य किया है। इसलिए इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
जेपी नड्डा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के मामलों को सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता होती है,तो पुलिस को अपना दायित्व निभाने का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि कानून का पालन सभी पर समान रूप से लागू होता है।
सदन में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर लगातार तीखी बहस होती रही। विपक्षी दल इस घटना को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए सरकार से जवाब मांगते रहे, जबकि सत्ता पक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई करार देता रहा। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद के कारण सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा।
हंगामे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण सभापति को पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। हालाँकि,निर्धारित समय पर जब सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई,तब भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। विपक्ष ने एक बार फिर इस मुद्दे पर चर्चा की माँग करते हुए विरोध जारी रखा,जबकि सत्ता पक्ष अपने रुख पर कायम रहा।
लगातार जारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही फिर से बाधित हुई और अंततः राज्यसभा की बैठक दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान सदन में अन्य निर्धारित विधायी कार्य भी प्रभावित हुए।
एकेजी भवन में पुलिस प्रवेश का यह मामला अब राजनीतिक और संसदीय बहस का विषय बन गया है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है,जबकि सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह कानून-व्यवस्था से जुड़ी नियमित कार्रवाई थी और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। विपक्ष सरकार से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी और जवाबदेही की माँग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर अपना कर्तव्य निभाया है। राज्यसभा में हुई इस तीखी बहस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून-व्यवस्था और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे संसद में आने वाले दिनों में भी प्रमुख चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।
